दो नगर पालिकाओं टिहरी और चम्बा, दो विकास खण्ड जाखणीधार विकास खण्ड तथा थौलधार विकास खंड के कुछ हिस्से की लगभग डेढ़ लाख की आबादी और 84 हजार मतदाताओं वाली टिहरी विधानसभा अविभाजित उत्तर प्रदेश से ही अस्तित्व में रही है। इस विधानसभा से कांग्रेस के त्रेपन सिंह नेगी और भाकपा के गोबिंद सिंह नेगी ऐसे नेता रहे हैं जो लगातार तीन-तीन बार चुनाव जीते हैं। राज्य बनने के बाद वर्तमान विधायक किशोर उपाध्याय लगातार नहीं मगर तीन बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के किशोर उपाध्याय 15,640 मत पाकर पहली बार विधायक बने थे। 2007 में भी किशोर उपाध्याय ने यहां से जीत हासिल की। 2012 में निर्दलीय दिनेश धनै ने किशोर उपाध्याय को महज 377 मतों से पराजित किया। 2017 में भाजपा के धन सिंह नेगी ने निर्दलीय उम्मीदवार दिनेश धनै को 6840 मतों के अंतर से चुनाव में पराजित किया। कांग्रेस के नरेंद्र चंद रमोला को केवल 4466 ही मत हासिल हो पाए थे।
2022 में राज्य में बड़ा राजनीतिक धटनाक्रम देखने को मिला। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और दिहरी के लगातार दो बार विधायक रहे किशोर उपाध्याय कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हंे चुनाव में उतारा। उपाध्याय को 19,802 वोट मिले जबकि उत्तराखण्ड जन एकता पार्टी के दिनेश धनै को 18,851 मत मिले। कांग्रेस प्रत्याशी धन सिंह नेगी 6,385 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। एक तरह से देखें तो टिहरी सीट पर भाजपा और कांग्रेस का बराबर जनाधार रहा है और दोनों ही दलों ने बारी-बारी से जीत हासिल की है।
इस विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों और जनता की मांगों और मुद्दों पर नजर डालें तो यहां कई विरोधाभास देखने को मिलते हैं। टिहरी और चम्बा नगर पालिका क्षेत्र हैं तो वहीं थौलधार और जाखणीधार विकास खंड ग्रामीण क्षेत्र हैं। एक ओर भव्य नया टिहरी नगर एक खूबसूरत पर्यटन नगरी है तो दूसरी तरफ सूदर पूर्वी क्षेत्र का जाखणीधार विकासखंड के ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य की नाकामी नजर आती है।
टिहरी विधानसभा के लिए आम जनमानस में एक बात कही जाती है कि इस क्षेत्र के भाग्य में पलायन और विस्थापन ही लिखा हुआ है। स्वतंत्रता से पूर्व टिहरी महाराजा नरेंद्र शाह ने जब अपनी राजधानी के लिए नरेंद्रनगर बसाया तो पुराने टिहरी नगर से एक बड़ी आबादी को भी नरेंद्र नगर में विस्थापित होने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद टिहरी बांध का निर्माण हुआ तो करीब 70 हजार की आबादी को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा और वे अपने मूल गांवों और नगरों से प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में विस्थापित हुए।
कई बड़े-बड़े सरकारी संस्थानों का भी पलायन टिहरी विधानसभा क्षेत्र से हो चुका है जिनमें कृषि औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय पौड़ी के भरसार में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी तरह से गढ़वाल विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया गया तो टिहरी के बादशाही थौल स्थित स्वामी रामतीर्थ महाविद्यालय को भी गढ़वाल विश्वविद्यालय का कैम्पस बना दिया गया जबकि इस क्षेत्र के लिए यह महाविद्यालय एक वरदान से कम नहीं था। पूर्व में इसे विश्वविद्यालय के तौर पर बनाए जाने की मांग होती रही लेकिन इसे गढ़वाल विश्वविद्यालय का कैम्पस बना दिया गया।
यहां के प्रतापनगर और कोटी काॅलोनी तथा छाम क्षेत्र के निवासियों को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए लम्बे सड़क मार्ग से जाना पड़ता है जिसमें कम से कम दो-ढाई घंटा लगना सामान्य बात है। पूर्व विधायक और पर्यटन मंत्री दिनेश धनै द्वारा 2014 में कोटी काॅलोनी से नई टिहरी के लिए रोपवे योजना स्वीकृत कराई गई थी। इसकी डीपीआर इत्यादि के लिए करीब 3 करोड़ खर्च भी किए गए लेकिन 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद जिस स्थान पर रोपवे का निर्माण होना था उस भूमि को टिहरी बांध विस्थापितों को आवंटन कर दिया गया। यह योजना एक बड़ी महत्वपूर्ण योजना थी जिससे स्थानीय निवासियों को दस मिनट में जिला मुख्यालय तक पहुंचने में सुविधा तो होती ही, साथ ही पर्यटन के लिए भी मील का पत्थर साबित होती। परंतु यह रोपवे योजना धरातल पर नहीं उतर पाई।
करीब 25 हजार की आबादी वाले जाखणीधार क्षेत्र में समस्याओं का अम्बार है। गौर करने वाली बात यह है कि विधायक किशोर उपाध्याय का मूल गांव पाली भी इसी विकासखंड क्षेत्र का एक हिस्सा है। बावजूद इसके यह क्षेत्र पेयजल, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम बिंदुओं पर खरा नहीं उतर पाया है। विकास योजनाओं का सही से क्रियान्वयन न होने के कारण क्षेत्र की जनता को कोई राहत पहुंचाने में विधायक विफल रहे हैं।
पेयजल के लिए कोश्यार ताल पम्पिंग योजना 2006 में विधायक किशोर उपाध्याय के कार्यकाल में घोषित हुई थी लेकिन लम्बे अर्से तक निर्माण ठंडे बस्ते में चला गया फिर जब 2023 में इस योजना को
अमलीजामा पहनाया गया तो अनियमितताओं के चलते योजना का लाभ स्थानीय निवासियों को नहीं मिल पाया। पेयजल का वितरण सही तरीके न होने का आरोप स्थानीय निवासी लगा रहे हैं।
स्थानीय निवासी और कुमारधार गांव के प्रधान गजेंद्र सिंह का कहना है कि ‘‘2006 में क्षेत्र के लिए पहली बार कोई पेयजल योजना आई थी लेकिन उसका पूरे क्षेत्र को फायदा नहीं हुआ। 2023 में विधायक किशोर उपाध्याय के प्रयासों से योजना का विस्तार हुआ फिर भी अनेक गांवों में इस योजना से पानी का वितरण सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। योजना में कोई तकनीकी स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है। विभाग द्वारा लाइन मरम्मत के लिए दैनिक वेतन पर कर्मचारी रखे गए हैं जिनको तकनीकी ज्ञान नहीं है, अगर लाइन में कुछ व्यवधान आता है तो तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण कई दिनों तक पानी की समस्या बनी रहती है।’’
जाखणीधार कस्बा समूचे विकासखंड के करीब 30 गांवों का एक मात्र बाजार है जिसके चलते इस बाजार में स्थानीय लोगांे का आवागमन बहुत होता है। साथ ही देवप्रयाग से टिहरी और घनशाली आने जाने के लिए भी यह कस्बा महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस कारण इस बाजार में जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय निवासी टैक्सी स्टेंड की मांग लम्बे समय से कर रहे हैं लेकिन उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता और कारोबारी रामदयाल रतूड़ी कहते हंै कि ‘‘पहले जाखणीधार एक छोटा कस्बा था लेकिन अब दर्जनों दुकानंे व अन्य कारोबारी संस्थान इस क्षेत्र में स्थापित हो गए हंै। इससे आर्थिक स्थिति में भी सुधार तो हुआ है परंतु इसके कारण इस क्षेत्र में आवागमन भी तेजी से बढ़ा है। टैक्सी, बस, जीप आदि का यह मुख्य पड़ाव है लेकिन यहां अभी तक कोई टैक्सी स्टेंड नहीं बन पाया है। इसके कारण मुख्य सड़क जो कि बहुत संकरी है, उसी के दोनों ओर वाहन खड़े होते हैं। इससे बाजार में जाम लगता है जिस कारण से सभी को परेशानी होती है।’’
एक ओर केंद्र और प्रदेश सरकार स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जाखणीधार में स्वच्छता अभियान दूर-दूर तक नजर नहीं आता है। हैरत की बात है कि हजारों की आबादी का मुख्य बाजार होने के बावजूद इस बाजार में शौचालय की सुविधा तक नहीं है। वर्षों पूर्व जिला पंचायत टिहरी के द्वारा एक मूत्रालय की सुविधा दी गई थी लेकिन आज उसकी हालत जर्जर है और उसका उपयोग नहीं हो रहा है।
स्थानीय निवासी रणवीर सिंह पंवार कहते हैं कि ‘‘जाखणीधार बड़ा और एकमात्र बाजार है। इस कारण यहां भीड़भाड़ होती है। पुरुष तो कहीं भी अपना काम चला लेते हैं लेकिन सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को ही है। इसलिए इस बाजार के लिए शौचालय की सबसे ज्यादा जरूरत है जो पुराना पेशाब घर बनाया गया था वह टूट चुका है। कम से कम उसी पुराने शौचालय की मरम्मत करवाकर उसे उपयोगी बनाया जा सकता है।’’
राज्य बनने से कई वर्ष पूर्व जाखणीधार जो तब देवप्रयाग विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था, के लिए आईटीआई की घोषणा हुई थी। लेकिन सिस्टम की हीला हवाली के चलते वर्षों तक आईटीआई सिर्फ घोषणाओं में ही रहा। 2014 में तत्कालीन विधायक और पर्यटन मंत्री दिनेश धनै के कार्यकाल में इस क्षेत्र में आईटीआई का भवन का निर्माण हुआ लेकिन इसमें इतने वर्षों के बाद भी मात्र कम्प्यूटर साइंस का ही ट्रेड संचालित हो रहा है जबकि इस क्षेत्र के लोग अन्य ट्रेड जैसे इलेक्ट्रीशियन की सबसे ज्यादा जरूरत बताते हैं।
स्थानीय निवासी विनोद रावत का कहना है कि ‘‘आज हर जगह नए निर्माण कार्य हो रहे हैं। बाजार विकसित हो रहे हैं जिसमें बिजली फिटिंग प्लंबिंग आदि का कार्य होता है लेकिन हमारे क्षेत्र के युवा इस काम को नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनको इसका प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण ज्यादातर बाहरी लोगों से ही काम करवाया जाता है। अगर इस आईटीआई में इलेक्ट्रिशियन का ट्रेड का प्रशिक्षण मिले तो स्थानीय युवा स्वरोजगार करके अपना जीवन-यापन कर सकेंगे और बाहर के लोगों का इस क्षेत्र में कारोबार पर दबाव कम हो जाएगा।’’
टिहरी क्षेत्र के निवासियों के लिए विकास योजनाएं वर्षों से लटक- लटक कर किस तरह से धरातल पर उतरती है इसकी बानगी केंद्रीय विद्यालय से समझी जा सकती है। 1986 में नए टिहरी नगर में टिहरी बांध विस्थापितों और अधिकारियों, कर्मचारियों के बच्चों के लिए भारत सरकार द्वारा केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की गई थी। परंतु विद्यालय के लिए भवन का निर्माण नहीं हो पाया और यह केंद्रीय विद्यालय दो हिस्सों में टीन शेड पर 38 वर्षों से संचालित किया जाता रहा। एक भाग में कक्षा एक से हाईस्कूल तक और दूसरे भाग में 11वीं से 12वीं तक की शिक्षा दी जाती रही। केंद्रीय विद्यालय के मानकों पर भी यह विद्यालय कभी भी खरा नहीं उतरा। खेल मैदान, लैब, स्टाफ कक्ष, प्रधानाचार्य आवास, शिक्षक आवास जैसी सुविधा तक नहीं जुटाई जा सकी। बस नाम के लिए ही केंद्रीय विद्यालय संचालित होता रहा। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आलम यह है कि राज्य बनने के बाद भी इस केंद्रीय विद्यालय की सुध किसी ने नहीं ली और वर्षों से यह नाम के लिए केंद्रीय विद्यालय बना रहा।
वर्ष 2010 में तत्कालीन विधायक किशोर उपाध्याय के प्रयासों के बाद टिहरी नगर के एच ब्लाक में विद्यालय के भवन के लिए भूमि आंवटित हुई और 10 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए गए। लेकिन इसके बाद भी भवन निर्माण का काम नहीं हो सका। 2022 में विद्यालय के भवन के निर्माण का कार्य आरंभ किया गया और अब 38 वर्ष बाद करीब 40 करोड़ की लागत से केंद्रीय विद्यालय का नया भवन बनकर तैयार हुआ है जिसमें 2026 में नए सत्र से शिक्षण कार्य आरम्भ किया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो ऐसा नहीं है कि मानकों के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं नहीं हों लेकिन समूचे टिहरी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात धरातल पर खराब ही हंै। टिहरी विधानसभा से लगती हुई घनशाली में तो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अनशन और धरना प्रदर्शन तक लम्बे समय तक चलता रहा है। जाखणीधार विकासखंड स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से त्रस्त है। यहां चार एलोपैथिक स्वास्थ केंद्र है लेकिन सभी में डाॅक्टरों की तैनाती तक नहीं हो पाई है। फार्मासिस्टों के सहारे ही जनता को स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही है।
इस क्षेत्र में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नंदगांव में है। 15 से 20 मरीजों की प्रतिदिन ओपीडी वाला यह केंद्र इस क्षेत्र के लिए एकमात्र सहारा है परंतु अनेक गांव दूर हैं। 18 से 20 किलोमीटर इस पीएससी में डाॅक्टर और स्टाफ तो पूरे हैं लेकिन पार्किंग एक बड़ी समस्या है। यह आपातकाल 108 सेवा का भी केंद्र है लेकिन इसमें एम्बुलेंस और अन्य वाहनों के पार्क होने की बड़ी समस्या बनी रहती है। साथ ही स्ट्रीट लाइट न होने से भी स्टाफ और आपातकाल मरीजों को असुविधा होती है। इसके अलावा कर्मचारी आवास भी पुराने होने के कारण जीर्ण अवस्था में आ चुके हैं।
नई टिहरी के जिला अस्पताल के हालात भी कुछ इसी तरह से बने हुए हैं। कई वर्षों तक यह अस्पताल पीपीपी मोड में दिया गया था जिससे स्थानीय लोगों को कोई खास लाभ नहीं मिल पा रहा था। एक तरह से जिला अस्पताल रेफर सेंटर के तौर पर ही संचालित होता रहा। भारी जन विरोध के बाद पीपीपी मोड रद्द करके स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब इसे संचालित किया जा रहा है। इस जिला अस्पताल में कई आधुनिक जांच मशीनों की कमी लम्बे समय से बनी हुई है। अल्ट्रासाउंड की सुविधा और उपकरण तो हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति तक नहीं हो पाई है। अस्पताल प्रशासन द्वारा बाहर से अस्थायी तौर पर रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था करके किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। इतना जरूर है कि चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की यहां कमी नहीं है।
नया टिहरी नगर जिला मुख्यालय है लेकिन यहां वाहनों की पार्किंग की सुविधा न के बराबर है। रोडवेज बस अड्डा के निर्माण की घोषणा 2014 में की गई लेकिन आज तक बस अड्डा नहीं बन पाया है। इसका बड़ा असर नई टिहरी के होटल कारोबार पर पड़ रहा है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और होटल कारोबारी याकूब सिद्की कहते हैं कि ‘‘टिहरी नगर पर्यटन नगर के तौर पर विकसित हो रहा। टिहरी झील के कारण कोटी काॅलोनी वाटर स्पोर्टस और टूरिज्म का हब बन चुका है जिस कारण टिहरी नगर में पर्यटकांे की आमद तेजी से बढ़ी है लेकिन वाहनांे की पार्किंग न होने से होटल कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है। बौराड़ी क्षेत्र में सबसे ज्यादा होटल आदि हैं लेकिन वाहनों की पार्किंग न होने से समस्या बनी हुई है। स्वयं सरकार के जीएमवीएन गेस्ट हाउस के पास पार्किंग नहीं है। जिससे गेस्ट हाउस में ठहरने वाले अतिथियों के वाहन सड़कों पर ही पार्क किए जाते हैं।’’
पालिका क्षेत्र है। चम्बा नई टिहरी, पुरानी टिहरी कोटी काॅलोनी, प्रतापनगर तथा मसूरी क्षेत्र के लिए एक जंक्शन का काम करता है। इन सभी क्षेत्रों के लिए गुजरने वाले वाहनांे का भारी दबाब चम्बा नगर पर ही पड़ता है। हालांकि चम्बा से उत्तरकाशी मार्ग के लिए एक टनल का निर्माण भी हो चुका है लेकिन वह सिर्फ उत्तरकाशी मार्ग के वाहनों के लिए सुविधाजनक है जबकि शेष मार्गों के आवागमन का चम्बा बाजार ही एक मात्र माध्यम है जिसके चलते समूचे क्षेत्र में वाहनों का भारी जाम लगना एक सामान्य-सी बात हो चुकी है। नगर क्षेत्र में एक दो छोटी पार्किंग और टिहरी रोड़ में बड़ी पार्किंग तो जरूर है लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान ही है।
स्थानीय निवासी और कारोबारी रोशनलाल डबराल का कहना है कि ‘‘चम्बा नगर इस क्षेत्र का सबसे पुराना और बड़ा बाजार है। नया टिहरी नगर जिला मुख्यालय होने के बावजूद व्यापारिक केंद्र नहीं बन पाया है जबकि चम्बा नगर वर्षों से इस समूचे क्षेत्र का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र रहा है। चार प्रमुख क्षेत्रों के लिए इस नगर से वाहन गुजरते हैं जिस कारण जाम की स्थिति बनी रहती है और कारोबार पर बुरा असर पड़ता है। चम्बा नगर में बड़ी पार्किंग की सबसे ज्यादा जरूरत है। अगर पार्किंग की सुविधा हो जाए तो नगर में जाम की स्थिति से राहत मिल जाएगी।’’
गौरतलब है कि चम्बा नगर और इसके आस-पास के क्षेत्रों में विगत कुछ वर्षों से पर्यटन गतिविधियां तेजी से उभरी है। जिसके कारण अनेक छोटे बड़े होटल, रिसोर्ट और रेस्टोरेंटों का निर्माण हो चुका है और कई निर्माणाधीन हैं लेकिन ज्यादातर में वाहनांे की पार्किंग मुख्य सड़कों पर ही की जाती है जिसके चलते सड़कों पर जाम की स्थिति पैदा होती रहती है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि ज्यादातर निर्माण अनियोजित तरीके बनाए जा रहे हैं जबकि इस क्षेत्र को एक व्यवस्थित तरीके से पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करने की जरूरत है।
पर्यटन कारोबार से जुड़े होटल व्यवसायी और स्थानीय निवासी विजय रावत कहते हैं कि ‘‘स्थानीय युवा रोजगार पाने के लिए अपनी भूमि पर होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट बनाता है यही उसके लिए रोजगार पाने का एक आसान रास्ता है लेकिन इसके लिए नियोजित विकास की नीति नहीं होने से इस तरह के निर्माण कार्यों की बाढ़ आती दिख रही है। मुख्य सड़क पर होटल आदि होने से समस्या भी आती है। अगर एक घंटे के लिए कोई ग्राहक अपने वाहन को सड़क पर खड़ा कर देता है तो जाम लग जाता है जिससे समस्या होती है। जिस तरह से चम्बा नगर में बसावट तेजी से बढ़ी है उससे स्थानीय निवासियों के वाहनांे की ही पार्किंग पूरी नहीं हो पा रही है तो पर्यटकों के लिए कहां से पूरी हो पाएगी?’’
रोजगार के साधन इस क्षेत्र में नाम मात्र के ही है। पर्यटन क्षेत्र में कई युवा स्वरोजगार के साधन विकसित कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र के लिए एक भी मंडी नहीं बनाई जा सकती है। समूची विधानसभा में कोई भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हुआ है। खेती और बागवानी टिहरी क्षेत्र में सबसे प्रमुख व्यवसाय है। चम्बा मसूरी फल पट्टी क्षेत्र सेब और पहाड़ी फलो के उत्पादन में अग्रणी रहा है लेकिन अब विगड़ते पर्यावरणीय हालातों के चलते फल उत्पादन में भारी कमी आई है। सामन्य खेती और पशुपालन अब सिमट चुका है। ज्यादातर खेती सिफ अपने जीवन यापन के लिए ही हो रही है और अधिकतर किसान खेती से मुंह मोड़ चुके हैं जिसके चलते पालतु पशु खासतौर पर गौ वंशीय पशुओं को किसाओं ने सड़कों पर छोड़ दिया है। हर स्थान पर आवारा बैलों के झुंड के झुंड आम देखे जा सकते हैं। इसके चलते वाहन दुर्घनाएं भी बढ़ रही हैं।
‘‘पार्टी के दृष्टिकोण से देखूं तो टिहरी का विकास हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता होने के नाते तो कह सकता हूं कि टिहरी में जो विकास है वह तो हो ही रहा है। बाकी जनता क्या सोचती है? क्या मानती है? यह तो जनता के ऊपर है और इसका फैसला भी वही जनता कर सकती है। मैं 2012 से 2017 तक निर्दलीय विधायक रहा हूं, सरकार में कैबिनेट मंत्री रहा हूं। मैंने अपने क्षेत्र में कई काम करवाए, कई योजनाएं स्वीकृत करवाई, उन पर काम किया लेकिन मैं इसमें कितना पास हुआ हूं यह तो मैं नहीं बता सकता, जनता और मतदाता ही इसका निर्णय करेंगे। 2017 के बाद नई सरकार और नए विधायक ने कई योजनाएं खत्म करवा दी। मैं अपने कार्यकाल में दो रोपवे योजना टिहरी के लिए लाया था जिसमें एक सुरकंडा रोपवे थी जो बन गई दूसरी कोटी काॅलेनी से नई टिहरी के लिए भी रोपवे योजना लाया और उसे स्वीकृत भी करवाया। तीन करोड़ रुपया सर्वेक्षण में भी खर्च हो गए लेकिन जहां रोपवे का हैड और पार्किंग बननी थी उस जगह को टिहरी डैम विस्थापितों को आवंटन कर दिया गया इससे रोपवे योजना खत्म हो गई। अब मुझे तो नहीं लगता कि नई टिहरी के लिए रोपवे योजना आएगी। देखिए योजनाएं कोई अपने लिए नहीं लाता, जनता के लिए लाते हैं। विधायक हो या सांसद हर कोई जनता के लिए काम करता है, जनता की सुविधाओं और विकास के लिए योजनाएं लाता है। इसमें मैं हूं, पहले वाले विधायक रहे हो या मौजूदा विधायक किशोर जी हों। सभी जनता के लिए ही काम करते हैं लेकिन इसके लिए विजन क्या हो, यह एक बात होती है। मौजूदा विधायक जी के चार साल पूरे होने वाले हैं। इन चार सालों में वे अपनी प्राथमिकता तक नहीं बता पाए। चार सालों में कौन-सी योजना है जो ये लेकर आए? और उस पर काम हुआ हो? जो भी योजनाएं हैं वह पहले की हैं। ये तो उन योजनाओं को अपनी बताते हैं, जो मेरे कार्यकाल में आई हैं। सिर्फ इनकी इतनी कृपा है और हम इनका धन्यवाद देना चाहते हैं कि जो हम विस्थापित हैं और जो हमको प्लॉट आवंटित हुए हैं ये यह नहीं कहते कि मैंने इतने हजार प्लाॅट विस्थापितों को दिए हैं। मैंने संगीत महाविद्यालय स्वीकृत कराया उस पर काम नहीं हुआ। रोडवेज बस अड्डा स्वीकृत करवाया वह भी रूका हुआ है। एक तो ऐसा काम हो जो पूरा हुआ हो इन चार सालों में हमारे विधायक जी चार सालों तक ऐसा कोई काम नहीं करवा पाए। जो हम कह सकें कि भाई हमारे विधायक किशोर उपाध्याय जी ने अपने कार्यकाल में यह काम करवाया है लेकिन वे हर काम को कहते हैं कि मैंने करवाया है, मैं इसे लेकर आया, मैं उसे लेकर आया।
आप तीन बार से विधायक हैं। तीसरे कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने वाले हैं। इन चार वर्षों में आपने अपने क्षेत्र में क्या-क्या विकास कार्य करवाए हैं। कोई पांच योजनाएं बताइए?
मैं टिहरी की महान जनता का बहुत आभारी हूं जिन्होंने मुझे तीसरी बार विधानसभा भेजा। जनता ने मुझ पर भरोसा किया तो मैं भी जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास कर रहा हूं। टिहरी का विकास ही मेरे जीवन का ध्येय है। इसके लिए मैंने कभी कोई समझौता नहीं किया है। मेरे तीसरे कार्यकाल के लगभग चार वर्ष हो रहे हैं। इन वर्षों में हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने विधायकों से दस मुख्य काम कहे थे तो उनमें से नर्सिंग कॉलेज बनाया गया जिसे हमने अब पीजी कॉलेज बना दिया है। टिहरी झील के चारों ओर हम एक एआई सेंटर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्यपाल जी ने माननीय प्रधानमंत्री जी के सामने यह बात रखी है। अब जमाना इंजीनियरिंग का है, चाहे आर्टिफिशियल इंजीनियरिंग का हो या अन्य कोई हो। इसीलिए हमने टिहरी हाईड्रो इंजीनियरंग काॅलेज को आईआईटी रूड़की का हिल कैम्पस बनाया है। इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रस्ताव भी भेज दिया है और प्रस्ताव को सहमती भी मिल चुकी है। जल्द ही टिहरी में आपको आईआईटी के छात्र पढ़ाई करते मिलेंगे। हमने इस कैम्पस में टिहरी बांध विस्थापितों और टीएचडीसी के अधिकारियों कर्मचारियों के बच्चों को रिजर्वेशन भी दिलवाया है। तीसरा केंद्रीय विद्यालय भवन अब तैयार हो चुका है। इस सत्र से नए भवन में पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
टिहरी क्षेत्र में सड़कों के निर्माण के लिए हमने बहुत काम करवाए हैं। बीते सालांे में जो भी गांव सड़कों से छूटे हुए हैं उन सभी को सड़कों से जोड़ दिया गया है। 200 किमी सड़कों काम काम हो चुका है। चिन्यालीसौड़ के लिए टनल योजना भी स्वीकृत हो चुकी है। मैंने चंद्र बदनी से कैथेली और जखंड के लिए एक टनल का निर्माण का सुझाव भी दिया है। इस टनल से नई टिहरी के लिए आवागमन और भी सुविधाजनक हो जाएगा।
मेरे क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा काम मेडिकल काॅलेज का निर्माण है। भगीरथी पुरम में टिहरी का मेडिकल काॅलेज स्वीकृत हो चुका है और भूमि का चयन भी हो चुका है। लोग भ्रांतियां फैलाते हैं कि हर जिले में एक मेडिकल काॅलेज बन रहा है, कहां बन रहा है? अगर यह बात है तो अब तक तो प्रदेश के 13 जिलों में 13 मेडिकल काॅलेज बन जाने चाहिए थे। मेडिकल काॅलेज की 850 करोड़ की डीपीआर बन चुकी है। बजट की कमी नहीं रहेगी। हमारी सरकार हर प्रकार से व्यवस्था करेगी।
इसके अलावा कई बड़ी योजनाओं पर काम होने वाला है। नई टिहरी के लिए लगभग 140 करोड़ की पेयजल योजना, चम्बा क्षेत्र के लिए भी करीब-करीब 140 करोड़ की पीने के पानी की योजना, काणाताल धनौल्टी के लिए भी पेयजल योजना प्रस्तावित है। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय का नया और विशाल भवन बन कर तैयार हो चुका है। मेरा प्रयास है कि अगर शहीद श्रीदेव सुमन जी के गांव के आस-पास हमें जमीन मिलती है तो इस क्षेत्र में हम उच्च शिक्षा, एआई और इंजीनियरिंग का हब तैयार करेंगे।
कोटी काॅलोनी से नई टिहरी के लिए रोपवे योजना 2014 में प्रस्तावित की गई थी। पूर्व विधायक बताते हैं कि इसमें करीब तीन करोड़ रुपया सर्वे इत्यादि में खर्च किया गया था लेकिन 2017 में रोपवे वाली भूमि बांध विस्थापितों को आवंटित कर दी गई जिससे रोपवे योजना रोक दी गई। इतनी महत्वपूर्ण योजना से आपका क्षेत्र महरूम क्यों हो गया?
2022 में राज्य में बड़ा राजनीतिक धटनाक्रम देखने को मिला। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और दिहरी के लगातार दो बार विधायक रहे किशोर उपाध्याय कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हंे चुनाव में उतारा। उपाध्याय को 19,802 वोट मिले जबकि उत्तराखण्ड जन एकता पार्टी के दिनेश धनै को 18,851 मत मिले। कांग्रेस प्रत्याशी धन सिंह नेगी 6,385 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। एक तरह से देखें तो टिहरी सीट पर भाजपा और कांग्रेस का बराबर जनाधार रहा है और दोनों ही दलों ने बारी-बारी से जीत हासिल की है।
इस विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों और जनता की मांगों और मुद्दों पर नजर डालें तो यहां कई विरोधाभास देखने को मिलते हैं। टिहरी और चम्बा नगर पालिका क्षेत्र हैं तो वहीं थौलधार और जाखणीधार विकास खंड ग्रामीण क्षेत्र हैं। एक ओर भव्य नया टिहरी नगर एक खूबसूरत पर्यटन नगरी है तो दूसरी तरफ सूदर पूर्वी क्षेत्र का जाखणीधार विकासखंड के ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य की नाकामी नजर आती है।
पलायन और विस्थापन टिहरी की नियति
टिहरी विधानसभा के लिए आम जनमानस में एक बात कही जाती है कि इस क्षेत्र के भाग्य में पलायन और विस्थापन ही लिखा हुआ है। स्वतंत्रता से पूर्व टिहरी महाराजा नरेंद्र शाह ने जब अपनी राजधानी के लिए नरेंद्रनगर बसाया तो पुराने टिहरी नगर से एक बड़ी आबादी को भी नरेंद्र नगर में विस्थापित होने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद टिहरी बांध का निर्माण हुआ तो करीब 70 हजार की आबादी को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा और वे अपने मूल गांवों और नगरों से प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में विस्थापित हुए।
कई बड़े-बड़े सरकारी संस्थानों का भी पलायन टिहरी विधानसभा क्षेत्र से हो चुका है जिनमें कृषि औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय पौड़ी के भरसार में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी तरह से गढ़वाल विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया गया तो टिहरी के बादशाही थौल स्थित स्वामी रामतीर्थ महाविद्यालय को भी गढ़वाल विश्वविद्यालय का कैम्पस बना दिया गया जबकि इस क्षेत्र के लिए यह महाविद्यालय एक वरदान से कम नहीं था। पूर्व में इसे विश्वविद्यालय के तौर पर बनाए जाने की मांग होती रही लेकिन इसे गढ़वाल विश्वविद्यालय का कैम्पस बना दिया गया।
यहां के प्रतापनगर और कोटी काॅलोनी तथा छाम क्षेत्र के निवासियों को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए लम्बे सड़क मार्ग से जाना पड़ता है जिसमें कम से कम दो-ढाई घंटा लगना सामान्य बात है। पूर्व विधायक और पर्यटन मंत्री दिनेश धनै द्वारा 2014 में कोटी काॅलोनी से नई टिहरी के लिए रोपवे योजना स्वीकृत कराई गई थी। इसकी डीपीआर इत्यादि के लिए करीब 3 करोड़ खर्च भी किए गए लेकिन 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद जिस स्थान पर रोपवे का निर्माण होना था उस भूमि को टिहरी बांध विस्थापितों को आवंटन कर दिया गया। यह योजना एक बड़ी महत्वपूर्ण योजना थी जिससे स्थानीय निवासियों को दस मिनट में जिला मुख्यालय तक पहुंचने में सुविधा तो होती ही, साथ ही पर्यटन के लिए भी मील का पत्थर साबित होती। परंतु यह रोपवे योजना धरातल पर नहीं उतर पाई।
समस्याओं के अम्बार से त्रस्त जाखणीधार
करीब 25 हजार की आबादी वाले जाखणीधार क्षेत्र में समस्याओं का अम्बार है। गौर करने वाली बात यह है कि विधायक किशोर उपाध्याय का मूल गांव पाली भी इसी विकासखंड क्षेत्र का एक हिस्सा है। बावजूद इसके यह क्षेत्र पेयजल, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम बिंदुओं पर खरा नहीं उतर पाया है। विकास योजनाओं का सही से क्रियान्वयन न होने के कारण क्षेत्र की जनता को कोई राहत पहुंचाने में विधायक विफल रहे हैं।
पेयजल के लिए कोश्यार ताल पम्पिंग योजना 2006 में विधायक किशोर उपाध्याय के कार्यकाल में घोषित हुई थी लेकिन लम्बे अर्से तक निर्माण ठंडे बस्ते में चला गया फिर जब 2023 में इस योजना को
अमलीजामा पहनाया गया तो अनियमितताओं के चलते योजना का लाभ स्थानीय निवासियों को नहीं मिल पाया। पेयजल का वितरण सही तरीके न होने का आरोप स्थानीय निवासी लगा रहे हैं।
स्थानीय निवासी और कुमारधार गांव के प्रधान गजेंद्र सिंह का कहना है कि ‘‘2006 में क्षेत्र के लिए पहली बार कोई पेयजल योजना आई थी लेकिन उसका पूरे क्षेत्र को फायदा नहीं हुआ। 2023 में विधायक किशोर उपाध्याय के प्रयासों से योजना का विस्तार हुआ फिर भी अनेक गांवों में इस योजना से पानी का वितरण सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। योजना में कोई तकनीकी स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है। विभाग द्वारा लाइन मरम्मत के लिए दैनिक वेतन पर कर्मचारी रखे गए हैं जिनको तकनीकी ज्ञान नहीं है, अगर लाइन में कुछ व्यवधान आता है तो तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण कई दिनों तक पानी की समस्या बनी रहती है।’’
जाखणीधार कस्बा समूचे विकासखंड के करीब 30 गांवों का एक मात्र बाजार है जिसके चलते इस बाजार में स्थानीय लोगांे का आवागमन बहुत होता है। साथ ही देवप्रयाग से टिहरी और घनशाली आने जाने के लिए भी यह कस्बा महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस कारण इस बाजार में जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय निवासी टैक्सी स्टेंड की मांग लम्बे समय से कर रहे हैं लेकिन उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता और कारोबारी रामदयाल रतूड़ी कहते हंै कि ‘‘पहले जाखणीधार एक छोटा कस्बा था लेकिन अब दर्जनों दुकानंे व अन्य कारोबारी संस्थान इस क्षेत्र में स्थापित हो गए हंै। इससे आर्थिक स्थिति में भी सुधार तो हुआ है परंतु इसके कारण इस क्षेत्र में आवागमन भी तेजी से बढ़ा है। टैक्सी, बस, जीप आदि का यह मुख्य पड़ाव है लेकिन यहां अभी तक कोई टैक्सी स्टेंड नहीं बन पाया है। इसके कारण मुख्य सड़क जो कि बहुत संकरी है, उसी के दोनों ओर वाहन खड़े होते हैं। इससे बाजार में जाम लगता है जिस कारण से सभी को परेशानी होती है।’’
स्वच्छता अभियान को भी पलीता
एक ओर केंद्र और प्रदेश सरकार स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जाखणीधार में स्वच्छता अभियान दूर-दूर तक नजर नहीं आता है। हैरत की बात है कि हजारों की आबादी का मुख्य बाजार होने के बावजूद इस बाजार में शौचालय की सुविधा तक नहीं है। वर्षों पूर्व जिला पंचायत टिहरी के द्वारा एक मूत्रालय की सुविधा दी गई थी लेकिन आज उसकी हालत जर्जर है और उसका उपयोग नहीं हो रहा है।
स्थानीय निवासी रणवीर सिंह पंवार कहते हैं कि ‘‘जाखणीधार बड़ा और एकमात्र बाजार है। इस कारण यहां भीड़भाड़ होती है। पुरुष तो कहीं भी अपना काम चला लेते हैं लेकिन सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को ही है। इसलिए इस बाजार के लिए शौचालय की सबसे ज्यादा जरूरत है जो पुराना पेशाब घर बनाया गया था वह टूट चुका है। कम से कम उसी पुराने शौचालय की मरम्मत करवाकर उसे उपयोगी बनाया जा सकता है।’’
आईटीआई भी सिर्फ नाम के लिए
राज्य बनने से कई वर्ष पूर्व जाखणीधार जो तब देवप्रयाग विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था, के लिए आईटीआई की घोषणा हुई थी। लेकिन सिस्टम की हीला हवाली के चलते वर्षों तक आईटीआई सिर्फ घोषणाओं में ही रहा। 2014 में तत्कालीन विधायक और पर्यटन मंत्री दिनेश धनै के कार्यकाल में इस क्षेत्र में आईटीआई का भवन का निर्माण हुआ लेकिन इसमें इतने वर्षों के बाद भी मात्र कम्प्यूटर साइंस का ही ट्रेड संचालित हो रहा है जबकि इस क्षेत्र के लोग अन्य ट्रेड जैसे इलेक्ट्रीशियन की सबसे ज्यादा जरूरत बताते हैं।
स्थानीय निवासी विनोद रावत का कहना है कि ‘‘आज हर जगह नए निर्माण कार्य हो रहे हैं। बाजार विकसित हो रहे हैं जिसमें बिजली फिटिंग प्लंबिंग आदि का कार्य होता है लेकिन हमारे क्षेत्र के युवा इस काम को नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनको इसका प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण ज्यादातर बाहरी लोगों से ही काम करवाया जाता है। अगर इस आईटीआई में इलेक्ट्रिशियन का ट्रेड का प्रशिक्षण मिले तो स्थानीय युवा स्वरोजगार करके अपना जीवन-यापन कर सकेंगे और बाहर के लोगों का इस क्षेत्र में कारोबार पर दबाव कम हो जाएगा।’’
केंद्रीय विद्यालय की राम कहानी
टिहरी क्षेत्र के निवासियों के लिए विकास योजनाएं वर्षों से लटक- लटक कर किस तरह से धरातल पर उतरती है इसकी बानगी केंद्रीय विद्यालय से समझी जा सकती है। 1986 में नए टिहरी नगर में टिहरी बांध विस्थापितों और अधिकारियों, कर्मचारियों के बच्चों के लिए भारत सरकार द्वारा केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की गई थी। परंतु विद्यालय के लिए भवन का निर्माण नहीं हो पाया और यह केंद्रीय विद्यालय दो हिस्सों में टीन शेड पर 38 वर्षों से संचालित किया जाता रहा। एक भाग में कक्षा एक से हाईस्कूल तक और दूसरे भाग में 11वीं से 12वीं तक की शिक्षा दी जाती रही। केंद्रीय विद्यालय के मानकों पर भी यह विद्यालय कभी भी खरा नहीं उतरा। खेल मैदान, लैब, स्टाफ कक्ष, प्रधानाचार्य आवास, शिक्षक आवास जैसी सुविधा तक नहीं जुटाई जा सकी। बस नाम के लिए ही केंद्रीय विद्यालय संचालित होता रहा। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आलम यह है कि राज्य बनने के बाद भी इस केंद्रीय विद्यालय की सुध किसी ने नहीं ली और वर्षों से यह नाम के लिए केंद्रीय विद्यालय बना रहा।
वर्ष 2010 में तत्कालीन विधायक किशोर उपाध्याय के प्रयासों के बाद टिहरी नगर के एच ब्लाक में विद्यालय के भवन के लिए भूमि आंवटित हुई और 10 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए गए। लेकिन इसके बाद भी भवन निर्माण का काम नहीं हो सका। 2022 में विद्यालय के भवन के निर्माण का कार्य आरंभ किया गया और अब 38 वर्ष बाद करीब 40 करोड़ की लागत से केंद्रीय विद्यालय का नया भवन बनकर तैयार हुआ है जिसमें 2026 में नए सत्र से शिक्षण कार्य आरम्भ किया जाएगा।
कमजोर स्वास्थ्य सेवाएं
स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो ऐसा नहीं है कि मानकों के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं नहीं हों लेकिन समूचे टिहरी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात धरातल पर खराब ही हंै। टिहरी विधानसभा से लगती हुई घनशाली में तो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अनशन और धरना प्रदर्शन तक लम्बे समय तक चलता रहा है। जाखणीधार विकासखंड स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से त्रस्त है। यहां चार एलोपैथिक स्वास्थ केंद्र है लेकिन सभी में डाॅक्टरों की तैनाती तक नहीं हो पाई है। फार्मासिस्टों के सहारे ही जनता को स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही है।
इस क्षेत्र में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नंदगांव में है। 15 से 20 मरीजों की प्रतिदिन ओपीडी वाला यह केंद्र इस क्षेत्र के लिए एकमात्र सहारा है परंतु अनेक गांव दूर हैं। 18 से 20 किलोमीटर इस पीएससी में डाॅक्टर और स्टाफ तो पूरे हैं लेकिन पार्किंग एक बड़ी समस्या है। यह आपातकाल 108 सेवा का भी केंद्र है लेकिन इसमें एम्बुलेंस और अन्य वाहनों के पार्क होने की बड़ी समस्या बनी रहती है। साथ ही स्ट्रीट लाइट न होने से भी स्टाफ और आपातकाल मरीजों को असुविधा होती है। इसके अलावा कर्मचारी आवास भी पुराने होने के कारण जीर्ण अवस्था में आ चुके हैं।
नई टिहरी के जिला अस्पताल के हालात भी कुछ इसी तरह से बने हुए हैं। कई वर्षों तक यह अस्पताल पीपीपी मोड में दिया गया था जिससे स्थानीय लोगों को कोई खास लाभ नहीं मिल पा रहा था। एक तरह से जिला अस्पताल रेफर सेंटर के तौर पर ही संचालित होता रहा। भारी जन विरोध के बाद पीपीपी मोड रद्द करके स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब इसे संचालित किया जा रहा है। इस जिला अस्पताल में कई आधुनिक जांच मशीनों की कमी लम्बे समय से बनी हुई है। अल्ट्रासाउंड की सुविधा और उपकरण तो हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति तक नहीं हो पाई है। अस्पताल प्रशासन द्वारा बाहर से अस्थायी तौर पर रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था करके किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। इतना जरूर है कि चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की यहां कमी नहीं है।
बदहाल यातायात व्यवस्था
नया टिहरी नगर जिला मुख्यालय है लेकिन यहां वाहनों की पार्किंग की सुविधा न के बराबर है। रोडवेज बस अड्डा के निर्माण की घोषणा 2014 में की गई लेकिन आज तक बस अड्डा नहीं बन पाया है। इसका बड़ा असर नई टिहरी के होटल कारोबार पर पड़ रहा है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और होटल कारोबारी याकूब सिद्की कहते हैं कि ‘‘टिहरी नगर पर्यटन नगर के तौर पर विकसित हो रहा। टिहरी झील के कारण कोटी काॅलोनी वाटर स्पोर्टस और टूरिज्म का हब बन चुका है जिस कारण टिहरी नगर में पर्यटकांे की आमद तेजी से बढ़ी है लेकिन वाहनांे की पार्किंग न होने से होटल कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है। बौराड़ी क्षेत्र में सबसे ज्यादा होटल आदि हैं लेकिन वाहनों की पार्किंग न होने से समस्या बनी हुई है। स्वयं सरकार के जीएमवीएन गेस्ट हाउस के पास पार्किंग नहीं है। जिससे गेस्ट हाउस में ठहरने वाले अतिथियों के वाहन सड़कों पर ही पार्क किए जाते हैं।’’
इसी तरह से चम्बा शहर टिहरी विधानसभा का दूसरा बड़ा नगर
पालिका क्षेत्र है। चम्बा नई टिहरी, पुरानी टिहरी कोटी काॅलोनी, प्रतापनगर तथा मसूरी क्षेत्र के लिए एक जंक्शन का काम करता है। इन सभी क्षेत्रों के लिए गुजरने वाले वाहनांे का भारी दबाब चम्बा नगर पर ही पड़ता है। हालांकि चम्बा से उत्तरकाशी मार्ग के लिए एक टनल का निर्माण भी हो चुका है लेकिन वह सिर्फ उत्तरकाशी मार्ग के वाहनों के लिए सुविधाजनक है जबकि शेष मार्गों के आवागमन का चम्बा बाजार ही एक मात्र माध्यम है जिसके चलते समूचे क्षेत्र में वाहनों का भारी जाम लगना एक सामान्य-सी बात हो चुकी है। नगर क्षेत्र में एक दो छोटी पार्किंग और टिहरी रोड़ में बड़ी पार्किंग तो जरूर है लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान ही है।
स्थानीय निवासी और कारोबारी रोशनलाल डबराल का कहना है कि ‘‘चम्बा नगर इस क्षेत्र का सबसे पुराना और बड़ा बाजार है। नया टिहरी नगर जिला मुख्यालय होने के बावजूद व्यापारिक केंद्र नहीं बन पाया है जबकि चम्बा नगर वर्षों से इस समूचे क्षेत्र का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र रहा है। चार प्रमुख क्षेत्रों के लिए इस नगर से वाहन गुजरते हैं जिस कारण जाम की स्थिति बनी रहती है और कारोबार पर बुरा असर पड़ता है। चम्बा नगर में बड़ी पार्किंग की सबसे ज्यादा जरूरत है। अगर पार्किंग की सुविधा हो जाए तो नगर में जाम की स्थिति से राहत मिल जाएगी।’’
गौरतलब है कि चम्बा नगर और इसके आस-पास के क्षेत्रों में विगत कुछ वर्षों से पर्यटन गतिविधियां तेजी से उभरी है। जिसके कारण अनेक छोटे बड़े होटल, रिसोर्ट और रेस्टोरेंटों का निर्माण हो चुका है और कई निर्माणाधीन हैं लेकिन ज्यादातर में वाहनांे की पार्किंग मुख्य सड़कों पर ही की जाती है जिसके चलते सड़कों पर जाम की स्थिति पैदा होती रहती है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि ज्यादातर निर्माण अनियोजित तरीके बनाए जा रहे हैं जबकि इस क्षेत्र को एक व्यवस्थित तरीके से पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करने की जरूरत है।
पर्यटन कारोबार से जुड़े होटल व्यवसायी और स्थानीय निवासी विजय रावत कहते हैं कि ‘‘स्थानीय युवा रोजगार पाने के लिए अपनी भूमि पर होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट बनाता है यही उसके लिए रोजगार पाने का एक आसान रास्ता है लेकिन इसके लिए नियोजित विकास की नीति नहीं होने से इस तरह के निर्माण कार्यों की बाढ़ आती दिख रही है। मुख्य सड़क पर होटल आदि होने से समस्या भी आती है। अगर एक घंटे के लिए कोई ग्राहक अपने वाहन को सड़क पर खड़ा कर देता है तो जाम लग जाता है जिससे समस्या होती है। जिस तरह से चम्बा नगर में बसावट तेजी से बढ़ी है उससे स्थानीय निवासियों के वाहनांे की ही पार्किंग पूरी नहीं हो पा रही है तो पर्यटकों के लिए कहां से पूरी हो पाएगी?’’
रोजगार के साधन धीरे-धीरे हो रहे खत्म
रोजगार के साधन इस क्षेत्र में नाम मात्र के ही है। पर्यटन क्षेत्र में कई युवा स्वरोजगार के साधन विकसित कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र के लिए एक भी मंडी नहीं बनाई जा सकती है। समूची विधानसभा में कोई भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हुआ है। खेती और बागवानी टिहरी क्षेत्र में सबसे प्रमुख व्यवसाय है। चम्बा मसूरी फल पट्टी क्षेत्र सेब और पहाड़ी फलो के उत्पादन में अग्रणी रहा है लेकिन अब विगड़ते पर्यावरणीय हालातों के चलते फल उत्पादन में भारी कमी आई है। सामन्य खेती और पशुपालन अब सिमट चुका है। ज्यादातर खेती सिफ अपने जीवन यापन के लिए ही हो रही है और अधिकतर किसान खेती से मुंह मोड़ चुके हैं जिसके चलते पालतु पशु खासतौर पर गौ वंशीय पशुओं को किसाओं ने सड़कों पर छोड़ दिया है। हर स्थान पर आवारा बैलों के झुंड के झुंड आम देखे जा सकते हैं। इसके चलते वाहन दुर्घनाएं भी बढ़ रही हैं।
‘हमारे विकास कार्यों का श्रेय लूटते हैं विधायक जी’
दिनेश धनै पूर्व विधायक टिहरी
‘‘पार्टी के दृष्टिकोण से देखूं तो टिहरी का विकास हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता होने के नाते तो कह सकता हूं कि टिहरी में जो विकास है वह तो हो ही रहा है। बाकी जनता क्या सोचती है? क्या मानती है? यह तो जनता के ऊपर है और इसका फैसला भी वही जनता कर सकती है। मैं 2012 से 2017 तक निर्दलीय विधायक रहा हूं, सरकार में कैबिनेट मंत्री रहा हूं। मैंने अपने क्षेत्र में कई काम करवाए, कई योजनाएं स्वीकृत करवाई, उन पर काम किया लेकिन मैं इसमें कितना पास हुआ हूं यह तो मैं नहीं बता सकता, जनता और मतदाता ही इसका निर्णय करेंगे। 2017 के बाद नई सरकार और नए विधायक ने कई योजनाएं खत्म करवा दी। मैं अपने कार्यकाल में दो रोपवे योजना टिहरी के लिए लाया था जिसमें एक सुरकंडा रोपवे थी जो बन गई दूसरी कोटी काॅलेनी से नई टिहरी के लिए भी रोपवे योजना लाया और उसे स्वीकृत भी करवाया। तीन करोड़ रुपया सर्वेक्षण में भी खर्च हो गए लेकिन जहां रोपवे का हैड और पार्किंग बननी थी उस जगह को टिहरी डैम विस्थापितों को आवंटन कर दिया गया इससे रोपवे योजना खत्म हो गई। अब मुझे तो नहीं लगता कि नई टिहरी के लिए रोपवे योजना आएगी। देखिए योजनाएं कोई अपने लिए नहीं लाता, जनता के लिए लाते हैं। विधायक हो या सांसद हर कोई जनता के लिए काम करता है, जनता की सुविधाओं और विकास के लिए योजनाएं लाता है। इसमें मैं हूं, पहले वाले विधायक रहे हो या मौजूदा विधायक किशोर जी हों। सभी जनता के लिए ही काम करते हैं लेकिन इसके लिए विजन क्या हो, यह एक बात होती है। मौजूदा विधायक जी के चार साल पूरे होने वाले हैं। इन चार सालों में वे अपनी प्राथमिकता तक नहीं बता पाए। चार सालों में कौन-सी योजना है जो ये लेकर आए? और उस पर काम हुआ हो? जो भी योजनाएं हैं वह पहले की हैं। ये तो उन योजनाओं को अपनी बताते हैं, जो मेरे कार्यकाल में आई हैं। सिर्फ इनकी इतनी कृपा है और हम इनका धन्यवाद देना चाहते हैं कि जो हम विस्थापित हैं और जो हमको प्लॉट आवंटित हुए हैं ये यह नहीं कहते कि मैंने इतने हजार प्लाॅट विस्थापितों को दिए हैं। मैंने संगीत महाविद्यालय स्वीकृत कराया उस पर काम नहीं हुआ। रोडवेज बस अड्डा स्वीकृत करवाया वह भी रूका हुआ है। एक तो ऐसा काम हो जो पूरा हुआ हो इन चार सालों में हमारे विधायक जी चार सालों तक ऐसा कोई काम नहीं करवा पाए। जो हम कह सकें कि भाई हमारे विधायक किशोर उपाध्याय जी ने अपने कार्यकाल में यह काम करवाया है लेकिन वे हर काम को कहते हैं कि मैंने करवाया है, मैं इसे लेकर आया, मैं उसे लेकर आया।
‘टिहरी का विकास मेरे जीवन का ध्येय’
राज्य बनने के बाद टिहरी विधानसभा से तीन बार विधायक बनने का रिकार्ड किशोर उपाध्याय के नाम दर्ज है। उत्तराखण्ड प्रदेश के हितों के लिए मुखर रहने वाले उपाध्याय ने कांग्रेस की तिवारी सरकार के दौरान टिहरी बांध विस्थापितों के हक में अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल कर महापंचायत की थी। जिसके चलते उनको मंत्री पद से भी हाथ धोना पड़ा। भाजपा की निशंक सरकार के समय चर्चित स्टूर्जिया भूमि घोटाले में सदन से लेकर सड़क पर लड़ाई लड़ने वाले किशोर उपाध्याय टिहरी क्षेत्र को उपेक्षित रखने के मामले में लम्बी भूख हड़ताल भी कर चुके हैं। ढोलनाद और उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के जल जंगल और जमीन के हक-हकूकों के लिए वनाधिकार आंदोलन को शुरू कर खासे चर्चित हुए किशोर वर्तमान में भाजपा से टिहरी विधायक हैं। टिहरी क्षेत्र में विकास कार्यो और जनता की समस्याओं पर ‘दि संडे पोस्ट’ के विशेष संवाददाता कृष्ण कुमार ने किशोर उपाध्याय से बातचीत की
आप तीन बार से विधायक हैं। तीसरे कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने वाले हैं। इन चार वर्षों में आपने अपने क्षेत्र में क्या-क्या विकास कार्य करवाए हैं। कोई पांच योजनाएं बताइए?
मैं टिहरी की महान जनता का बहुत आभारी हूं जिन्होंने मुझे तीसरी बार विधानसभा भेजा। जनता ने मुझ पर भरोसा किया तो मैं भी जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास कर रहा हूं। टिहरी का विकास ही मेरे जीवन का ध्येय है। इसके लिए मैंने कभी कोई समझौता नहीं किया है। मेरे तीसरे कार्यकाल के लगभग चार वर्ष हो रहे हैं। इन वर्षों में हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने विधायकों से दस मुख्य काम कहे थे तो उनमें से नर्सिंग कॉलेज बनाया गया जिसे हमने अब पीजी कॉलेज बना दिया है। टिहरी झील के चारों ओर हम एक एआई सेंटर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्यपाल जी ने माननीय प्रधानमंत्री जी के सामने यह बात रखी है। अब जमाना इंजीनियरिंग का है, चाहे आर्टिफिशियल इंजीनियरिंग का हो या अन्य कोई हो। इसीलिए हमने टिहरी हाईड्रो इंजीनियरंग काॅलेज को आईआईटी रूड़की का हिल कैम्पस बनाया है। इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रस्ताव भी भेज दिया है और प्रस्ताव को सहमती भी मिल चुकी है। जल्द ही टिहरी में आपको आईआईटी के छात्र पढ़ाई करते मिलेंगे। हमने इस कैम्पस में टिहरी बांध विस्थापितों और टीएचडीसी के अधिकारियों कर्मचारियों के बच्चों को रिजर्वेशन भी दिलवाया है। तीसरा केंद्रीय विद्यालय भवन अब तैयार हो चुका है। इस सत्र से नए भवन में पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
टिहरी क्षेत्र में सड़कों के निर्माण के लिए हमने बहुत काम करवाए हैं। बीते सालांे में जो भी गांव सड़कों से छूटे हुए हैं उन सभी को सड़कों से जोड़ दिया गया है। 200 किमी सड़कों काम काम हो चुका है। चिन्यालीसौड़ के लिए टनल योजना भी स्वीकृत हो चुकी है। मैंने चंद्र बदनी से कैथेली और जखंड के लिए एक टनल का निर्माण का सुझाव भी दिया है। इस टनल से नई टिहरी के लिए आवागमन और भी सुविधाजनक हो जाएगा।
मेरे क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा काम मेडिकल काॅलेज का निर्माण है। भगीरथी पुरम में टिहरी का मेडिकल काॅलेज स्वीकृत हो चुका है और भूमि का चयन भी हो चुका है। लोग भ्रांतियां फैलाते हैं कि हर जिले में एक मेडिकल काॅलेज बन रहा है, कहां बन रहा है? अगर यह बात है तो अब तक तो प्रदेश के 13 जिलों में 13 मेडिकल काॅलेज बन जाने चाहिए थे। मेडिकल काॅलेज की 850 करोड़ की डीपीआर बन चुकी है। बजट की कमी नहीं रहेगी। हमारी सरकार हर प्रकार से व्यवस्था करेगी।
इसके अलावा कई बड़ी योजनाओं पर काम होने वाला है। नई टिहरी के लिए लगभग 140 करोड़ की पेयजल योजना, चम्बा क्षेत्र के लिए भी करीब-करीब 140 करोड़ की पीने के पानी की योजना, काणाताल धनौल्टी के लिए भी पेयजल योजना प्रस्तावित है। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय का नया और विशाल भवन बन कर तैयार हो चुका है। मेरा प्रयास है कि अगर शहीद श्रीदेव सुमन जी के गांव के आस-पास हमें जमीन मिलती है तो इस क्षेत्र में हम उच्च शिक्षा, एआई और इंजीनियरिंग का हब तैयार करेंगे।
कोटी काॅलोनी से नई टिहरी के लिए रोपवे योजना 2014 में प्रस्तावित की गई थी। पूर्व विधायक बताते हैं कि इसमें करीब तीन करोड़ रुपया सर्वे इत्यादि में खर्च किया गया था लेकिन 2017 में रोपवे वाली भूमि बांध विस्थापितों को आवंटित कर दी गई जिससे रोपवे योजना रोक दी गई। इतनी महत्वपूर्ण योजना से आपका क्षेत्र महरूम क्यों हो गया?
नई टिहरी के लिए 12 सौ करोड़ की पर्यटन विकास की योजना शुरू हो चुकी है जिसमें बस अड्डा का निर्माण, पार्किंग का निर्माण, श्रीदेव सुमन पार्क का सौंदर्यीकरण का काम शुरू हो चुका है। रोपवे योजना को कोटी काॅलेनी से बौराड़ी तक ही रखा गया था, सर्वे आदि में कोई पैसा खर्च नहीं होता। जो कह रहे हैं वे उसका शासनादेश दिखाएं। नई टिहरी बाजार को इसमें नहीं जोड़ा गया जबकि सारे जिले के प्रशासनिक विभाग नई टिहरी बाजार में ही हैं। अब उसकी नई डीपीआर बन गई है और केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। केंद्र सरकार रोपवे योजनाओं पर गम्भीरता से काम कर रही है, चंद्रबदनी के लिए रोपवे योजना स्वीकृत हो चुकी है। मुझे लगता है कि जल्द ही टिहरी के लिए भी रोपवे योजना शुरू हो जाएगी।
मैंने तो मलेथा से मरोड़ा तक ोलवे लाइन को स्वीकृत करने के लिए केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी कुमार जी को भी पत्र दिया है, उन्होंने भी इस पर सहमति जताई है। अगर यह रेल मार्ग स्वीकृत हो जाता है तो इस क्षेत्र के लिए बहुत अच्छा रहेगा क्योंकि भारत सरकार चारधाम को रेलवे मार्ग से जोड़ने पर काम कर रही है। गंगोत्री धाम के लिए रेलवे योजना से टिहरी को आसानी से जोड़ा जा सकता है और गंगोत्री से सीधा बदरीनाथ, केदारनाथ के लिए टिहरी से मलेथा तक रेलवे लाइन जुड़ सकती है। गंगोत्री से यात्री को ऋषिकेश नहीं जाना पड़ेगा वह सीधा मलेथा पहुंच कर बदरीनाथ जा सकता है।
जाखणीधार क्षेत्र आपका गृह क्षेत्र है लेकिन वहां वर्षों से पार्किंग और टैक्सी स्टैंड और बाजार में शौचालय की सुविधा नहीं है। पेयजल योजना में पानी का वितरण सही नहीं हो रहा है और कई गांवों को पानी तक नहीं पहुंच रहा है?
जाखणीधार के लिए कोश्यार ताल और सुर सिंगार दो पेयजल योजना मैंने 2006 में स्वीकृत करवाई थी। 2012 के बाद दोनों ही योजनाओं में बहुत गड़बड़ियां की गईं। मैंने मुख्यमंत्री जी को इस मामले में कार्यवाही के लिए पत्र भी लिखा और इस पर प्रशासनिक कार्यवाही भी हुई है, कुछ का ट्रांसफर हुआ कुछ सस्पेंड भी हुए लेकिन योजनाओं पर काम फिर भी नहीं हुआ। सुर सिंगार योजना से अब चम्बा को भी पानी मिल रहा है। टैक्सी स्टैंड और पार्किंग के साथ-साथ बाजार में शौचालय का प्रस्ताव भेजा जा चुका है उस पर जल्द ही काम शुरू भी हो जाएगा।
आपके क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। जाखणीधार में चार प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं लेकिन एक में भी डॉक्टर नहीं है। नंद गांव पीएससी में पार्किंग नहीं है। कर्मचारी आवास क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। जिला अस्पताल में सुविधाएं नहीं हैं, अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर से विशेषज्ञ बुलाया जा रहा है?
जिला अस्पताल टिहरी में सिर्फ एक डॉक्टर नहीं है बाकी सभी डॉक्टर के पद कार्यरत हैं। जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट की भी तैनाती हो जाएगी। बाकी जगहों पर भी डाॅक्टरों की तैनाती हो रही है। जो कमियां आ रही हैं उनके प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।
नई टिहरी और चम्बा में वाहनों की पार्किंग नहीं है। इससे जाम लगता है जिससे कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। दोनों ही नगर पालिका क्षेत्र हैं फिर भी यह स्थिति क्यों बनी है?
चम्बा में नई टिहरी रोड पर पार्किंग बन चुकी है लेकिन लोग बाजार में ही वाहनांे को पार्क करना चाहते हंै। बाजार में जगह नहीं है तो जाम लगेगा ही। नई टिहरी में बड़ी पार्किंग पर काम शुरू हो चुका है जल्द ही पार्किंग की सुविधा मिल जाएगी।
जाखणीधार में आईटीआई बनाया गया है लेकिन सिर्फ कम्प्यूटर साइंस का ही ट्रेड पढ़ाया जा रहा है जबकि स्थानीय लोग इलेट्रिशियन और प्लम्बिंग आदि के ट्रेड की मांग कर रहे हैं?
मैंने 1986 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीर बहादुर सिंह जी को पत्र लिखा था जिस पर उन्होंने तुरंत उसे स्वीकृत किया था। कई सालों के बाद 2014 में जाकर उसका भवन बना। मैंने मुख्यमंत्री जी और तकनीकी शिक्षामंत्री सुबोध उनियाल जी से कहा है कि आज के हिसाब से ट्रेड पढ़ाए जाने चाहिए जिससे बच्चों को स्किल डेवलपमेंट हो और वे आगे बढ़ें।
आपकी विधानसभा पर्वतीय क्षेत्र की है। विकास कार्य हो रहे हैं लेकिन अनियोजित विकास के कारण समस्याएं आ रही हैं। हर जगह होटल, दुकानें बनाई जा रही हैं जिससे कई नई समस्याएं भी खड़ी हो रही हैं। इससे भविष्य में सरकार को भी विकास योजनाओं को पूरा करने में परेशानियां होंगी। इस पर कोई लगाम क्यों नहीं लागाई जा रही है?
यह नीतिगत मामला है, इन मामलों में सरकार ही कुछ कर सकती है। मैंने मुख्यमंत्री जी को दस योजनाओं के प्रारूप में भी यह मेंशन किया है कि हमें पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियांे को बढ़ाना है तो उसके लिए एक ठोस नीति के अनुरूप काम करना होगा। मैदानी क्षेत्र और पर्वतीय क्षेत्र दोनों विपरीत परिस्थितियों के क्षेत्र हैं। पहाड़ी क्षेत्र में सीमित भूमि है। स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना है तो उसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों के हिसाब से काम करने की जरूरत है।
स्वामी रामतीर्थ महाविद्यालय केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय को दे दिया गया। इसको वापस लेने की मांग आप पहले भी कर चुके हैं। अब इसको लेकर क्या कोई काम किया जा रहा है?
मैंने इसके लिए ऑटोनोमस महाविद्यालय कैम्पस बनाए जाने की बात की है। इस पर बातचीत चल रही है। अब यह संसद से ही हो सकता है। मैंने तो पहले ही इसे श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय बनाने की मांग की थी तब मेरी बात को किसी ने नहीं सुना। अब तो केंद्र सरकार और राज्य सरकार ही इस पर कुछ कर सकती है।
टिहरी विधानसभा फल उत्पादन में अग्रणी रही है लेकिन एक भी मंडी स्थल आपके क्षेत्र में नहीं है। आज भी किसान अपनी फसलों को देहरादून-ऋषिकेश ले जाने को मजबूर हैं?
मैंने कुछ मामले अपनी प्राथमिकता में रखे हैं। जिन पर मैं काम कर रहा हूं। एक तो इस क्षेत्र के लिए एक कोल्ड स्टोर बनाया जाए और एक मंडी स्थल बनाया जाए। मेरी प्राथमिकता है कि जिस तरह से प्रतापनगर क्षेत्र को ओबीसी क्षेत्र बनाया गया है उसी तरह से टिहरी क्षेत्र को भी ओबीसी बनाया जाए और उसे केंद्र सरकार की नौकरी और योजनाओं में रखा जाय। चैथी मेरी प्राथमिकता यह है कि टिहरी के युवाओं को सरकारी सर्विसेज में परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग की व्यवस्था हो। इसके लिए कोचिंग सेंटर बनाने का प्रयास कर रहा हूं।
आप पर आरोप लगता है कि आप अपनी विधायक निधि को खर्च करने में कंजूसी बरतते हैं। टिहरी के सभी विधायकों में आप सबसे कम विधायक निधि खर्च करने वाले विधायक माने जाते हैं ऐसा क्यों?
विधायक निधि के मामले में कई इश्यू थे। कभी पंचायत चुनाव, कभी निकाय चुनाव, कभी लोकसभा चुनाव आते रहे जिससे तकनीकी तौर पर विधायक निधि आवंटित नहीं हो पाई लेकिन अब मार्च 2026 तक विधायक निधि का आवंटन प्रस्तावों के अनुरूप हो जाएगा।
क्र. क्षेत्र मुद्दा/जमीनी स्थिति अंक (10 में)
मैंने तो मलेथा से मरोड़ा तक ोलवे लाइन को स्वीकृत करने के लिए केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी कुमार जी को भी पत्र दिया है, उन्होंने भी इस पर सहमति जताई है। अगर यह रेल मार्ग स्वीकृत हो जाता है तो इस क्षेत्र के लिए बहुत अच्छा रहेगा क्योंकि भारत सरकार चारधाम को रेलवे मार्ग से जोड़ने पर काम कर रही है। गंगोत्री धाम के लिए रेलवे योजना से टिहरी को आसानी से जोड़ा जा सकता है और गंगोत्री से सीधा बदरीनाथ, केदारनाथ के लिए टिहरी से मलेथा तक रेलवे लाइन जुड़ सकती है। गंगोत्री से यात्री को ऋषिकेश नहीं जाना पड़ेगा वह सीधा मलेथा पहुंच कर बदरीनाथ जा सकता है।
जाखणीधार क्षेत्र आपका गृह क्षेत्र है लेकिन वहां वर्षों से पार्किंग और टैक्सी स्टैंड और बाजार में शौचालय की सुविधा नहीं है। पेयजल योजना में पानी का वितरण सही नहीं हो रहा है और कई गांवों को पानी तक नहीं पहुंच रहा है?
जाखणीधार के लिए कोश्यार ताल और सुर सिंगार दो पेयजल योजना मैंने 2006 में स्वीकृत करवाई थी। 2012 के बाद दोनों ही योजनाओं में बहुत गड़बड़ियां की गईं। मैंने मुख्यमंत्री जी को इस मामले में कार्यवाही के लिए पत्र भी लिखा और इस पर प्रशासनिक कार्यवाही भी हुई है, कुछ का ट्रांसफर हुआ कुछ सस्पेंड भी हुए लेकिन योजनाओं पर काम फिर भी नहीं हुआ। सुर सिंगार योजना से अब चम्बा को भी पानी मिल रहा है। टैक्सी स्टैंड और पार्किंग के साथ-साथ बाजार में शौचालय का प्रस्ताव भेजा जा चुका है उस पर जल्द ही काम शुरू भी हो जाएगा।
आपके क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। जाखणीधार में चार प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं लेकिन एक में भी डॉक्टर नहीं है। नंद गांव पीएससी में पार्किंग नहीं है। कर्मचारी आवास क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। जिला अस्पताल में सुविधाएं नहीं हैं, अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर से विशेषज्ञ बुलाया जा रहा है?
जिला अस्पताल टिहरी में सिर्फ एक डॉक्टर नहीं है बाकी सभी डॉक्टर के पद कार्यरत हैं। जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट की भी तैनाती हो जाएगी। बाकी जगहों पर भी डाॅक्टरों की तैनाती हो रही है। जो कमियां आ रही हैं उनके प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।
नई टिहरी और चम्बा में वाहनों की पार्किंग नहीं है। इससे जाम लगता है जिससे कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। दोनों ही नगर पालिका क्षेत्र हैं फिर भी यह स्थिति क्यों बनी है?
चम्बा में नई टिहरी रोड पर पार्किंग बन चुकी है लेकिन लोग बाजार में ही वाहनांे को पार्क करना चाहते हंै। बाजार में जगह नहीं है तो जाम लगेगा ही। नई टिहरी में बड़ी पार्किंग पर काम शुरू हो चुका है जल्द ही पार्किंग की सुविधा मिल जाएगी।
जाखणीधार में आईटीआई बनाया गया है लेकिन सिर्फ कम्प्यूटर साइंस का ही ट्रेड पढ़ाया जा रहा है जबकि स्थानीय लोग इलेट्रिशियन और प्लम्बिंग आदि के ट्रेड की मांग कर रहे हैं?
मैंने 1986 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीर बहादुर सिंह जी को पत्र लिखा था जिस पर उन्होंने तुरंत उसे स्वीकृत किया था। कई सालों के बाद 2014 में जाकर उसका भवन बना। मैंने मुख्यमंत्री जी और तकनीकी शिक्षामंत्री सुबोध उनियाल जी से कहा है कि आज के हिसाब से ट्रेड पढ़ाए जाने चाहिए जिससे बच्चों को स्किल डेवलपमेंट हो और वे आगे बढ़ें।
आपकी विधानसभा पर्वतीय क्षेत्र की है। विकास कार्य हो रहे हैं लेकिन अनियोजित विकास के कारण समस्याएं आ रही हैं। हर जगह होटल, दुकानें बनाई जा रही हैं जिससे कई नई समस्याएं भी खड़ी हो रही हैं। इससे भविष्य में सरकार को भी विकास योजनाओं को पूरा करने में परेशानियां होंगी। इस पर कोई लगाम क्यों नहीं लागाई जा रही है?
यह नीतिगत मामला है, इन मामलों में सरकार ही कुछ कर सकती है। मैंने मुख्यमंत्री जी को दस योजनाओं के प्रारूप में भी यह मेंशन किया है कि हमें पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियांे को बढ़ाना है तो उसके लिए एक ठोस नीति के अनुरूप काम करना होगा। मैदानी क्षेत्र और पर्वतीय क्षेत्र दोनों विपरीत परिस्थितियों के क्षेत्र हैं। पहाड़ी क्षेत्र में सीमित भूमि है। स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना है तो उसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों के हिसाब से काम करने की जरूरत है।
स्वामी रामतीर्थ महाविद्यालय केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय को दे दिया गया। इसको वापस लेने की मांग आप पहले भी कर चुके हैं। अब इसको लेकर क्या कोई काम किया जा रहा है?
मैंने इसके लिए ऑटोनोमस महाविद्यालय कैम्पस बनाए जाने की बात की है। इस पर बातचीत चल रही है। अब यह संसद से ही हो सकता है। मैंने तो पहले ही इसे श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय बनाने की मांग की थी तब मेरी बात को किसी ने नहीं सुना। अब तो केंद्र सरकार और राज्य सरकार ही इस पर कुछ कर सकती है।
टिहरी विधानसभा फल उत्पादन में अग्रणी रही है लेकिन एक भी मंडी स्थल आपके क्षेत्र में नहीं है। आज भी किसान अपनी फसलों को देहरादून-ऋषिकेश ले जाने को मजबूर हैं?
मैंने कुछ मामले अपनी प्राथमिकता में रखे हैं। जिन पर मैं काम कर रहा हूं। एक तो इस क्षेत्र के लिए एक कोल्ड स्टोर बनाया जाए और एक मंडी स्थल बनाया जाए। मेरी प्राथमिकता है कि जिस तरह से प्रतापनगर क्षेत्र को ओबीसी क्षेत्र बनाया गया है उसी तरह से टिहरी क्षेत्र को भी ओबीसी बनाया जाए और उसे केंद्र सरकार की नौकरी और योजनाओं में रखा जाय। चैथी मेरी प्राथमिकता यह है कि टिहरी के युवाओं को सरकारी सर्विसेज में परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग की व्यवस्था हो। इसके लिए कोचिंग सेंटर बनाने का प्रयास कर रहा हूं।
आप पर आरोप लगता है कि आप अपनी विधायक निधि को खर्च करने में कंजूसी बरतते हैं। टिहरी के सभी विधायकों में आप सबसे कम विधायक निधि खर्च करने वाले विधायक माने जाते हैं ऐसा क्यों?
विधायक निधि के मामले में कई इश्यू थे। कभी पंचायत चुनाव, कभी निकाय चुनाव, कभी लोकसभा चुनाव आते रहे जिससे तकनीकी तौर पर विधायक निधि आवंटित नहीं हो पाई लेकिन अब मार्च 2026 तक विधायक निधि का आवंटन प्रस्तावों के अनुरूप हो जाएगा।
टिहरी विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक: किशोर उपाध्याय (अवधि: 4 वर्ष)
क्र. क्षेत्र मुद्दा/जमीनी स्थिति अंक (10 में)
- पेयजल (जाखणीधार व ग्रामीण क्षेत्र) कोश्यार ताल योजना विस्तार के बाद भी वितरण अव्यवस्थित, तकनीकी स्टाफ की कमी 4/10
- बाजार व ट्रैफिक प्रबंधन (जाखणीधार) टैक्सी स्टैंड नहीं, मुख्य बाजार में रोज जाम 3/10
- स्वच्छता व सार्वजनिक शौचालय बड़े बाजार में शौचालय तक नहीं, पुराना मूत्रालय जर्जर 2.5/10
- तकनीकी शिक्षा (आईटीआई जाखणीधार) भवन बना पर सिर्फ एक ट्रेड, युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण नहीं 3/10
- केंद्रीय विद्यालय (न्यू टिहरी) 38 साल बाद भवन बना, सकारात्मक, पर देरी बेहद लम्बी 6.5/10
- स्वास्थ्य सेवाएं। (जाखणीधार क्षेत्र) पीएचसी में डॉक्टर नहीं, फार्मासिस्ट भरोसे व्यवस्था 3/10
- जिला अस्पताल नई टिहरी पीपीपी खत्म, स्टाफ है पर रेडियोलॉजिस्ट व उपकरणों की कमी 5/10
- पार्किंग व यातायात (नई टिहरी) जिला मुख्यालय में पार्किंग नहीं, बस अड्डा अब तक अधूरा 3/10
- चम्बा नगर ट्रैफिक व पार्किंग क्षेत्रीय जंक्शन, भारी जाम, बड़ी पार्किंग की सख्त जरूरत 3.5/10
- रोजगार, उद्योग व कृषि मंडी नहीं, उद्योग नहीं, खेती सिमटी, पशुपालन घटा, युवा स्वरोजगार तक सीमित 3/10

