वर्ष 1984 के ऐतिहासिक ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाते हुए चमोली में महिलाओं ने शराब के खिलाफ नई जंग खड़ी कर दी है। जहां सामाजिक बहिष्कार से लेकर वैकल्पिक संस्कृति तक बदलाव की स्पष्ट तस्वीर दिख रही है
चमोली में शराब के खिलाफ उठ रही आवाज कोई नई नहीं है। इसकी जड़ें 1984 में शुरू हुए ऐतिहासिक ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन से मिलती हैं, जिसने पहाड़ के समाज में गहरी चेतना पैदा की थी। उस समय यह आंदोलन केवल शराबबंदी तक सीमित नहीं था बल्कि इसका मूल संदेश था कि जब तक स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक नशे की समस्या खत्म नहीं होगी। महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर यह मांग उठाई थी कि सरकार शराब से राजस्व कमाने के बजाय रोजगार सृजन पर ध्यान दे।
इस आंदोलन में महिलाओं की भूमिका सबसे अहम रही। गांव-गांव में शराब के खिलाफ अभियान चलाया गया, अवैध भट्टियां तोड़ी गईं और ठेकों का विरोध हुआ। ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ का नारा सामाजिक चेतना का प्रतीक बन गया।
आज, चार दशक बाद, उसी आंदोलन की गूंज चमोली में एक बार फिर सुनाई दे रही है। जिले के कई क्षेत्रों में महिलाएं शराब के खिलाफ नए सिरे से जन आंदोलन चला रही हैं जो अपने स्वरूप में भले नया हो लेकिन इसकी आत्मा पुराने आंदोलन से ही प्रेरित है।
शराब की लत से चमोली में कई घर तबाह हुए हैं। इसे लेकर समय-समय पर आंदोलन भी हुए लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई। पिछले कुछ महीनों से जिले के सैकड़ों गांवों में महिलाएं शराब के खिलाफ मुखर हुई हैं।
चमोली के पहाड़ी इलाकों में शराब का प्रचलन किसी से छिपा नहीं है। यहां तक कि एक कहावत प्रचलित है- ‘सूर्य अस्त और पहाड़ी मस्त।’ इसके दुष्परिणामों का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ता है। जिले में शराब ने कई घरों के चिराग समय से पहले बुझा दिए हैं। कई महिलाओं की मांग उजड़ गई, बच्चे अनाथ हो गए और परिवार आर्थिक रूप से टूट गए। बढ़ती नशाखोरी ने सामाजिक माहौल को भी प्रभावित किया है।
इन परिस्थितियों से परेशान होकर अब चमोली में नशे के खिलाफ जन आंदोलन शुरू हो गया है। पिछले कुछ महीनों में जिले के सैकड़ों गांवों में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही सामाजिक बहिष्कार और जुर्माने का प्रावधान भी लागू किया गया है।
यह अभियान सीमांत जोशीमठ विकासखंड से शुरू होकर दशोली, पोखरी, नंदानगर, थराली, गैरसैंण, कर्णप्रयाग, नारायणबगड़ और देवाल क्षेत्रों तक फैल चुका है। महिलाओं ने जनजागरण अभियान चलाकर नशामुक्ति की शपथ ली है। एक गांव से शुरू हुआ शराब का बहिष्कार अब पूरे जिले में फैलने लगा है।
महिलाओं ने सबसे पहले घरों के आयोजनों में शराब पर रोक लगाई। इसके बाद शादी-विवाह, पूजा-पाठ और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में भी शराब पर प्रतिबंध लागू किया गया। उल्लंघन करने वालों के लिए सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक दंड तय किया गया है। इसका असर हाल के विवाह समारोहों में साफ दिख रहा है जहां शराब की जगह लस्सी, जूस और कोल्ड ड्रिंक्स परोसे जा रहे हैं।
महिलाएं अब सक्रिय निगरानी भी कर रही हैं। जहां कहीं शराब परोसी जाती है, वहां विरोध दर्ज कर कार्यक्रमों का बहिष्कार किया जा रहा है। हालांकि चमोली में यह संघर्ष पहले भी देखने को मिला है। वर्ष 2012 में जिले के बंड क्षेत्र में महिलाओं ने कंडाली (बिच्छू घास) आंदोलन चलाकर अवैध शराब के खिलाफ जोरदार अभियान छेड़ा था। महिलाओं ने कंडाली से शराबियों को सबक सिखाया और गांवों में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कराया। इस आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला और इसकी सफलता के लिए महिला नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिला।
कुछ वर्षों बाद यह आंदोलन कमजोर पड़ गया और अवैध शराब का कारोबार फिर से बढ़ने लगा। नगर पंचायत पीपलकोटी के गठन के बाद यहां अंग्रेजी शराब की दुकान खुल गई जिसे स्थानीय स्तर पर मौन स्वीकृति मिल गई। वर्ष 2022-23 में खुली इस दुकान ने एक बार फिर सामाजिक माहौल को प्रभावित किया। बदरीनाथ हाइवे पर स्थित इस ठेके के कारण कई बार विवाद और हंगामे की स्थिति बनी जिससे खासकर महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ी।
अब एक बार फिर चमोली में महिलाएं संगठित होकर शराब के खिलाफ खड़ी हो गई हैं। यह केवल एक सामाजिक आंदोलन नहीं बल्कि 1984 के ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन की पुनस्र्मृति भी है। यह आंदोलन संदेश देता है कि जब तक स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर नहीं बढ़ेंगे, तब तक नशे की समस्या का स्थायी समाधान सम्भव नहीं है।
चमोली में उठ रही यह नई जन लहर इस बात का संकेत है कि समाज अब केवल विरोध नहीं कर रहा बल्कि बदलाव की दिशा में ठोस कदम भी उठा रहा है जहां शराब के स्थान पर जागरूकता और रोजगार की मांग को प्राथमिकता दी जा रही है।
बात अपनी-अपनी
शराब के बढ़ते चलन से हमारी युवा पीढ़ी शराब के गिरफ्त में आ रही है। साथ ही गांवों का सामाजिक माहौल भी खराब हो रहा है। अब हमारे गांव में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा है। शादी-विवाह एवं मांगलिक कार्यों में शराब परोसने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया है। पहले महिलाओं को सड़क पर चलना दूभर हो गया था जो अब नहीं है।
सतेश्वरी देवी, अध्यक्ष, महिला मंगल दल, सैकोट, चमोली
सतेश्वरी देवी, अध्यक्ष, महिला मंगल दल, सैकोट, चमोली
पहाड़ के गांवों में महिलाओं द्वारा चलाया जा रहा नशामुक्ति अभियान सराहनीय है। नशा एक ऐसा दलदल है जिसमें एक बार फंसने के बाद व्यक्ति चाहकर भी आसानी से निकल नहीं पाता है। नशे का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसका परिवार और समाज भी इसकी मार झेलते हैं। गलत संगति, बेरोजगारी और मानसिक तनाव के कारण युवा वर्ग नशे की ओर आकर्षित हो रहा है। इससे न केवल उनका स्वास्थ्य और शिक्षा प्रभावित हो रही है बल्कि उनके सपने और भविष्य भी अंधकारमय हो रहा है।
प्रताप सिंह राणा, पूर्व प्रधान, ग्राम पंचायत, स्यूंण
प्रताप सिंह राणा, पूर्व प्रधान, ग्राम पंचायत, स्यूंण
लामबगड़ की खुली बैठक में पुलिस-प्रशासन की उपस्थिति में गांव के सभी सामाजिक समारोह, मांगलिक कार्यों में शराब परोसने पर पूर्ण रोक लगाने की शपथ ली गई। नियमों का पालन न करने पर सामाजिक बहिष्कार के साथ दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
मीना चैहान, ग्राम प्रधान, लामबगड़, ज्योर्तिमठ
मीना चैहान, ग्राम प्रधान, लामबगड़, ज्योर्तिमठ
पीपलकोटी नगर पंचायत क्षेत्र में नशे का कारोबार लगातार तेजी से फल-फूल रहा है जिसके चलते क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। पुलिस अधीक्षक चमोली को ज्ञापन सौंप कर कार्रवाई की मांग की गई है।
राकेश नवानी, सामाजिक कार्यकर्ता, पीपलकोटी
राकेश नवानी, सामाजिक कार्यकर्ता, पीपलकोटी