महज एक वर्ष के भीतर उत्तराखण्ड के विभिन्न जिलों में दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म और यौन शोषण की घटनाओं की लम्बी श्रृंखला ने राज्य को झकझोर दिया है। हालिया घटित चम्पावत प्रकरण ने न केवल जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं बल्कि यह भी दिखाया है कि महिला सुरक्षा के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ी खाई मौजूद है
चम्पावत जनपद के सल्ली क्षेत्र में हथियारों के बल पर 16 वर्षीय छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तल्लादेश के भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष पूरन सिंह रावत समेत तीन लोगों पर नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप बीते दिनों खासी चर्चा में रहा। भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष पूरन सिंह रावत समेत तीन लोगों पर नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता के पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने पाॅक्सो समेत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। घटनास्थल पर जाकर फाॅरेंसिक टीम ने साक्ष्य संकलन भी किए थे। स्थानीय लोगों और पुलिस की खोजबीन के बाद तड़के करीब 4 बजे उनकी बेटी सल्ली क्षेत्र की डेयरी के पास एक कमरे में नग्न अवस्था में बंधी हुई मिली। पूछताछ में उनकी बेटी ने बताया सल्ली क्षेत्र के तीन लोगों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। आरोपियों ने हथियार चाकू और बसुला उनकी बेटी के गले पर रख कर जबरन शारीरिक सम्बंध बनाए।
इसके बाद तीनों आरोपियों ने उनकी बेटी को रस्सी से बांध कर नग्न अवस्था में कमरे में ताला लगा कर बंद कर दिया और मौके से फरार हो गए। पुलिस ने तहरीर के आधार पर तल्लादेश क्षेत्र से भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष पूरन सिंह रावत, विनोद सिंह रावत और नवीन सिंह रावत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 70 (2) (दुष्कर्म), 127(2), 351(2) और पाॅक्सो एक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी लेकिन अगले ही दिन चम्पावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने एक नया खुलासा करते हुए कहा कि गैंगरेप की घटना घटी ही नहीं बल्कि सब एक षड्यंत्र के तहत साजिश रची गई थी। पीड़िता के कथित बयान के आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंच गई कि गैंगरेप जैसी कोई घटना नहीं हुई। इस कथित षड्यंत्र के लिए पूर्व बीडीसी सदस्य कमल रावत, उसकी महिला मित्र अंजली राॅय और युवक कांग्रेस के नेता आनन्द सिंह रावत के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। पहले कथित पीड़िता के पिता ने बेटी के साथ कथित ब्लात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन घटना के कुछ दिनों बाद उन्होंने ही कमल रावत, आनन्द सिंह रावत और अंजलि राय के खिलाफ एक नई तहरीर षड्यंत्र रचने के सम्बन्ध में दर्ज करा मामले को उलझा दिया है।
16 वर्षीय दुष्कर्म मामले की जांच पर उठे गम्भीर सवाल
एक 16 वर्षीय नाबालिग से कथित दुष्कर्म मामले की जांच प्रक्रिया को लेकर गम्भीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में आरोप लगाए जा रहे हैं कि पुलिस और जांच एजेंसियों द्वारा कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता और जांच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
स्थानीय लोगों और पीड़ित पक्ष से जुड़े लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर कथित घटना हुई, तत्काल सील नहीं किया गया था। इतना ही नहीं जिस बिस्तर या स्थान पर घटना होने का दावा किया गया, उसे भी विधिवत जब्त और सुरक्षित नहीं किया गया। आरोप है कि साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया के दौरान किसी स्वतंत्र व्यक्ति की
मौजूदगी में वीडियोग्राफी भी नहीं कराई गई।
मामले में यह भी कहा जा रहा है कि यदि समय रहते घटनास्थल को सुरक्षित किया जाता और वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र किए जाते तो जांच अधिक पारदर्शी और मजबूत हो सकती थी। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि मामले की जांच निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए और पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय निगरानी हो।
गौरतलब है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों पर साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने की विशेष जिम्मेदारी होती है। फाॅरेंसिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल निरीक्षण और जब्ती प्रक्रिया ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि अभी तक जांच एजेंसियों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच चम्पावत की चर्चित जिला पंचायत सीट को लेकर अदालत के हालिया फैसले ने राजनीतिक माहौल भी गर्मा दिया है। अदालत द्वारा सम्बंधित सीट का चुनाव निरस्त किए जाने के बाद अब इस पूरे घटनाक्रम को कमल रावत से जुड़े पुराने विवादों और कथित राजनीतिक संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है।
कमल रावत समर्थकों का आरोप है कि जिला पंचायत चुनाव के दौरान उनके साथ ‘वोट चोरी’ और राजनीतिक दबाव जैसी घटनाएं हुई थीं। उनका कहना है कि अब अदालत के फैसले के बाद उन आशंकाओं को बल मिला है, जिनमें चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे थे। चर्चित कथित रेप षड्यंत्र मामले में भी कमल रावत की गिरफ्तारी को लेकर नाना प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप का दौर अपने चरम पर हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर देख रहे हैं जबकि विरोधी पक्ष इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है।
‘दि संडे पोस्ट’ ने बीते सवा साल के दौरान राज्य में हुए महिला अपराधों की जानकारी निकाली तो बेहद भयावह स्थिति सामने आई है। एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 2025 में राज्य में कुल 4,337 प्रमुख अपराध दर्ज हुए जिनमें लगभग 1,205 मामले महिलाओं से जुड़े अपराधों के हैं। यानी कुल अपराधों का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के खिलाफ अपराधों का रहा।
सबसे चर्चित मामला देहरादून स्थित आईएसबीटी बस अड्डे का गैंगरेप केस है। जिसमें एक नाबालिग लड़की के साथ बस के भीतर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इस गैंगरेप ने 2012 में दिल्ली बस में हुए निर्भया कांड के घाव ताजा कर दिए। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और एसआईटी जांच भी बिठाई गई। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर जिले में एक किशोरी के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या का सनसनीखेज मामला भी सामने आया। भाजपा की एक नेत्री ने तो अपनी नाबालिग बेटी के साथ अपने ही प्रेमी से दुष्कर्म कराकर मानवता को शर्मशार करने का काम किया। गत वर्ष अप्रैल माह तो महिलाओं के लिए काला माह साबित हुआ। 2025 के अप्रैल माह में एक ही महीने में 12 बलात्कार की घटनाओं को अंजाम दिया गया।
उत्तराखण्ड की महज सवा साल (2025-26) की दुष्कर्म की घटनाओं को देखें तो पता चलता है कि यह अपराध अब घट नहीं रहा बल्कि बढ़ता ही जा रहा है। साल की शुरुआत में ही पहली घटना 3 जनवरी 2025 को अल्मोड़ा के देघाट क्षेत्र में घटी। जहां 20 साल के एक युवक ने महज 8 साल की बच्ची को अकेला पाकर उसे दुष्कर्म का शिकार बना डाला। यही नहीं बल्कि उसने पीड़िता को मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी दी। डरी-सहमी मासूम किसी तरह घर पहुंची और परिजनों को सारी बात बताई, जिसे सुनकर उनके होश उड़ गए। वे लोग फौरन पुलिस स्टेशन पहुंचे और तहरीर देकर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराई।
5 जनवरी 2025 : हरिद्वार की ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र में भी दो नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म का मामला सामने आया था। दोनों लड़कियां डांस सीखने जाती थीं। डांस सिखाने वाले आरोपी आशीष सिंह उर्फ आशु ने उनके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने उन्हें मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी भी दी। परिजनों की तहरीर पर उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया और गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया गया।
7 फरवरी 2025 : देहरादून में मुस्लिम पुरुष के साथ रह रही एक हिंदू महिला ने पटेल नगर थाने में तहरीर देकर अपने ‘लिव इन रिलेशन’ में रहने वाले वजाहत खान और उसके सहयोगियों के खिलाफ, दुष्कर्म करने, शारीरिक शोषण करने, नाबालिग बेटी के साथ अश्लील हरकत करने का आरोप लगाया। आरोपी वजाहत खान पूर्व में ही विवाहित था और दो बच्चों का बाप भी है। पीड़िता ने अपनी तहरीर में बताया कि 2012 में उसकी मुलाकात आरोपी से हुई और प्रेमजाल में फांस कर उसने सम्बंध बना लिए जिस कारण वो गर्भवती हो गई। इस घटना के बाद पीड़िता के परिजनों ने उससे सम्बंध तोड़ लिए और वो अलग से वजाहत खान के साथ रहने लगी। आरोपी उससे लगातार शादी का झांसा देता रहा 2015 में उससे एक बच्ची हो गई तभी उसे पता चला कि आरोपी पहले से शादी शुदा है। पीड़िता की तहरीर पर आरोपी पर दुष्कर्म करने, अप्राकृतिक यौन शोषण करने जैसे गम्भीर आरोप दर्ज कराए गए।
मार्च 2025 : खटीमा क्षेत्र में एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया। पुलिस के अनुसार युवती को नशीला पदार्थ देकर सुनसान क्षेत्र में ले जाया गया और उसके साथ गैंगरेप किया गया। मामले में एक महिला सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान डीएनए परीक्षण कराया गया और पुलिस ने कई डिजिटल तथाफाॅरेंसिक साक्ष्य जुटाए। इस मामले ने पूरे जिले में महिला सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी।
मई 2025 : रूद्रपुर क्षेत्र में पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म का मामला सामने आया। पुलिस के अनुसार आरोपी पड़ोस में रहने वाला व्यक्ति था जिसने बच्ची को अकेला पाकर अपराध किया। बच्ची की हालत गम्भीर होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामले में पास्को एक्ट और गम्भीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया। स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाई गई। यह मामला इसलिए भी गम्भीर माना गया क्योंकि पीड़िता बहुत कम उम्र की थी।
2 जून 2025 : देहरादून में एक स्कूल के केयरटेकर द्वारा नाबालिग दिव्यांग छात्राओं का यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया। दो नाबालिग छात्राओं की मां ने केयर टेकर पर यौन उत्पीड़न और मारपीट करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने आरोप में केयरटेकर को गिरफ्तार कर लिया।
5 जून 2025 : धर्मनगरी हरिद्वार से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई। यहां एक मां पर अपनी ही 13 साल की बेटी का यौन शोषण करवाने का आरोप लगा। महिला ने अपने बॉयफ्रेंड और उसके दोस्तों से यह घिनौना काम करवाया। महिला भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुकी है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए महिला और उसके एक दोस्त सुमित पटवाल को गिरफ्तार कर लिया।
24 अगस्त 2025 : लैंसडाउन में एक शर्मनाक घटना हुई। दिल्ली से घूमने आई एक युवती के साथ बलात्कार हुआ। युवती के मंगेतर के मौसेरे भाई ने ही इस घिनौनी हरकत को अंजाम दिया। दिल्ली के मयूर विहार का एक युवक अपनी मंगेतर, मामा और दो मौसेरे भाइयों के साथ लैंसडाउन घूमने गया था। वे सभी जयहरीखाल के एक होटल में रुके थे। रात को 9 बजे सब लोग खान-खाने रेस्टोरेंट में जा रहे थे। युवती वाॅशरूम जाने के लिए कमरे में रूक गई। इसी दौरान युवक के मौसेरे भाई हर्षवर्धन उर्फ अनुज ने मौका पाकर कमरे में बंद कर युवती के साथ रेप किया।
सितम्बर 2025 : जसपुर क्षेत्र के अमियावाला गांव में एक 14 वर्षीय छात्रा का शव गन्ने के खेत में मिला। पुलिस जांच के अनुसार आरोपी ने पहले छात्रा के साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी। शव पर कई चोटों के निशान पाए गए। हालांकि पुलिस ने 20 वर्षीय आरोपी को 12 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने का दावा किया। आरोपी के पास से खून से सना ब्लेड और कपड़े बरामद किए गए। इस घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश फैल गया और लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया था।
अक्टूबर 2025 : काशीपुर क्षेत्र में 15 वर्षीय मानसिक रूप से कमजोर एक किशोरी के अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का मामला सामने आया। आरोपी किशोरी को कई स्थानों पर ले गए और लगातार उसका यौन शोषण किया। बाद में पहचान उजागर होने के डर से उसकी हत्या कर शव खेत में फेंक दिया गया। इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया। जिनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं।
29 अक्टूबर 2025 : नैनीताल जिले के रामनगर कोतवाली क्षेत्र में नाबालिग छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया। आरोप है कि आरोपियों ने नशीला पदार्थ खिलाकर नाबालिग छात्रा के साथ गैंगरेप किया। साथ ही आरोपियों ने पीड़िता का अश्लील वीडियो भी बनाया था। इस वीडियो के सामने आने के बाद ही इस मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज करते हुए एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।
5 नवम्बर 2025 : एक नेशनल हॉकी कोच पर पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि उसने 2025 के नेशनल गेम्स के लिए चयन हेतु आयोजित हाॅकी कैंप में शामिल एक नाबालिग खिलाड़ी के साथ रेप किया। शिकायत पीड़िता के पिता ने दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें असिस्टेंट हॉकी कोच का फोन आया, जिसने उन्हें बताया कि उनकी बेटी, जो नेशनल गेम्स के लिए चयन हेतु आयोजित हॉकी कैंप में शामिल थी, के साथ आरोपी ने रेप किया। आरोप लगाया गया कि जब शिकायतकर्ता और परिवार के सदस्य हाॅस्टल पहुंचे तो पुलिस पहले से ही वहां मौजूद थी।
2 मार्च 2026 : हरिद्वार में एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया जहां अपने पति से मिलने आई एक महिला के साथ होटल में सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई। इस मामले में होटल मैनेजर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पीड़िता बिजनौर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली थी और उसके पति हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र स्थित एक फैक्ट्री में कार्यरत हैं। महिला अपने पति से मिलने हरिद्वार पहुंची थी। बस अड्डे के निकट एक ऑटो चालक ने मदद के बहाने उसे अपने वाहन में बैठाया और कुछ दूरी पर ले जाकर एक कार में सवार कर दिया। कार चालक ने उसे शिवमूर्ति गली स्थित एक होटल में ले जाकर कमरे में पहुंचाया। इसके बाद ऑटो चालक भी वहां पहुंच गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि होटल में ले जाकर तीनों आरोपियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। किसी तरह जान बचाकर महिला शहर कोतवाली थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई।
8 मार्च 2026 : रूद्रपुर के खेड़ा इलाके में नौ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया। घटना उस समय हुई जब बच्ची अपनी मां और भाई-बहनों के साथ कमरे में सो रही थी। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाला युवक देर रात कमरे में घुसा और मासूम के साथ दुष्कर्म किया।
15 मार्च 2026 : देहरादून जिले में 14 साल की लड़की के साथ हुए गैंगरेप के मामले में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया और दो नाबालिग लड़कों को हिरासत में लिया। लड़की के साथ यह अपराध हरिद्वार बाईपास के पास एक जंगल वाले इलाके में हुआ था। पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। बताया गया कि रफी उर्फ सोनू (19) ने दो नाबालिग लड़कों के साथ मिलकर लड़की को बहला-फुसलाकर हरिद्वार बाईपास के पास जंगल वाले इलाके में ले जाकर उसे नशीला पदार्थ खिलाकर उसका गैंगरेप किया।
महीना एक और बलात्कार 12
1 अप्रैल 2025 : देहरादून पुलिस ने एक नाबालिक लड़की और उसकी सहेली का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया।
1 अप्रैल 2025 : थाना सहसपुर क्षेत्र (विकासनगर, देहरादून) में दो बहनों के साथ मारपीट कर जंगल में ले जाकर दुष्कर्म का मामला सामने आया।
4 अप्रैल 2025 : बसंत विहार देहरादून की पुलिस ने युवती के साथ बलात्कार कर उसकी फोटो और वीडियो बनाने की शिकायत दर्ज की। पुलिस ने आरोपी को उत्तर प्रदेश के रामपुर से गिरफ्तार किया।
6 अप्रैल 2025 : पटेल नगर देहरादून कोतवाली में दर्ज शिकायत के अनुसार एक नाबालिक बच्ची को पहले बहला-फुसला कर आरोपी अपने साथ ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने आरोपी को रुड़की से गिरफ्तार किया।
9 अप्रैल 2025 : विकासनगर, चकराता के एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक पर मामला दर्ज किया गया कि उसने बगीचे में काम करने आई गांव की ही युवती से दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं आरोप है कि शिक्षक पीड़िता के परिवार पर समझौते का दबाव बनाने लगा तो युवती ने जहरीला पदार्थ निगल लिया था। 9 अप्रैल 2025 को ही रुद्रप्रयाग में नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ की और जब बच्ची का भाई उसे बचाने गया तो आरोपियों ने उसके कान काट दिए।
21 अप्रैल 2025 : अल्मोड़ा के लमगड़ा क्षेत्र में नाबालिक लड़की के साथ उसके ही गांव के लड़के ने दुष्कर्म किया। पुलिस ने पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
22 अप्रैल 2025 : किच्छा के एक होटल में डांस प्रतियोगिता में शामिल कराने के बहाने एक 7 वीं कक्षा की बच्ची के साथ तमंचा और चाकू दिखाकर गैंगरेप किया गया।
23 अप्रैल 2025 : काशीपुर में कुंडा थाना क्षेत्र में 70 साल की मूक-बधिर महिला के साथ एक युवक पर बलात्कार का मामला दर्ज हुआ।
26 अप्रैल 2025 : काशीपुर में आईटीआई थाना क्षेत्र में एक मुक-बधिर बच्ची के साथ दुष्कर्म के प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ।
28 अप्रैल 2025 : चमोली में नाबालिक लड़की के पेट में दर्द होने पर रेप का खुलासा हुआ। डाॅक्टर ने कहा कि नाबालिक लड़की 6 माह की गर्भवती है।
30 अप्रैल 2025 : नैनीताल में एक लगभग 70 वर्षीय व्यक्ति ने नाबालिग लड़की से किया बलात्कार। आरोपी गिरफ्तार, शहर में उपद्रव हुआ।
वर्षवार रेप के मामले
2020 – 570
2021 – 741
2022 – 857
2023 – 635
2024 – 822
2025 – 1120
2026 – 587
2025 में शीर्ष 5 जिलों में रेप
देहरादून – 212
हरिद्वार – 168
ऊधमसिंह नगर – 153
नैनीताल – 128
पौड़ी गढ़वाल – 96
बात अपनी-अपनी
आप ऐसे जितने भी केस देखेंगे उनमें अधिकतर पति-पत्नी के होते हैं। आयोग में ऐसे मामले रोजाना आते हैं जिनमें अधिकतर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के होते हैं। यह सब सोशल मीडिया के अधिक प्रचलन के कारण हो रहा है। सोशल मीडिया पर खासकर महिलाएं किसी भी अनजान व्यक्ति से जुड़ जाती हंै और दोस्ती कर लेती हैं लेकिन उन्हें पता नहीं होता कि यह दोस्त नहीं दुश्मन भी हो सकता है। इसका उन्हें बाद में एहसास होता है जब वह सोशल मीडिया वाला दोस्त उनके साथ दगा कर जाता है। महिलाएं ऐसे लोगों के चंगुल में ज्यादा फंस रही हैं जिससे हमारे प्रदेश में आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं कि सुनकर यकीन नहीं होता। दूसरे प्रदेश में बैठा आदमी कब महिलाओं से जुड़ जाता है और उन्हें भ्रमित कर उनके साथ अनैतिक सम्बंध बना लेता है। इसके बाद जब सम्बंध टूटते हैं तो हमारे पास मामले आते हैं। इसमें सबसे बड़ी कमी घरवालों की होती है जो सोशल मीडिया चलाने वालों पर निगरानी नहीं रखते। इसके अलावा एक दूसरा मामला आजकल ज्यादा चर्चा में है कि पैरेंट्स अपने बच्चों को देहरादून या अन्य कहीं पढ़ने भेज देते हैं लेकिन उसके बाद यह नहीं देखते कि वह क्या कर रहा है और किसके साथ रह रहा है। अधिकतर बच्चे लिव इन में रहते हैं। घर वालों को तो इसका तब पता चलता है जब कोई घटना घट जाती है या मामला दर्ज होता है। हमारी सरकार ने लिव इन रिलेशन में जो रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कराया है वह इसलिए ही कराया है कि इस पर रोक लग सके या बच्चों के परिजनों को यह पता लग सके कि वह किसके साथ सम्बंधों में जुड़ रहा है। पहले जब रजिस्ट्रेशन नहीं होते थे तो लिव इन में रहने वाले बच्चे बाद में एक-दूसरे के साथ गम्भीर अपराध तक कर डालते थे और यह तक पता नहीं चलता था कि अपराध करने वाला कौन था? कहां का था? लेकिन अब इस मामले में ट्रांसपेरेंसी आई है। साथ ही ऐसे मामलों में कमी भी आ रही है।
कुसुम कंडवाल, अध्यक्ष, महिला आयोग उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। जिस राज्य को देवभूमि कहा जाता है, वहां लगातार दुष्कर्म और गैंगरेप जैसी घटनाओं का सामने आना कानून-व्यवस्था पर गम्भीर सवाल खड़े करता है। सबसे हैरानी की बात यह है कि ऐसी घटनाएं अब स्वयं मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में हो रही हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अपराधियों के मन में कानून का कोई भय नहीं रह गया है। दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि महिला अपराधों के अनेक मामलों में सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों पर उंगलियां उठती रही हैं। जैसे चम्पावत और सल्ट से भाजपा के मंडल अध्यक्षों पर नाबालिगों के साथ उत्पीड़न के आरोप, भाजपा के वरिष्ठ नेता और लाल कुआं के दुग्ध संघ अध्यक्ष मुकेश बोरा पर यौन उत्पीड़न के मामले में प्राथमिकी का दर्ज होना, हरिद्वार बहादराबाद से भाजपा के ओबीसी प्रकोष्ठ के सदस्य आदित्य राज सैनी पर 13 वर्षीय बच्ची के साथ गैंगरेप और उसकी निर्मम हत्या का मुकदमा, रुद्रपुर वार्ड नम्बर 6 के पार्षद शिवकुमार गंगवार द्वारा होली के दिन दो महिलाओं का उत्पीड़न, हरिद्वार की भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व जिला अध्यक्ष अनामिका शर्मा ने कि अपनी खुद की 13 साल की नाबालिक बच्ची को देह व्यापार में धकेलने का कुकृत्य किया। ऐसे अनेक मामले हैं जिनमें सत्ता रूढ़ दल के लोग ही महिला दुष्कर्म जैसे घृणित अपराधों में संलिप्त पाए गए हैं। इससे जनता के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो रही है। भाजपा सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बन रही है कि बार-बार सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों के नाम विवादों में सामने आते हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड आज भी प्रदेश की जनता के मन में एक बड़ा सवाल बना हुआ है। उत्तराखण्ड की बेटी अंकिता को आज तक पूर्ण न्याय नहीं मिल पाया है। जिस तथाकथित ‘वीआईपी’ का जिक्र पूरे मामले में हुआ, उसकी पहचान आज तक सार्वजनिक नहीं हो सकी। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि आखिर उस वीआईपी को बचाने की कोशिश किसके इशारे पर की गई और उसे लेकर सरकार की चुप्पी क्यों बनी हुई है? भाजपा के कई प्रभावशाली नेताओं पर समय-समय पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं लेकिन जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उसकी प्रगति को लेकर पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है। अंकिता भंडारी प्रकरण में सीबीआई जांच की स्थिति क्या है, जांच कहां तक पहुंची है और दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में क्या प्रगति हुई है, इसका जवाब सरकार को प्रदेश की जनता को देना चाहिए। भाजपा सरकार महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत उन दावों की पोल खोल रही है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और सरकार की निष्क्रियता प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गम्भीर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
गरिमा मेहरा दसौनी, मुख्य प्रवक्ता, उत्तराखण्ड कांग्रेस
देवभूमि में जघन्य अपराधों के लिए कोई जगह नहीं है। सत्ताधारी लोग ही खुद ऐसे अपराधों में शामिल हैं जिससे प्रदेश का माहौल खराब हो रहा है। सत्ताधारी लोगों के ऐसे अपराधों में शामिल होने से ही प्रदेश में अपराधों में बाढ़ आई है। ऐसे लोगों के खिलाफ भी सत्ताधारी पार्टी को कार्रवाई करनी चाहिए। जिससे देवभूमि की सुचिता बनी रहे। अन्यथा देवभूमि को नरक भूमि बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।
काशी सिंह ऐरी, केंद्रीय अध्यक्ष, यूकेडी
अंकिता भंडारी हत्याकांड से उबरा नहीं है उत्तराखण्ड