तनाव के लम्बे दौर के बाद भारत-बांग्लादेश सम्बंधों में सुधार की नई शुरुआत, उच्च स्तरीय दौरे और कूटनीतिक संवाद तेज लेकिन भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का मुद्दा अब भी बना हुआ है सबसे संवेदनशील कड़ी
बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में सुधार की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है। बीते एक वर्ष में दोनों देशों के सम्बंधों में जो तनाव चरम पर पहुंच गया था, अब वह धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है और उसकी जगह संवाद, सम्पर्क और सहयोग की नई कोशिशें लेती नजर आ रही हैं। नई राजनीतिक परिस्थितियों ने दोनों देशों को एक बार फिर व्यावहारिकता के आधार पर रिश्तों को आगे बढ़ाने का अवसर दिया है।
इसी क्रम में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान 9 अप्रैल को अपने पहले विदेश दौरे पर भारत पहुंचे। यह दौरा प्रतीकात्मक ही नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह संकेत देता है कि ढाका नई दिल्ली के साथ सम्बंधों को प्राथमिकता दे रहा है और पिछले तनावपूर्ण दौर को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रहा है।
नई दिल्ली में अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान रहमान ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय सम्बंधों को मजबूत करने के उपायों के साथ-साथ ऊर्जा सहयोग, सीमा प्रबंधन, सुरक्षा समन्वय, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और बांग्लादेश के बीच सहयोग केवल सरकारों तक सीमित नहीं है बल्कि यह लोगों के बीच के सम्बंधों, आर्थिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि दोनों देश किसी भी प्रकार के राजनीतिक मतभेदों को दीर्घकालिक सम्बंधों पर हावी नहीं होने देना चाहते। हालांकि इस सकारात्मक कूटनीतिक माहौल के बीच सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का बना हुआ है जो इस समय भारत में रह रही हैं। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद उन्हें अपना पद और देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने भारत में शरण ली और तब से वह यहीं रह रही हैं।
शेख हसीना का भारत में रहना केवल एक व्यक्तिगत या मानवीय मामला नहीं है बल्कि यह अब एक बड़ा कूटनीतिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। बांग्लादेश में नई सरकार और खासकर वहां के राजनीतिक वर्ग पर यह दबाव है कि वह हसीना को वापस लाने के लिए ठोस कदम उठाए। यही कारण है कि विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भारत के साथ हुई बैठक में शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल के प्रत्यार्पण की मांग को एक बार फिर दोहराया।
ढाका की ओर से जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट तौर पर कहा गया कि बांग्लादेश इन मामलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाना चाहता है और प्रत्यार्पण संधि के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की अपेक्षा करता है। बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा इन नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा चुकी है, जिससे यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो गया है। हालांकि भारत की ओर से इस विषय पर बेहद सावधानी बरती जा रही है। भारत ने न तो सार्वजनिक रूप से इस मांग को स्वीकार किया है और न ही इसे खारिज किया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान में भी शेख हसीना के मुद्दे का कोई उल्लेख नहीं किया गया जो यह संकेत देता है कि भारत इस विषय को लेकर रणनीतिक चुप्पी बनाए हुए है।
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत में यह समझ बनी है कि शेख हसीना का मुद्दा महत्वपूर्ण जरूर है लेकिन इसे द्विपक्षीय सम्बंधों की व्यापक दिशा पर हावी नहीं होने दिया जाएगा। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत दिखे कि सम्बंधों को आगे बढ़ाने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बांग्लादेश की नई सरकार ने अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में सरकार ‘बांग्लादेश प्रथम’ के सिद्धांत पर काम करेगी। इसका अर्थ यह है कि बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा लेकिन साथ ही क्षेत्रीय सहयोग और संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी काम करेगा।
भारत की ओर से भी सम्बंधों को सामान्य करने और आगे बढ़ाने की इच्छा स्पष्ट रूप से दिखाई दी है। एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय सम्बंधों को मजबूत करने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए। इसके अलावा भारत ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रिया, विशेष रूप से चिकित्सा और व्यापारिक वीजा को और अधिक सरल बनाया जाएगा, जिससे लोगों के बीच सम्पर्क और बढ़ सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते केवल सरकारों के स्तर तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर भी गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के लिए यह जरूरी है कि वे अल्पकालिक राजनीतिक मुद्दों को दीर्घकालिक साझेदारी पर हावी न होने दें।
कुल मिलाकर हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में आई ठंडक अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है और उसकी जगह एक नई गर्माहट ले रही है। हालांकि यह भी उतना ही सच है कि शेख हसीना का भारत में रहना और उनके प्रत्यर्पण की मांग आने वाले समय में दोनों देशों के सम्बंधों की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।
अब यह देखना अहम होगा कि दोनों देश इस संवेदनशील मुद्दे को किस तरह संतुलित ढंग से संभालते हैं और क्या यह उभरती हुई गर्माहट स्थायी भरोसे और मजबूत साझेदारी में बदल पाती है या नहीं।