आईसीसी टूर्नामेंटों के इतिहास में भारत और पाकिस्तान के लिए तीन-तीन बार ऐसे संयोग बने हैं जब जिंबाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को हराया और भारत ने खिताब जीता वहीं जब ऑस्ट्रेलिया लीग चरण में ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई तब खिताबी ट्रॉफी जीतने में पाकिस्तान सफल रहा है। इस बार भी टी-20 विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया का जिम्बाम्बे से हारना और ग्रुप स्टेज मुकाबलों में ही खिताबी जंग से बाहर हो जाने से प्रशंसकों की कल्पनाओं को उड़ान तो मिली लेकिन सुपर-8 के मुकाबलों में एक ओर जहां पाक का पहला मुकाबला बारिश में धुला तो दूसरा मुकाबला भी पाक हार गया वहीं दूसरी तरफ भारत भी अपना पहला मुकाबला हार गया। ऐसे में भारत को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए अपने बचे हुए मुकाबले को बड़े अंतर से जीतना होगा तो पाकिस्तान को भी अपने बचे हुए मैच बड़ी जीत में दर्ज करना होगा। ऐसी स्थिति में ऑस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे वाला संयोग पर सस्पेंस बना हुआ है


फटाफट क्रिकेट का विश्वकप अपने दूसरे पड़ाव पर पहुंच चुका है। 20 में से 12 टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया भी शामिल है जिसे खिताबी दावेदार भी माना जा रहा था। इस टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया को जिम्बाब्वे खिलाफ उलटफेर का शिकार होना पड़ा और टीम बाहर हो गई। जिम्बाब्वे ने 2021 की टी20 विश्वकप चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को 23 रन से हराया। इस एक  हार ने ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब सिर्फ आठ टीमें अफ्रीका, वेस्टइंडीज, जिम्बाब्वे, श्रीलंका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, भारत और पकिस्तान के बीच खिताबी जंग जारी है लेकिन क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे संयोग देखने को मिले हैं जो समय के साथ दिलचस्प ट्रेंड बन जाते हैं। टी-20 और वनडे विश्वकप के साथ-साथ चैम्पियंस ट्राॅफी जैसे बड़े आईसीसी टूर्नामेंट्स में एक ऐसा ही पैटर्न बार-बार नजर आया है। यह पैटर्न है जब-जब ऑस्ट्रेलिया किसी आईसीसी टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज से बाहर हुआ तब-तब पाकिस्तान ने वह आईसीसी खिताब अपने नाम किया है वहीं एक संयोग ऐसा भी है जब-जब जिम्बाब्वे ने विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया को हराया तब-तब भारत ने उसी टूर्नामेंट में खिताब जीता। इस बार भी विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया को जिम्बाब्वे ने हराया है और ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज से ही बहार हो गई है तो फिर से कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या भारत फिर खिताब जीतेगा या पाकिस्तान बाजी मारेगा। लेकिन सुपर-8 के मुकाबलों में पाकिस्तान का अभियान उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां किस्मत का दरवाजा उसके हाथ में नहीं रहा। पहला मैच बारिश के कारण रद्द होना, फिर इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ हार के बाद से सेमीफाइनल तक पहुंचने का रास्ता संकरा हो गया है। अब पाकिस्तान न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के मैच पर टकटकी लगाए हुए है। न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के पास अभी एक-एक मैच बाकी हैं। पाकिस्तान के लिए सेमीफाइनल का दरवाजा खुला रखने के लिए जरूरी है कि किस्मत उसका साथ दे और इंग्लैंड से न्यूजीलैंड बड़े अंतर से हारे वहीं ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को न सिर्फ श्रीलंका को हराना होगा बल्कि बड़े अंतर से जीतना होगा ताकि नेट रन रेट बेहतर हो सके। यह वह चरण है जहां हर चौका-छक्का, हर विकेट अहम हो जाता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पाकिस्तान का विश्वकप अभियान सेमीफाइनल से पहले ही खत्म हो जाएगा।

दूसरी तरफ बात करें भारत की तो अब टी-20 विश्वकप का हर मैच करो या मरो वाला है। सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए सिर्फ जीत ही काफी नहीं है बल्कि टीम का भविष्य अन्य मैचों के नतीजों पर भी निर्भर हो गया है। यानी दोनों टीमों पर सेमीफाइनल से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा है। ऐसी स्थिति में ऑस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे वाला संयोग पर फिलहाल सस्पेंस बरकरार है।

खेल विश्लेषकों का कहना है कि क्रिकेट में कुछ भी सम्भव है और यही इसकी खूबसूरती है। आंकड़े भले ही संयोग हों लेकिन प्रशंसकों के लिए ये उम्मीद और उत्साह का स्रोत बन जाते हैं। अब एक बार फिर जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को टी-20 विश्वकप में हराया है तो क्रिकेट फैंस में इस बात की दिलचस्पी बढ़ गई है कि क्या एक बार फिर भारत विश्व विजेता बनने के करीब है। क्रिकेट में आंकड़े और संयोग अक्सर प्रशंसकों को रोमांचित करते हैं। 1983, 2007 और 2011 ये विश्वकप भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक रहे। इन तीनों मौकों पर एक समानता यह रही कि जिंबाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को मात दी। इसे केवल संयोग ही कहा जा सकता है। क्रिकेट एक टीम गेम है जहां हर मैच का परिणाम अलग परिस्थितियों और प्रदर्शन पर निर्भर करता है। फिर भी यह तथ्य भारतीय प्रशंसकों के लिए शुभ संकेत जैसा बन गया है।

ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ जीत हासिल करना किसी भी टीम के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। जब जिम्बाम्बे जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम ऑस्ट्रेलिया को हराती है तो इससे टूर्नामेंट की धारणा बदल जाती है। मजबूत टीमों का आत्मविश्वास कम होता है। अन्य टीमों का मनोबल बढ़ता है। अंक तालिका के समीकरण बदलते हैं। 1983 की जीत से भारतीय क्रिकेट की छवि बदली, देश में क्रिकेट का जुनून बढ़ा, युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिली तो 2011 की जीत ने 28 साल का इंतजार खत्म करने के साथ ही सचिन तेंदुलकर का सपना पूरा हुआ। तीनों विश्वकप भारतीय क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम अध्याय हैं।

पाकिस्तान की बात करें तो 1992 के वनडे विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गया था। उसी साल पाकिस्तान पर टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा भी मंडरा रहा था लेकिन इमरान खान की टीम ने शानदार वापसी करते हुए पहली बार वनडे विश्व कप ट्रॉफी उठाई। उस जीत ने विश्व क्रिकेट में नई ताकत के उभार का संकेत दिया था। इसके बाद 2009 के टी-20 विश्वकप में भी कहानी कुछ ऐसी ही रही। ऑस्ट्रेलियाई टीम शुरुआती दौर से आगे नहीं बढ़ सकी। पाकिस्तान टीम ने पूरे टूर्नामेंट में जबरदस्त खेल दिखाते हुए टी-20 विश्वकप पर कब्जा जमाया तो  2017 की चैम्पियंस ट्राॅफी में भी ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज से बाहर हो गया था। फिर पाकिस्तान टीम खिताब जीतकर चर्चा में रही। यह तीसरी बार था जब ऑस्ट्रेलिया की शुरुआती विदाई के बाद ट्राॅफी का रुख उसी दिशा में मुड़ा।

अब 2026 टी-20 विश्वकप में एक बार फिर आॅस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो चुका है। पाकिस्तान की टीम करो या मरो वाली स्थिति में सुपर-आठ में पहुंची है। टीम में आपसी कलह है और खिलाड़ियों का संतुलन भी सही नहीं बैठ रहा। किस्मत के सहारे टीम सुपर आठ में जरूर पहुंची लेकिन यहां से उसके लिए मुश्किलें खड़ी होंगी। सुपर-आठ में पाकिस्तान के सामने इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और श्रीलंका जैसी शानदार फाॅर्म में चल रही टीमों की चुनौती होगी। उनसे पार पाना सलमान अली आगा के लिए आसान नहीं होगा। जहां तक सवाल है क्या इतिहास खुद को दोहराएगा? क्या पाकिस्तान टीम एक बार फिर ट्राॅफी उठाएगी का तो क्रिकेट सिर्फ संयोग और आंकड़ों का खेल नहीं है। हर टूर्नामेंट की अपनी परिस्थितियां, फाॅर्म और रणनीति होती है लेकिन बार-बार दोहराए गए ऐसे संयोग रोमांच जरूर बढ़ा देते हैं। जिम्बाब्वे ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को नहीं हराया है। दिलचस्प बात यह है कि जब-जब विश्व कप में जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर उलटफेर किया है भारत के लिए यह शुभ रहा जरूर है लेकिन इस बार पाक और भारत दोनों की राह मुश्किल भरी है।
 
जिम्बाब्वे की ऐतिहासिक जीत, भारत का उदय

वर्ष 1983 का एकदिवसीय विश्वकप इंग्लैंड में खेला गया था। उस समय जिम्बाब्वे क्रिकेट की दुनिया में नया-नया कदम रख रहा था। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया दो बार का विश्व चैम्पियन थी और बेहद मजबूत टीम मानी जाती थी। लेकिन 18 जून 1983 को टनब्रिज वेल्स में एक बड़ा उलटफेर हुआ। जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को 13 रनों से हराकर क्रिकेट जगत को चैंका दिया। इस मैच में डंकन फ्लेचर की कप्तानी में जिम्बाम्बे ने अनुशासित गेंदबाजी और जुझारू बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। यह जीत केवल एक मैच का परिणाम नहीं थी बल्कि इसने पूरे टूर्नामेंट की दिशा बदल दी थी। ऑस्ट्रेलिया का आत्मविश्वास डगमगाया और अंक तालिका में समीकरण बदले। उसी विश्वकप में भारत की टीम को कोई बड़ा दावेदार नहीं मान रहा था लेकिन कप्तान कपिल देव के नेतृत्व में टीम ने इतिहास रच दिया था। भारत ने फाइनल में दो बार के चैम्पियन वेस्टइंडीज को 43 रनों से हराकर पहली बार विश्वकप ट्रॉफी अपने नाम की। इस प्रकार, जिस टूर्नामेंट में जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को हराया उसी में भारत ने पहली बार विश्व चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया।
 
फिर से बड़ा उलटफेर, भारत ने दोहराया इतिहास

जिम्बाब्वे ने साल 2007 में टी-20 विश्वकप के पहले ही संस्करण में ऑस्ट्रेलिया को रोमांचक मुकाबले में हरा इतिहास लिखा वहीं एमएस धोनी के नेतृत्व में भारत ने खिताबी जीत दर्ज की। इसके बाद साल 2011 का एकदिवसीय विश्वकप भारतीय उपमहाद्वीप में खेला गया। इस बार भी जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर सभी को चैंकाया। ऑस्ट्रेलिया उस समय लगातार तीन बार (1999, 2003, 2007) विश्वकप जीत चुका था और चैथी बार खिताब का प्रबल दावेदार था लेकिन जिम्बाब्वे ने बेहतरीन खेल दिखाया और ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त दी। इस हार ने टूर्नामेंट के समीकरण को फिर बदल दिया और मुम्बई के वानखेड़े स्टेडियम में फाइनल मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को हराकर 28 साल बाद विश्वकप ट्राॅफी जीती। धोनी का विजयी छक्का आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे यादगार पल माना जाता है।
 
पाकिस्तान वाला संयोग

जब-जब ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज से बाहर हुआ तब-तब पाकिस्तान चैम्पियन बना। सबसे पहले 1992 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज से बाहर हुआ तो कप्तान इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान पहली बार विश्व चैम्पियन बना। इसके बाद 2009 टी-20 विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज से बाहर हुआ और कप्तान यूनुस खान की अगुवाई में पाकिस्तान टी-20 का ताज जीतने में सफल रहा वहीं 2017 चैम्पियंस ट्रॉफी में भी ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज से बाहर हुआ और पाकिस्तान विजेता बना तब सरफराज अहमद टीम के कप्तान थे।

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