पश्चिम एशिया युद्ध और तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘मितव्ययिता अपील’ अब केवल सलाह नहीं रह गई है बल्कि सरकारी नीतियों में भी दिखाई देने लगी है। 10 मई को हैदराबाद में प्रधानमंत्री द्वारा सोना कम खरीदने, विदेशी यात्राएं टालने और ईंधन बचाने की अपील के कुछ ही दिनों बाद पेट्रोल- डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है जबकि सोने के आयात पर कस्टम ड्यूटी भी बढ़ा दी गई है। शेयर बाजार में पहले ही 5.5 लाख करोड़ रुपए डूब चुके हैं और ज्वेलरी व ट्रैवल सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट आई है। विपक्ष इसे ‘आर्थिक आपातकाल की शुरुआती आहट’ बता रहा है तो सोशल मीडिया पर लोग इसे कोविड काल के ‘थाली-ताली दौर’ की वापसी कह रहे हैं
कोरोनाकाल में थाली-ताली और दिया जलाओ अभियानों के बाद अब देश में ‘तेल बचाओ’ और ‘सोना मत खरीदो’ का दौर शुरू होता दिखाई दे रहा है। 10 मई को हैदराबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि वे गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचें, विदेशी यात्राएं सीमित करें, कारपूलिंग अपनाएं और ईंधन की बचत करें लेकिन अब यह अपील केवल भाषण तक सीमित नहीं रही।
सरकार ने प्रधानमंत्री की अपील के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही सोने के आयात पर कस्टम ड्यूटी भी बढ़ाई गई है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम किया जा सके। सरकार का तर्क है कि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण कच्चे तेल का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में गैर-जरूरी आयातों को नियंत्रित करना जरूरी हो गया है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ईरान संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। ऐसे में सरकार पर विदेशी मुद्रा भंडार बचाने और आयात बिल नियंत्रित करने का दबाव बढ़ गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद में दिए अपने भाषण में कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में विदेशी मुद्रा बचाना ‘राष्ट्रीय कर्तव्य’ है। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने और अनावश्यक खर्च कम करने की अपील की थी। हालांकि बाजार ने इस संदेश को एक सम्भावित आर्थिक सख्ती के संकेत के रूप में लिया। प्रधानमंत्री के बयान के अगले ही दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1000 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,000 के नीचे फिसल गया। कुछ ही घंटों में निवेशकों की संपत्ति से लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपए साफ हो गए।
सबसे ज्यादा असर ज्वेलरी सेक्टर पर पड़ा। टाइटन के शेयर 6 प्रतिशत से अधिक टूट गए जबकि कल्याण ज्वैलर्स, सेनको गोल्ड और स्काई गोल्ड में 8 से 12 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि सरकार सोने के आयात को और सीमित करती है या उपभोग हतोत्साहित करने वाले कदम उठाती है तो पूरे जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग पर गम्भीर असर पड़ सकता है। ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर भी दबाव में हैं। आईआरसीटीसी समेत कई पर्यटन और यात्रा कम्पनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को डर है कि यदि विदेशी यात्राएं और निजी खर्च कम हुए तो पर्यटन उद्योग प्रभावित होगा।
प्रधानमंत्री की अपील के बाद सोशल मीडिया पर कोविड काल की यादें भी ताजा हो गईं। लोगों ने 2020 के जनता कफ्र्यू, थाली-ताली और दिया जलाओ अभियानों को याद करते हुए मौजूदा दौर की तुलना उस समय से की। कई लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि क्या सरकार फिर एक ‘संकट अर्थव्यवस्था’ की ओर बढ़ रही है जहां जनता से त्याग और मितव्ययिता की अपेक्षा की जाएगी।
विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा प्रबंधन को लेकर पहले से तैयारी करने में विफल रही।
इस बीच प्रधानमंत्री मोदी की अपील के तुरंत बाद गुजरात के सोमनाथ में हुए उनके रोड शो को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। आलोचकों ने सवाल उठाया कि एक ओर जनता को ईंधन बचाने और कारपूलिंग की सलाह दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ भारी सुरक्षा और बड़े वाहन काफिलों के साथ रोड शो आयोजित किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणियों की बाढ़ आ गई।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का संकट लम्बा चलता है तो भारत को महंगाई, विदेशी मुद्रा दबाव, आयात संकट और ऊर्जा असुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार और भी सख्त आर्थिक कदम उठा सकती है। फिलहाल जनता को संदेश साफ है कि कम खर्च कीजिए, कम घूमिए, कम खरीदिए और ज्यादा बचाइए।