विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और युगांडा में फैले इबोला संक्रमण को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति’ घोषित कर दिया है। इबोला वायरस के बंडीबुग्यो स्ट्रेन से फैले इस संक्रमण में अब तक 80 मौतें और सैकड़ों संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि सीमावर्ती देशों में संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है और स्थिति तेजी से गम्भीर होती जा रही है
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गत् पखवाड़े अफ्रीका में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण को लेकर वैश्विक चेतावनी जारी की। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को अब ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न’ यानी अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति माना जाएगा। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह स्थिति वैश्विक महामारी घोषित किए जाने के मानकों तक नहीं पहुंची है लेकिन मध्य अफ्रीका के देशों के लिए यह बेहद गम्भीर खतरा बन चुकी है। विशेष रूप से वे देश जो डीआरसी की सीमाओं से जुड़े हुए हैं, वहां संक्रमण फैलने की आशंका अधिक है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार यह संक्रमण इबोला वायरस के बंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यही इस पूरे प्रकोप को और अधिक खतरनाक बना रहा है क्योंकि बंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। इससे पहले डीआरसी में जितने भी बड़े इबोला प्रकोप सामने आए थे, उनमें लगभग सभी जायर स्ट्रेन से जुड़े थे, जिनके खिलाफ कुछ वैक्सीन और दवाएं उपलब्ध थीं।
स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया कि 23 मई तक डीआरसी के इतुरी प्रांत में 80 संदिग्ध मौतें दर्ज की जा चुकी थीं। इसके अलावा आठ मामलों की प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हुई है जबकि 246 संदिग्ध मरीजों की पहचान की गई है। संक्रमण बुनिया, रामप्वारा और मोंगब्वालु समेत कम से कम तीन प्रमुख स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुका है। डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 22 मई को कहा था कि हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और वास्तविक संक्रमितों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। डब्ल्यूएचओ ने भी यही आशंका जताई है। एजेंसी का कहना है कि शुरुआती नमूनों में संक्रमण की दर काफी अधिक पाई गई है और लगातार नए मरीज सामने आ रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि संक्रमण समुदाय के भीतर तेजी से फैल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह डीआरसी में वर्ष 1976 के बाद अब तक का 17वां इबोला प्रकोप है। इबोला वायरस की पहली पहचान भी इसी देश में हुई थी। अफ्रीका के घने उष्णकटिबंधीय जंगल इस वायरस का प्राकृतिक स्रोत माने जाते हैं।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अब संक्रमण सीमाओं को पार करने लगा है। युगांडा की राजधानी कंपाला में 22 और 23 मई को दो अलग-अलग पुष्ट मामले सामने आए। इनमें एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। दोनों संक्रमित लोग डीआरसी से यात्रा करके आए थे। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि संक्रमण अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहा। इसी तरह डीआरसी की राजधानी किंशासा में भी एक पुष्ट मामला सामने आया है। संक्रमित व्यक्ति इतुरी प्रांत से लौटकर आया था। किंशासा जैसे घनी आबादी वाले शहर में संक्रमण पहुंचना स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए बेहद चिंताजनक माना जा रहा है क्योंकि यहां से वायरस के बड़े पैमाने पर फैलने की आशंका बढ़ सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी कि कुछ मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण फैलने के प्रमाण भी मिले हैं। इसी कारण एजेंसी ने सभी पड़ोसी देशों को तत्काल सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। संगठन ने सीमाओं पर स्वास्थ्य जांच बढ़ाने, हवाई अड्डों और मुख्य सड़कों पर स्क्रीनिंग करने तथा संदिग्ध मरीजों को तुरंत अलग रखने की सलाह दी है।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि जिन लोगों का सम्पर्क संक्रमित मरीजों से हुआ है या जिनमें संक्रमण के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय यात्रा नहीं करनी चाहिए। केवल मेडिकल इवैक्यूएशन यानी चिकित्सकीय आपात निकासी की स्थिति में ही यात्रा की अनुमति होनी चाहिए। संगठन ने यह भी निर्देश दिया कि संक्रमितों के सम्पर्क में आए लोगों की कम से कम 21 दिनों तक निगरानी की जाए क्योंकि इतने समय के भीतर बीमारी के लक्षण विकसित हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों, खून, पसीने, उल्टी, मल या संक्रमित वस्तुओं के सम्पर्क में आने से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसका शरीर वायरस फैला सकता है, इसलिए अंतिम संस्कार के दौरान भी विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है।
अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार इबोला के लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, उल्टी, दस्त और कई मामलों में आंतरिक रक्तस्राव शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की मौत हो सकती है।
स्वास्थ्य एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि डीआरसी के कई प्रभावित क्षेत्र घने जंगलों और संघर्षग्रस्त इलाकों में स्थित हैं जहां स्वास्थ्य सेवाएं पहले से कमजोर हैं। कई क्षेत्रों में हिंसा और अस्थिरता के कारण मेडिकल टीमों को काम करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि प्रभावित देशों को तुरंत आर्थिक और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। एजेंसी का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर संक्रमण को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह संकट पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी मानवीय आपदा में बदल सकता है।