हरियाणा प्रदेश में एक बार फिर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सब पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे है। हालाँकि हरियाणा की राजनीति में इस बार लड़ाई कांटे की है। सभी पार्टियां अपना पूरा जोर लगाकर चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं। कई दलों के लिए इस बार का चुनाव प्रतिष्ठा की विषय बन गया है। भाजपा प्रदेश में ‘इस बार 75 पार’ का नारा दे रही है, वहीं कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष उसे रोकने में जुटा है।
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर की बहुत ही फिल्मी सियासी कहानी है। पहला चुनाव लड़े और फिर मुख्यमंत्री बन गये। लाइम लाइट से दूर रहने वाले खट्टर पर पूरे देश की नजर है। लोकतंत्र में चुनाव को सबसे बड़ा पर्व माना जाता है औैर इस पर्व में मुद्दे इसकी उमंग को बढ़ाते हैं। सियासत के कायदे वही हैं जो लोकतंत्र को रास्ता दिखाए। मनोहर लाल खट्टर ने अपनी स्याही से जो हरियाणा का भविष्य गढ़ा है। अब जनता से उसकी मुहर का वक्त करीब आ गया है। हरियाणा में वंशवाद की बेल के बीच मनोहर लाल खट्टर वंशवाद के आरोप से मुक्त हैं। अक्सर चुनावी पर्व के दौरान ये कहा जाता है कि सियासत में परिवारवाद ने लोकतंत्र को सामंती बना दिया है। इस बार के चुनावी समर में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सामने जहां पार्टी को एक बार फिर से चुनावों में जीत दिलाने का दारोमदार है, वही पार्टी से नाराज चल रहे कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने संगठन को फिर से एकजुट करके भाजपा का सामना करने की बड़ी चुनौती है।
जानकारों की माने तो प्रदेश में सीधी लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच है, प्रदेश में छह महीने पहले तक मजबूत माना जाने वाला मुख्य विपक्षी दल इनेलो अब दो-फाड़ हो चुका है। जिससे यहां के राजनीतिक समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं। चौधरी देवी लाल के बनाई हुई पार्टी इनेलो में अब सिर्फ तीन विधायक बचे हैं। जबकि पिछले चुनाव में इसे 19 सीटों पर जीत मिली थी। चौटाला परिवार में आपसी मतभेद के बाद बनी नई पार्टी जननायक जनता दल(जजपा) के लिए यह पहला चुनाव होगा जहां पार्टी को प्रदेश में अपनी राजनैतिक हैसियत का अंदाजा लगेगा।
डेढ दशक से अधिक आरएसएस का प्रचारक रहने के बाद मनोहर लाल खट्टर ने बीजेपी ज्वाइन की थी. बीजेपी से जुड़ने के 20 साल बाद उन्होंने अपना पहला चुनाव लड़ा। 2014 में लोकसभा चुनाव की जीत से जो मोदी लहर का आगाज हुआ था उसकी वजह से बीजेपी हरियाणा में पहली बार विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल करने में कामयाब रही। 2014 में हरियाणा में कैप्टन अभिमन्यू, रामबिलास शर्मा, अनिल विज, कृष्ण पाल बड़े चेहरों के बजाए बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मनोहर लाल खट्टर को राज्य का सीएम बनाया। मनोहर लाल खट्टर बीजेपी का सरप्राइज पैकेज इसलिए थे क्योंकि 2014 में ही उन्होंने अपनी जिंदगी का पहला चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की थी। इस बार मतदाताओं के रुख को देखकर लगता है कि हरियाणा में एक बार फिर खट्टर विजय पताका फहराएंगे। क्योकि फ़िलहाल खट्टर को कोई टक्कर देता तो दिखाई नहीं दे रहा है।