world

राजनीतिक अस्थिरता की चपेट में थाईलैंड

विश्व भर के पर्यटकों को अपनी प्राकृतिक सुंदरता चलते आकर्षित करने वाला थाइलैंड बीते कुछ समय से राजनीतिक अस्थिरता का शिकार हो चला है। एक तरफ वहां राजशाही के खिलाफ जनता लामबंद होने लगी है तो दूसरी तरफ लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को एक अदालती आदेश ने गहरे संकट में डाल दिया। थाई सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री को नैतिकता के आट्टाार पर हटने के निर्देश दे सत्तारूढ़ दल को नया नेता चुनने को मजबूर कर दिया। विकल्पहीनता के चलते सत्तारूढ़ पार्टी ने हटाए गए प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन की युवा पुत्री को ही अपना नया नेता चुन लिया है। 37 वर्षीय पैतांगटार्न शिनावात्रा अब इस खूबसूरत देश की सबसे युवा प्रधानमंत्री बन चुकी हैं

थाईलैंड लंबे समय से ही कभी अदालती चक्र, तो कभी राजनीतिक अस्थिरता के चलते तख्तापलट का दंश झेलता रहा है। हाल ही में एक बार फिर यहां सत्ता परिवर्तन हुआ है जिसके बाद थाईलैंड को अबतक की सबसे युवा प्रधानमंत्री मिली है। 37 वर्षीय पैतोंगटार्न शिनावात्रा 18 अगस्त को शाही अनुमोदन पत्र प्राप्त कर देश की प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्त हो चुकी हैं। पैतोंगटार्न ने शपथ लेते हुए कहा कि ‘कार्यकारी शाखा के प्रमुख के रूप में, मैं विधायकों के साथ मिलकर खुले दिल से अपना कर्तव्य निभाऊंगी। ‘मैं सभी की राय सुनूंगी ताकि हम सब मिलकर देश को स्थिरता के साथ आगे ले जा सकें। संसद में वोटिंग के बाद बैंकाॅक में पार्टी कार्यालय में पैटोंगटार्न ने कहा कि वह बहुत सम्मानित महसूस कर रही हैं और खुश हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि मैं लोगों को भरोसा दिला पाऊंगी कि हम नए अवसर और अच्छे जीवन जीने के लिए जरूरी चीजों को पा सकते हैं। उनके कहने अनुसार उन्हें उम्मीद है कि देश को आगे बढ़ाने के लिए वो अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगी।

सर्वाेच्च न्यायलय थाईलैंड

सर्वाेच्च न्यायलय के आदेश के बाद संसद द्वारा पैतोंगटार्न को प्रधानमंत्री चुना गया है। इससे पहले देश कि शीर्ष अदालत ने पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन को नैतिक मूल्यों का उल्लंघन करने के आरोप में पद से हटा देने का निर्देश दिया था जिस चलते थाविसिन को प्रधानमंत्री की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। अभी उनके कार्यकाल को एक साल भी नहीं हुआ था कि उन्हें प्रधानमंत्री के पद को छोड़ना पड़ा। इससे पूरे देश में हलचल मच गई। इससे पहले भी महीने की शुरुआत में सर्वाेच्च न्यायलय ने सत्ता-विरोधी मूव फाॅरवर्ड पार्टी जो पिछले साल के चुनाव में विजयी रही थी, उसको भी भंग कर दिया। इस पार्टी ने शाही अपमान कानून में संशोधन के लिए अभियान चलाया था, जिसके बारे में अदालत ने कहा था कि इससे संवैधानिक राजतंत्र को कमजोर करने का खतरा है। गौरतलब है कि थाईलैंड में, थाई आपराधिक संहिता की धारा 112 के अनुसार राजद्रोह एक अपराध है। थाईलैंड के सम्राट (राजा, रानी, उत्तराधिकारी, संभावित उत्तराधिकारी या रीजेंट) को बदनाम करना, अपमान करना या धमकी देना गैरकानूनी है। आधुनिक थाई लेज-मैजेस्टी कानून 1908 से ही कानून की किताबों में है। सर्वाेच्च न्यायलय के ताबड़तोड़ आदेशों ने थाईलैंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

सर्वाेच्च न्यायलय के अनुसार श्रेथा ने जेल की सजा काट चुके एक वकील को कैबिनेट में नियुक्त करके नैतिकता के नियमों का उल्लंघन किया था। दरअसल पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री श्रेथा द्वारा अप्रैल में कैबिनेट फेरबदल में पिचिट चुएनबान को प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। पिचिट को 2008 में अदालत की अवमानना के मामले में तब छह महीने की जेल हुई थी। उन्होंने कथित तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा से जुड़े एक मामले में न्यायाधीश को रिश्वत देने की कोशिश की थी। इस घटना पर जब विवाद शुरू हुआ तो नियुक्ति के कुछ सप्ताह बाद पिचिट ने पद से इस्तीफा दे दिया। अदालत ने फैसला सुनाया कि प्रधानमंत्री के रूप में श्रेथा के पास अपने कैबिनेट सहकर्मियों की योग्यता की पड़ताल करने की जिम्मेदारी थी। पिचिट के अतीत के बारे में श्रेथा जानते थे, उसके बावजूद उन्होंने उन्हें कैबिनेट मंत्री के तौर पर नियुक्त किया और इस तरह उन्होंने नैतिकता का उल्लंघन किया है। अदालत के इस फैसले के बाद पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री श्रेष्ठा थाविसिन ने कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्यों को अच्छे से निभाया है और अब वे कोर्ट के आदेशों का पालन करेंगे। ‘अलजजीरा’ की एक रिपोर्ट अनुसार देश की नई प्रधानमंत्री ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रेष्ठा थाविसिन की नीतियों को जारी रखा जाएगा। जिनमें प्रमुख रूप से आर्थिक प्रोत्साहन और सुधार, अवैध दवाओं से निपटना, देश की सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में सुधार और लिंग विविधता को बढ़ावा देने वाली नीतियां शामिल होंगी।

अदालत द्वारा श्रेथा को प्रधानमंत्री पद से हटाने के आदेश देने के बाद संसद को इस पद पर नियुक्ति के लिए कोई समय सीमा नहीं दी गई थी। अदालत के फैसले के दो दिन बाद ही संसद ने पाएटोंगटार्न को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना। इस पद को पाने के लिए उन्हें 493 सांसदों में से 247 सांसदों की मंजूरी चाहिए थी जो उन्हें मिल गई। 16 अगस्त को प्रतिनिधि सभा में हुए मतदान में पैतोंगटार्न ने लगभग दो-तिहाई मतों से जीत हासिल की। संसद में उनके पक्ष में 310 वोट पड़े, जबकि 145 सदस्यों ने उनके खिलाफ वोट दिया।
गौरतलब है कि पाएटोंगटार्न एक बड़े राजनीतिक परिवार से आती हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री थकसिन शिनावात्रा की पुत्री और थाईलैंड की पहली महिला प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा की भतीजी हैं। एक समय था जब उनके पिता थाकसिन शिनावात्रा को राजनीति में हराना मुश्किल माना जाता था। साल 2001 के दौरान शिनावात्रा सत्ता में आए। देश के उत्तर और उत्तर-पूर्वी हिस्से के ग्रामीण क्षेत्रों में वे बेहद लोकप्रिय हुए। हालांकि सत्ता में रहने के दौरान उनपर भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप चलते सेना उन्हें नापसंद करने लगी। आलम यह रहा कि साल 2006 में उन्हें तख्तापलट का दंश झेलना पड़ा। बावजूद इसके अब भी वो थाई राजनीति में प्रभावशाली बने हुए हैं। अपने पिता को किसी सरकारी पद पर नियुक्त करने के संदर्भ में प्रधानमंत्री पाएटोंगटार्न ने कहा कि ‘‘अपने पिता थाकसिन को किसी सरकारी पद पर नियुक्त करने की उनकी कोई योजना नहीं है, लेकिन वह उनसे सलाह लेंगी’’ गौरतलब है कि शिनावात्रा की तीन संतानों में पाएटोंगटार्न सबसे छोटी हैं और उन्हें राजनीतिक जीवन का अनुभव न के बराबर है। लेकिन वो देश का नेतृत्व करने वाली इस परिवार की चैथी सदस्य हैं। थकसिन चिनावाट के बहनोई सोमचाई वोंगसावत 2008 में कुछ समय के लिए प्रधानमंत्री थे। इसके बाद उनकी बहन यिंगलक चिनावाट 2011 से 2014 तक थाईलैंड की प्रधानमंत्री थीं। सोमचाई और यिंगलक दोनों को अदालत के फैसलों के कारण पद से हटा दिया गया था। यिंगलक के बाद पाएटोंगटार्न थाईलैंड का नेतृत्व करने वाली दूसरी महिला प्रधानमंत्री हैं। पाएटोंगटार्न को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और गठबंधन सहयोगियों का मजबूत समर्थन प्राप्त है।

 

थाईलैंड में सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं ने हटाए गए प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन की पुत्री 37 वर्षीय पैतांगटार्न शिनावात्रा को ही अपना नया नेता चुन लिया

विरासत में मिली डगमगाती अर्थव्यवस्था

पाएटोंगटार्न के पास राजनीतिक अनुभव न के बराबर है। पाएटोंगटार्न बैंकाॅक की चाललाॅन्गकोर्न विश्वविद्यालय की छात्रा रही हैं। ग्रजुएशन के बाद उन्होंने इंग्लैंड के गिल्डफोर्ड में सरे यूनिवर्सिटी से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की। इसके बाद व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए वो थाईलैंड वापस आ गई। यहां फू थाई पार्टी में उन्हें मुख्य सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया था। पिछले साल के चुनाव में पार्टी के प्रधानमंत्री पद के तीन उम्मीदवारों में से वो एक थीं। ‘फू थाई’ पार्टी के चुनावी अभियान में वो मुख्य चेहरा थीं। दरअसल यह पार्टी उन लोगों के बीच अपना समर्थन बढ़ाने में जुटी थी जो लोग उनके पिता के वफादार हैं। 14 अगस्त को सर्वाेच्च न्यायलय ने जब श्रेथा थाविसिन को नैतिकता के उल्लंघन के लिए पद छोड़ने का आदेश दिया तब पार्टी के पास उनके विकल्प की कमी थी। इस कारण दो दिन बाद पाएटोंगटार्न को देश का प्रट्टाानमंत्री चुन लिया गया है। राजनीतिक अस्थरिता और संकट ग्रस्त अर्थव्यवस्था के बीच उन्होंने देश की कमान संभाली हैं, जो कि उनके लिए एक बड़ी चुनौती है। थाईलैंड की दूसरी महिला प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न को एक ऐसा देश विरासत में मिला है जो आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहा है और जहां उनकी पार्टी के प्रति समर्थन घट रहा है। संकट में पड़ी अर्थव्यवस्था थाई मतदाताओं के लिए वास्तविक चिंता का विषय बना हुआ है। पिछले दस सालों में से नौ साल तक सेना और अर्द्धसेना शासन के अधीन रहे हैं। कर्ज में डूबे थाईलैंड की अर्थव्यवस्था अच्छी न चल पाने की वजह से लगातार यह अपने पडोसी मुल्कों से पिछड़ रहा है।

भारत और थाईलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंध होंगे दृढ़

थाईलैंड की नई प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा को प्रधानमंत्री चुने जाने पर देश-विदेश से शुभकामनाएं दी गई हैं। इनमें भारत भी शामिल हैं। पैतोंगटार्न ने 19 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद देते हुए सोशल मीडिया एक्स में एक पोस्ट के माध्यम से कहा ‘मैं हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने की आशा करती हूं, विशेष रूप से व्यापार, निवेश, संस्कृति, लोगों के बीच संपर्क, पर्यटन और खास तौर पर दोनों देशों के बीच हवाई यात्रा को बढ़ाने के लिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उन्हें बधाई दिए जाने के जवाब में आगे लिखा कि मुझे विश्वास है कि हम अपने मौजूदा संबंधों को और मजबूत कर सकते हैं तथा दोनों देशों, लोगों और अन्य लोगों के लिए और भी अधिक अवसर पैदा करने के लिए अप्रयुक्त क्षमताओं का पता लगा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे एक दिन पहले एक्स पर एक पोस्ट में पैतोंगटार्न शिनावात्रा को थाईलैंड के प्रधानमंत्री के तौर पर चुने जाने के लिए बधाई दी थी। उन्होंने कहा कि भारत और थाईलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए आपके साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं, जो सभ्यता, संस्कृति और लोगों के बीच जुड़ाव की मजबूत नींव पर आट्टाारित हैं। इससे संभावना जताई जा रही है कि भारत और थाईलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंध आगे चलकर और दृढ़ होंगे।

You may also like

MERA DDDD DDD DD