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आखिरकार सतीशन के हाथ में केरल

केरल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ की नई सरकार ने औपचारिक रूप से कार्यभार सम्भाल लिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन ने 18 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली, जिसके साथ ही राज्य में लम्बे समय बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हो गई। हालांकि यह फैसला कांग्रेस के लिए आसान नहीं था। चुनाव परिणाम आने के बाद करीब दो हफ्तों तक मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर पार्टी के भीतर गहन मंथन, खेमेबाजी और लॉबिंग का दौर चलता रहा। अंततः संगठन, सहयोगी दलों और विधायकों के समर्थन के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व ने सतीशन के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी।

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शुरुआत से ही कई बड़े नाम शामिल थे। सबसे चर्चित दावेदारों में कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और वी.डी. सतीशन प्रमुख थे। पार्टी के भीतर एक वर्ग वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में था। राहुल गांधी और कांग्रेस आलाकमान के साथ उनकी निकटता को देखते हुए माना जा रहा था कि दिल्ली नेतृत्व उनकी उम्मीदवारी पर गम्भीरता से विचार कर रहा है। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका को भी उनके पक्ष में देखा जा रहा था। दूसरी ओर रमेश चेन्निथला अपनी वरिष्ठता और लम्बे राजनीतिक अनुभव के आधार पर दावेदारी पेश कर रहे थे। कांग्रेस के पुराने और अनुभवी नेताओं का एक बड़ा वर्ग उनके समर्थन में था। चेन्निथला इससे पहले भी राज्य कांग्रेस के बड़े चेहरे रहे हैं और उन्हें प्रशासनिक अनुभव का लाभ भी प्राप्त था लेकिन पार्टी के भीतर यह धारणा भी मजबूत होती गई कि कांग्रेस को इस बार अपेक्षाकृत युवा और आक्रामक नेतृत्व की जरूरत है।

यहीं से वी डी सतीशन की दावेदारी लगातार मजबूत होती चली गई। विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सरकार के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपनाया था। भ्रष्टाचार, बेरोजगा री, प्रशासनिक पारदर्शिता और आम जनता के मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें कांग्रेस का सबसे प्रभावशाली चेहरा बना दिया था। चुनाव अभियान के दौरान भी सतीशन ने राज्य भर में व्यापक प्रचार किया और पार्टी की जीत में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया।

चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस विधायक दल के भीतर भी सतीशन के समर्थन में माहौल तेजी से बनता गया। बड़ी संख्या में नव निर्वाचित विधायकों ने खुलकर उनके पक्ष में राय दी। यूडीएफ के सहयोगी दलों, खासकर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी आईयूएमएल ने भी अंदरखाने सतीशन के नाम का समर्थन किया। माना जा रहा है कि सहयोगी दलों की यह राय कांग्रेस नेतृत्व के अंतिम निर्णय में निर्णायक साबित हुई।
दिल्ली में इस मुद्दे पर कई दौर की बैठकों का सिलसिला चला। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रदेश प्रभारी दीपा दास मुंशी तथा दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग नेताओं से
बातचीत की। पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने केरल जाकर विधायकों की राय भी जानी। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व इस बात को लेकर भी सतर्क था कि मुख्यमंत्री चयन से किसी बड़े गुट में नाराजगी न पैदा हो।

वेणुगोपाल के नाम पर विचार के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की स्थिति में लोकसभा सदस्यता छोड़नी पड़ सकती है जिससे पार्टी को उपचुनाव का सामना करना पड़ता, वहीं सतीशन पहले से ही राज्य की राजनीति में सक्रिय थे और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता अधिक दिखाई दे रही थी। धीरे-धीरे पार्टी के भीतर सहमति सतीशन के पक्ष में बनती चली गई।

बताया जाता है कि अंतिम दौर में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ए के एंटनी की राय भी काफी महत्वपूर्ण रही। कांग्रेस नेतृत्व ने उनसे विस्तृत चर्चा की और उसके बाद मुख्यमंत्री के नाम को अंतिम रूप दिया गया। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सतीशन के नाम का प्रस्ताव रखा गया जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस और यूडीएफ के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रही। सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कहा कि उनकी सरकार पारदर्शिता, विकास और जनसरोकारों को प्राथमिकता देगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नई सरकार प्रशासनिक सुधारों और युवाओं के लिए रोजगार के मुद्दे पर विशेष ध्यान देगी।

छह बार विधायक रह चुके वी डी सतीशन एर्नाकुलम जिले की परावुर सीट से आते हैं। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले सतीशन पेशे से वकील भी रहे हैं। अपनी तेज-तर्रार शैली और मुखर राजनीतिक रुख के कारण वे लम्बे समय से कांग्रेस के भीतर नई पीढ़ी के प्रभावशाली नेता माने जाते रहे हैं।
अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को लागू करने, यूडीएफ के भीतर संतुलन बनाए रखने और राज्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने की होगी। कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद है कि सतीशन के नेतृत्व में पार्टी केरल में एक स्थिर और प्रभावी सरकार देने में सफल होगी।

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