ब्रिटेन के पूर्व राजकुमार एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर एक बार फिर गम्भीर आरोपों के घेरे में हैं। जेफ्री एपस्टीन से सम्बंधों को लेकर पहले से विवादों में रहे एंड्रयू के खिलाफ अब ब्रिटिश पुलिस ने संकेत दिए हैं कि सरकारी पद के दुरुपयोग की जांच के साथ-साथ यौन दुराचार से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जा सकती है

ब्रिटेन की थेम्स वैली पुलिस ने 22 मई को जारी बयान में कहा है कि इंग्लैंड पूर्व राजकुमार एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर के खिलाफ चल रही जांच अब नए मोड़ पर पहुंच सकती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल सार्वजनिक पद पर कथित दुराचार तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें यौन दुराचार और अन्य गम्भीर आरोपों की भी जांच सम्भव है।

दरअसल एंड्रयू लम्बे समय से अमेरिकी वित्तीय कारोबारी और कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से अपने सम्बंधों को लेकर विवादों में रहे हैं। एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गम्भीर आरोप लगे थे। उसकी गिरफ्तारी और बाद में जेल में हुई मौत के बाद दुनियाभर में उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों पर सवाल उठे थे। एंड्रयू का नाम भी उन्हीं चर्चाओं में प्रमुखता से सामने आया था।

वर्ष 2022 में एंड्रयू को अमेरिका में एक महिला द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों के मामले में अदालत के बाहर समझौता करना पड़ा था। इसके बाद उन्हें सार्वजनिक जीवन और शाही जिम्मेदारियों से लगभग अलग कर दिया गया था। ब्रिटिश शाही परिवार की छवि पर पड़े दबाव के कारण एंड्रयू ने अपने अधिकांश सार्वजनिक दायित्व छोड़ दिए थे।

अब एक बार फिर एक नए दावे ने इस पूरे विवाद को ताजा कर दिया है। जनवरी में बीबीसी की एक रिपोर्ट में एक महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2010 में उसे जेफ्री एपस्टीन ब्रिटेन लेकर आया था और विंडसर स्थित एंड्रयू के निवास ‘राॅयल लाॅज’ में भेजा गया था। महिला का दावा है कि वहां उसे यौन उद्देश्यों के लिए ले जाया गया था। महिला के अमेरिकी वकील ब्रैड एडवड्र्स ने कहा था कि एंड्रयू के साथ रात बिताने के बाद उसे बकिंघम पैलेस का दौरा भी कराया गया।

थेम्स वैली पुलिस ने 22 मई को पुष्टि की कि उसने महिला के कानूनी प्रतिनिधियों से सम्पर्क किया है। हालांकि पुलिस ने यह भी कहा कि उसने अभी तक कथित पीड़िता से सीधे बातचीत नहीं की है। पुलिस का कहना है कि यदि महिला औपचारिक शिकायत दर्ज कराना चाहती हैं तो मामले को पूरी संवेदनशीलता और गोपनीयता के साथ सम्भाला जाएगा।

पुलिस ने अपने बयान में कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ितों के लिए सामने आना आसान नहीं होता और इसलिए उनकी इच्छा और सुविधा के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे एपस्टीन मामले से जुड़े अन्य सम्भावित पीड़ितों और गवाहों से भी सम्पर्क कर रही हैं।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब फरवरी 2026 में एंड्रयू को सार्वजनिक पद पर कथित दुराचार के मामले में हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उन्हें नाॅरफाॅक स्थित सैंड्रिंघम में उनके नए निवास से गिरफ्तार किया था। हालांकि पूछताछ के बाद उन्हें ‘अंडर इन्वेस्टिगेशन’ की स्थिति में छोड़ दिया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार ‘मिसकंडक्ट इन पब्लिक ऑफिस’ यानी सार्वजनिक पद पर दुराचार का अपराध काफी व्यापक दायरे वाला है। इसमें गोपनीय सूचनाओं का गलत इस्तेमाल, निजी लाभ के लिए प्रभाव का उपयोग, भ्रष्टाचार, हितों का टकराव, वित्तीय अनियमितता, कर्तव्यों की अनदेखी और यौन दुराचार तक शामिल हो सकते हैं।

जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि ट्रेड एनवाॅय के रूप में कार्य करते हुए एंड्रयू ने कहीं संवेदनशील सरकारी या व्यावसायिक सूचनाएं जेफ्री एपस्टीन के साथ साझा तो नहीं की थी। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी कुछ दस्तावेजों में ऐसे संकेत मिलने का दावा किया गया था।

इसी बीच ब्रिटिश सरकार ने एंड्रयू की वर्ष 2001 में ट्रेड एनवाॅय के रूप में नियुक्ति से जुड़े कुछ सरकारी दस्तावेज भी सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों के अनुसार एंड्रयू की नियुक्ति से पहले किसी औपचारिक सुरक्षा जांच या वेटिंग के प्रमाण नहीं मिले। दस्तावेजों में यह भी सामने आया कि दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय स्वयं चाहती थीं कि एंड्रयू को यह जिम्मेदारी दी जाए। हालांकि वर्ष 2011 में एपस्टीन से सम्बंधों को लेकर बढ़ते विवादों के बीच एंड्रयू को यह पद छोड़ना पड़ा था। उसके बाद से ही वह लगातार विवादों और जांचों के घेरे में बने हुए हैं।

एंड्रयू ने एक बार फिर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी कोई गैरकानूनी कार्य नहीं किया और न ही अपने सरकारी पद का व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल किया लेकिन पुलिस की ताजा टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर ब्रिटेन की राजनीति, शाही परिवार और न्याय व्यवस्था के केंद्र में आ गया है।

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