देवभूमि में गौ-गंगा की बात करने वाली प्रचंड बहुमत की त्रिवेंद्र रावत सरकार द्वारा प्रदेश में दूध-दही, शाक-सब्जियों, मांस और मेडिकल सुविधा जैसी आवश्यक सेवाओं में अब शराब को भी शामिल कर दिया गया है। प्रदेश में शराब एक आवश्यक वस्तु की श्रेणी में आ चुकी है। अब राज्य में शराब की दुकानों पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई जा सकती।
कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ने के चलते सरकार ने बचाव के लिए फिर से लॉकडाउन का सहारा लिया है। जिस कारण प्रदेश के चार बड़े जिलों देहरादून, हरिद्वार नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में सप्ताह के अंतिम दिनों शनिवार और रविवार को लॉकडाउन का निर्णय लिया गया है। हालांकि सरकार ने इन दो दिनों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और व्यापार पर कोई रोक नहीं लगाई है। लेकिन आश्चर्य है कि प्रदेश में शराब के करोबार को भी आवश्यक श्रेणी में रखकर लॉकडाउन से पूरी तरह छूट दी गई है।
प्रदेश सरकार पर पहले ही शराब के करोबार को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। प्रसिद्ध तीर्थ चारधाम यात्रा का पहला संगम माने जाने वाले देवप्रयाग के समीप शराब का कारखाना खोले जाने के मामले में सरकार के प्रति भारी नाराजगी भी देखने को मिल चुकी है। स्वयं भाजपा के कई नेताओं और साधु समाज ने सरकार के इस निर्णय से खासी नाराजगी जताई है। सरकार को इस नाराजगी से कोई असर नहीं पड़ा और राज्य के कई अन्य स्थानों पर भी शराब के कारखानों को खोले जाने की हरी झंडी स्वयं सरकर ने ही दी है।
सरकार किस कदर शराब के कारोबारियों के हितों के लिए तत्पर रही है इसका सबसे बड़ा प्रमाण इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में जहां कोरोना संकट से निपटने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन से हर तरह के कारोबार पूरी तरह से चौपट हो चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार को सबसे ज्यादा चिंता लॉकडाउन में शराब कारोबारियों को हुए नुकसान को लेकर रही है।

सरकार द्वारा लॉकडाउन के प्रथम चरण के बाद से लेकर लॉकडाउन में केंद्र सरकार द्वारा दी गई छूट के अंतराल में शराब कारोबारियों के 196 करोड़ के अधिभार को ही माफ कर दिया। जबकि प्रदेश में परिवहन व्यवसाय पूरी तरह से चौपट हो चुका है और परिवहन व्यवसाय सरकार के रोड टैक्स और इंश्योरेंस को माफ करने की मांग उठाते रहे हैं परंतु सरकार केवल शराब करोबारियों के हितों को ही ध्यान में रखा और 196 करोड़ का अधिभार माफ कर दिया।
सरकार द्वारा इस तरह से शराब करोबारियों पर की गई अनुकम्पा को राज्य में अन्य कारोबार के साथ भेदभावपूर्ण रवैया माना गया ओैर वरिष्ठ पत्रकार उमेश शर्मा द्वारा हाईकोर्ट नैनीताल में जनहित याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने भी इसे भेदभावपूर्ण मानते हुए सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला अभी हाईकोर्ट में चल रहा है।
इसी तरह पूर्व में भी प्रदेश सरकार ग्रीन जोन जिलों को छोड़कर ऑरेंज और रेड जोन जिलों के नगर निगमों के क्षेत्रों में शनिवार और रविवार को लॉकडाउन लगाया गया था। इस लॉकडाउन के पहले सप्ताह में भी शराब कारोबार को छूट दी गई थी, लेकिन सरकार के इस निर्णय का जमकर विरोध होने लगा तो अगले सप्ताह से ही शराब की दुकानों को भी लॉकडाउन में बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया।

जुलाई के दूसरे सप्ताह में सरकार ने फिर से प्रदेश के चार जिलों देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में शनिवार औेर रविवार को लॉकडाउन का निर्णय लिया, लेकिन इस बार सरकार शराब करोबार को आवश्यक सेवा में रखकर लॉकडाउन से मुक्त कर दिया। 18 और 19 जुलाई को जारी दो दिनों के लॉकडाउन में जिस तरह से दूध, शाक-सब्जियों मांस और मेडिकल सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी के व्यापार को खुला रखा उसी तरह से शराब की दुकानों को भी खुला रखा गया।
इस लॉकडाउन में वाहन आदि को कोई छूट नहीं दी गई थी, लेकिन आवश्यक कार्य या आवश्यक वस्तु लाने के लिए वाहन चलाने की भी छूट दी गई। मजेदार बात यह है कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें चालकों द्वारा शराब लाने के लिए वाहन चलाने की बात सामने आई है। जिनको पुलिस द्वारा जाने दिया गया।
अब सरकार और सरकार की नीति पर सवाल उठ रहे हैं। एक तरह से कोरोना से निपटने के लिए सरकार के तमाम दावों के बावजूद राज्य में कोरोना का संकट बढ़ता ही जा रहा है। जबकि पूर्व में प्रदेश कोरोना से मुक्त होने के मार्ग पर अग्रसर हो चुका था और माना जा रहा था कि जल्द ही प्रदेश कोरोना मुक्त हो सकता है। लेकिन जुलाई माह के दूसरे पखवाड़े में अचानक कोरोना के मामले बहुत तेजी से बढ़े और प्रदेश में कोरोना का आंकड़ा 4 हजार को भी पार कर चुका है। 14 सौ के करीब कोरोना के एक्टिव केस प्रदेश में है और 52 लोगों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके सरकार सप्ताह में केवल दो दिनों के लॉकडाउन में भी शराब के कारोबार से होने वाले राजस्व का मोह नहीं छोड़ पा रही है, जबकि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र प्रदेश को देवभूमि कहते नहीं थकते और गाय-गंगा की बात करते रहे हैं। लेकिन हकीकत में अब यह शराब प्रदेश बन चुका है और सरकार शराब कारोबारियों के हितों के लिए हर तरह से सहयोग करने की ही नीति का पालन कर रही है।