भारत में धर्म पर तो हमेशा से राजनीति होती आयी है। परन्तु वर्तमान में अब मॉब लिंचिंग जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी राजनीति शुरू हो गयी है।

पिछले कुछ दिनों में अल्पसंख्यकों और दलितों के साथ हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ हाल ही में हथियारों का लाइसेंस देने की वकालत की गयी है। इस पर सवाल उठ रहा  है की क्या अब हथियारों से रुकेगी मॉब लिंचिंग? अब सरकार के सामने ये एक बड़ी समस्या है जिससे निपटना सरकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। पिछले कुछ सालो में यानि साल 2014 के बाद से ही देश में इस ज्वलंत समस्या को लेकर बवाल मचा हुआ है।

26 जुलाई को लगेगा कैम्प 
 बता दें कि हाल ही में लखनऊ में सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद प्राचा और शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस द्वारा एससी-एसटी के साथ अल्पसंख्यकों को हथियार खरीदने के लिए लाइसेंस देने की वकालत की थी। इसको लेकर लखनऊ में 26 जुलाई को एक कैंप भी लगाया जाएगा. इस कैंप में हथियार खरीदने के तरीके की जानकारी दी जाएगी। .
ऐसे में कहीं न कहीं यह सवाल यह उठता है कि क्या मॉब लिचिंग से आपको हथियार बचा सकता है? क्या इस तरह की घटनाओं को धर्म और जाति देखकर अंजाम दिया जाता है? सवाल यह भी उठता है की क्या मोब लिंचिंग के खिलाफ हथियार रखना एकमात्र उपाय रह गया  है ?इन सभी बातो से लगता है की शायद अब लोगो को कानून पर भरोसा नहीं रह गया है।
हाल में बिहार के नवादा जिले के कोयलीगढ़ गांव में गत मंगलवार एक महिला को डायन बताकर कुछ लोगो द्वारा मौत की घाट उतार दिया गया। पुलिस द्वारा इस मामले में मुख्य आरोपी समेत चार लोगो को गिरफ्तार किया गया है और बाकी आरोपियों की पुलिस खोज कर रही है।
 ऐसे ही एक घटना थी जब झारखण्ड में भीड़ द्वारा तबरेज़ नामक व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया था  जिसकी वीडियो पुरे सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर वायरल हो गया  था। .वीडियो में तबरेज़ को खंबे से बांध कर पीटा गया था जो एक शर्मनाक घटना थी। इस घटना पर पीएम मोदी ने भी सदन में खेद जताया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह मॉब लिंचिंग का ११वा मामला था। वेबसाइट फैक्टचेकर डॉट इन के डाटा अनुसार इस साल मॉब लिंचिंग की घटनाओं में 4 लोगो के मौत हुयी है जबकि 22 घायल हुए थे।पिछले एक दशक में भारत में 297 घृणा अपराध के मामले सामने आये है। जिसमे 98 लोगो की मौत हुयी और 722 लोग घायल हुए है।  डाटा की माने तो हाल के सालो में भीड़ हिंसा के मामले में इज़ाफ़ा हुआ है। 2012 से 2014 में ऐसी लगभग 6 घटनाएं हुई है। अगर 2009 से 2019 के डाटा को देखा जाये तो पता चलता है की 28 फीसदी घटनाये पशु चोरी या हत्या से संबंधित थी।
देश अलग- अलग हिस्सों  में हो रही मॉब लिंचिंग और जय श्री राम के नारे के हो रहे दुरूपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए देश के  अलग अलग क्षेत्रो की 49 हस्तियों द्वारा पीएम मोदी को चिट्ठी  लिखी गयी है। इस चिट्ठी में लिखा गया है ,”इन दिनों देश में धर्म और जात पात और मॉब लिंचिंग से जुड़े मामले देश में बढ़ते जा रहे है। हालाँकि आपने मॉब लिंचिंग और इस तरह के मामलो को संसद में उठाया है लेकिन संसद में उठाना काफी नहीं है आपको इन मामलो पर कड़े कानून बनाने चाहिए ताकि इन बढ़ते मामलो की संख्या बढ़ने के बजाये काम हो लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस पत्र में यह भी कहा गया की इन दिनों जय श्री राम के नाम पर खुलेआम जंग छिड़ रही है। लोगो को अपने ही देश में एंटी नेशनल अर्बन नक्सल कहा जा रहा है सरकार द्वारा इन घटनाओं को बढ़ने से रोकना चाहिए और सरकार के खिलाफ उठने वाले मुद्दे को एंटी नेशनल सेंटीमेंट्स के साथ न जोड़ा जाये।
सविंधान के अंतर्गत सभी को राइट तो लाइफ का अधिकार है। संविधान में सबको साथ लेकर चलने की बात कही गयी है परन्तु मौजूदा हालात कुछ और नज़र आ रहे है। सरकार को इस पर कानून व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा,क्योंकि भीड़ का कोई धर्म नहीं होता और ना ही कोई जाति, भीड़ का केवल एक मजहब होता है वो है हिंसा करना। अंग्रेज़ी के दो शब्द मॉब और लिंचिंग ने लोगो के दिलों दिमाग में अपना ग़हरा असर छोड़ा है जिसने भारतीय लोकतंत्र को बेहद शर्मशार किया है।

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