नानकमत्ता विधानसभा का उदय 2008 के परिसीमन के तहत हुआ। पहले यह सीट खटीमा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हुआ करती थी। यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है और ऊधमसिंह नगर जिले की महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है। इस विधानसभा में अब तक भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य राजनीतिक मुकाबला रहा है। यहां पहली बार 2012 में चुनाव हुए जिसमें भाजपा के प्रेम सिंह राणा ने बाजी मारी। 2017 में एक बार फिर उन पर क्षेत्र की जनता ने विश्वास जताया। इस तरह लगातार दो बार उन्होंने इस सीट का प्रतिनिधित्व कर क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाया। हालांकि जितनी उम्मीद उनसे थी उस पर वह खरे नहीं उतरे। यही वजह है कि आज इस विधानसभा क्षेत्र में समस्याओं का अम्बार लगा है। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के गोपाल सिंह राणा ने विजय प्राप्त की। कृषि प्रधान इस क्षेत्र में आज भी सिंचाई, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं चुनावी राजनीति के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
‘दि संडे पोस्ट’ ने नानकमत्ता विधानसभा के खमरिया, बिडरिया, बड़खेड़ा, दीननगर, आमखेड़ा, ड्यूडी-मटिया, बिष्टी, सिसईखेड़ा, करघटा, दोहरी-दोहरा, लामाखेड़ा, मगरसराह, औदली, बरौनी, सरोंजा, टुकड़ी, बिचई, बिचुवा, कैथुडियां, बर्किदाड़ी, नगला, ध्यानपुर, मिलक, किशनपुर, सुनखरी, एचटा, देवीपुरा, गिद्धौर, झंकड़ सहित विभिन्न गांवों में जाकर जनसमस्याओं को देखा। क्षेत्र के किसानों, महिलाओं, युवाओं, व्यापारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बातचीत की गई।
विश्वविख्यात गुरुद्वारे से मिली पहचान
नानकमत्ता विधानसभा की पहचान केवल कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में ही नहीं बल्कि विश्वविख्यात गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब के कारण देश और विदेश में भी है। गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब सिखों के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। मान्यता है कि 1514-1515 ईस्वी में सिख धर्म के संस्थापक, गुरु नानक देव जी, अपनी तीसरी ‘उदासी’ (धार्मिक यात्रा) के दौरान कैलाश पर्वत जाते समय यहां आए थे। गुरु नानक देव जी के आगमन से पहले इस जगह को सिद्ध-योगियों का केंद्र माना जाता था और इसका नाम गोरख मत्ता (गुरु गोरखनाथ के नाम पर) था। गुरु जी के आध्यात्मिक प्रभाव के बाद इसका नाम बदलकर नानकमत्ता रखा गया। यहां छठे सिख गुरु, गुरु हरगोविंद महाराज जी के भी चरण पड़े थे। यहां एक ऐतिहासिक पीपल का पेड़ है जिसे ‘पंजे का साहिब’ कहा जाता है। मान्यता है कि गुरुजी के चमत्कार से एक सूखा पीपल का पेड़ फिर से हरा-भरा हो गया था। सिख धर्म के प्रमुख एवं ऐतिहासिक गुरुद्वारों में शामिल यह पवित्र स्थल वर्षभर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है। उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों और कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, आॅस्ट्रेलिया सहित कई देशों से भी श्रद्धालु यहां मत्था टेकने और दर्शन करने पहुंचते हैं। गुरुपर्वों और विशेष धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। धार्मिक पर्यटन के कारण स्थानीय व्यापार, होटल, ढाबे, परिवहन, छोटे दुकानदारों और अन्य व्यवसायों को भी प्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ मिलता है। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्तर पर नानकमत्ता की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान है, उस अनुपात में यहां पर्यटन सुविधाओं, यातायात व्यवस्था, पार्किंग, सौंदर्यीकरण और अन्य आधारभूत सुविधाओं का अभी और विस्तार किए जाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए तो इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सुनखरी में डिग्री कॉलेज का निर्माण कार्य जारी है। विद्युत सब सेंटर का निर्माण भी चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे भविष्य में बिजली व्यवस्था बेहतर होगी। पिछले कई वर्षों से जर्जर पड़ी कई सड़कें भी अब बनती दिखाई दे रही हैं। कई स्थानीयों और ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र लम्बे समय तक विकास से वंचित रहा। उनके अनुसार विधायक गोपाल सिंह राणा ने अपने स्तर पर प्रयास किए हैं जिसके परिणामस्वरूप डिग्री काॅलेज और विद्युत सब सेंटर जैसे कार्य शुरू हुए हैं। उनका कहना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहले यह इलाका काफी पिछड़ा था और पिछले लगभग दो दशकों में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया था।
स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे
पूरे क्षेत्र के लिए केवल एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और ईसीजी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। केवल सामान्य जांच और सीमित उपचार की सुविधा है। ऑपरेशन थिएटर तो बना हुआ है लेकिन संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण पूरी तरह संचालित नहीं हो पा रहा। अस्पताल में वर्तमान में चार चिकित्सक कार्यरत हैं। इनमें आयुष चिकित्सक, एमबीबीएस चिकित्सक तथा अन्य डॉक्टर शामिल हैं। बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक और हड्डी रोग विशेषज्ञ की सुविधा उपलब्ध नहीं है। गर्भवती महिलाओं के लिए स्थायी गायनाकोलॉजिस्ट भी नहीं है। सामान्य प्रसव स्टाफ नर्सों द्वारा कराया जाता है जबकि गंभीर मामलों में मरीजों को खटीमा या सितारगंज रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में एक फार्मासिस्ट, दो वार्ड बाॅय, तीन स्टाफ नर्स और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत हैं। भवन में बरसात के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या भी बनी हुई है। अस्पताल में कुल 10 बेड हैं और प्रतिदिन लगभग 70 से 80 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल के प्रभारी डॉ. सचिन ने बताया कि उनकी तैनाती यहां लगभग डेढ़ वर्ष पहले हुई थी। वर्तमान में अस्पताल में चार डाॅक्टर कार्यरत हैं, जिनमें आयुष और डेंटल चिकित्सक भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि शासन स्तर से एक एलएमओ और एक वरिष्ठ चिकित्सक का तबादला नानकमत्ता के लिए किया गया है और उनके जल्द कार्यभार ग्रहण करने की उम्मीद है। उनके अनुसार अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के अनुसार इमरजेंसी सेवाएं और सामान्य प्रसव कराए जाते हैं जबकि गायनाकोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण ऑपरेशन वाले मरीजों को खटीमा और सितारगंज रेफर किया जाता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और ईसीजी मशीनों की कमी को लेकर जनप्रतिनिधियों और शासन को प्रस्ताव भेजा गया है तथा आश्वासन मिला है कि जल्द इन सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। भवन की छत से बरसात में होने वाले लीकेज और मरम्मत के लिए भी लिखित प्रस्ताव भेजा गया था, जिस पर जिला स्तर से बजट स्वीकृत हो चुका है और जल्द कार्य शुरू होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि मशीनों के साथ उन्हें संचालित करने के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटरों की भी आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल की आवश्यकताओं से समय-समय पर जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया जाता है और उनकी ओर से मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया गया है।
शिक्षा के लिए जंगल पार करने की मजबूरी
नानकमत्ता विधानसभा के देवीपुरा, गिद्धौर और एचटा गांव के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए लगभग 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। उनके रास्ते में तीन से चार किलोमीटर घना जंगल पड़ता है जहां रोजाना छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों का आना-जाना होता है। ग्रामीणों के अनुसार उनके आवागमन में जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है जबकि दो से तीन किलोमीटर कच्चा रास्ता बरसात के दौरान पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है जिससे बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। कई वर्षों से इन गांवों की हालत जस की तस है। किसी भी जनप्रतिनिधि ने इन गांवों की ओर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा है जबकि दोनों ही पूर्व विधायक प्रेम सिंह राणा और वर्तमान विधायक गोपाल सिंह राणा इन गांवों की परिस्थिति से अवगत हैं।
किसानों के लिए सिंचाई सबसे बड़ी चुनौती
नानकमत्ता विधानसभा की अधिकांश आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है लेकिन किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की है। किसानों ने बताया कि क्षेत्र में सरकारी सिंचाई की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। अधिकांश किसान निजी नलकूपों के सहारे खेतों की सिंचाई करते हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि सरकारी ट्यूबवेल या नहरों की व्यवस्था होती तो खेती करना काफी आसान हो जाता। साथ ही हर बरसात में बाढ़ का संकट बना रहता है। देवा नदी और कैलाश नदी के बीच बसे इस विधानसभा क्षेत्र के कई गांव हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। अधिक बारिश होने पर दोनों नदियों का पानी गांवों और खेतों में घुस जाता है। इससे फसलें बर्बाद होती हैं और कई स्थानों पर कृषि भूमि का कटाव भी होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ध्यानपुर जैसे गांवों में भारी बारिश के दौरान देवा नदी का पानी सड़कों तक पहुंच जाता है, जिससे गांव का सम्पर्क बाहरी क्षेत्रों से कट जाता है। ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान विधायक द्वारा एक-दो वर्ष पहले नदियों के किनारे पिचिंग कराई गई थी लेकिन उससे स्थायी राहत नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि वन क्षेत्र और नदी क्षेत्र होने के कारण इस इलाके के लिए विशेष बजट और स्थायी बाढ़ सुरक्षा योजना की आवश्यकता है। नगला निवासी डाॅ. कुलवंत सिंह का कहना है कि बरसात के दिनों में क्षेत्र में आने वाली बाढ़ किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है। नदियों का पानी खेतों का कटाव कर देता है, जिससे फसलों को भारी नुकसान होता है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि किसानों को समय पर डीएपी और यूरिया जैसी खाद भी कई बार उपलब्ध नहीं हो पाती, जिससे अच्छी पैदावार प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि विधायक द्वारा कुछ स्थानों पर पिचिंग कराई गई है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। यदि मुख्यमंत्री स्तर से विशेष बजट उपलब्ध कराया जाए तो पूरी पिचिंग कराकर स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
नगर पंचायत क्षेत्र में भी बदहाल सड़कें
मुख्य मार्गों पर कुछ सुधार जरूर दिखाई देता है लेकिन जैसे ही बिजली काॅलोनी और दहला क्षेत्र की ओर बढ़ते हैं, सड़कें पूरी तरह जर्जर नजर आती हैं। मुख्य सड़क से लगभग 300 मीटर अंदर स्थित इन क्षेत्रों में सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। अधिकांश गड्ढों में बरसात का पानी भरा मिला। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा क्षेत्र नगर पंचायत के अंतर्गत आता है। नगर पंचायत कार्यालय भी यहां से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद कार्यालय तक जाने वाली सड़क भी बदहाल है। कई स्थानों पर जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात का पानी लम्बे समय तक जमा रहता है। क्षेत्र में साफ-सफाई का भी अभाव देखने को मिला। दहला क्षेत्र निवासी ओम प्रकाश चैरसिया का कहना है कि पिछले लगभग दो वर्षों से सड़क की स्थिति बदहाल बनी हुई है। उनके अनुसार पूरी सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और बरसात के समय इन गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। उन्होंने बताया कि यही रास्ता उनके कार्यालय, बच्चों के स्कूल और स्थानीय लोगों के आवागमन का मुख्य मार्ग है। पैदल चलने वालों को भी काफी परेशानी होती है क्योंकि गाड़ियों के गुजरने पर गड्ढों में भरा पानी और कीचड़ उछलकर कपड़ों पर पड़ता है। कई बार स्कूल जाते समय बच्चों के कपड़े खराब हो जाते हैं और उन्हें वापस घर लौटना पड़ता है। उनका कहना है कि बिजली काॅलोनी और दहला क्षेत्र के लोग पिछले दो वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। विधायक और नगर पंचायत अध्यक्ष को कई बार इस सम्बंध में अवगत कराया गया लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनके अनुसार नानकमत्ता की मुख्य सड़क से लेकर हाईवे तक कई स्थानों पर यही स्थिति देखने को मिलती है जहां लगातार ट्रैफिक चलता है और सड़क पर गड्ढों में भरे पानी के कारण लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रोजगार के लिए सितारगंज सिडकुल पर निर्भर युवा
नानकमत्ता विधानसभा में खेती आज भी लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है लेकिन युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। अधिकांश युवाओं और स्थानीय लोगों ने बताया कि खेती के अलावा रोजगार के साधन लगभग न के बराबर हैं। परिणाम स्वरूप बड़ी संख्या में युवा रोजाना सितारगंज स्थित सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में नौकरी करने के लिए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विधानसभा क्षेत्र में छोटे उद्योग, कृषि आधारित इकाइयां या अन्य रोजगारपरक परियोजनाएं स्थापित की जाएं तो युवाओं का पलायन रुक सकता है और उन्हें अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिल सकेगा।
कई स्थानीय लोगों ने नबदिया, खमरिया, ध्यानपुर, बिचुवा और टुकड़ी क्षेत्र में अवैध खनन होने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि इन क्षेत्रों में लम्बे समय से खनन गतिविधियां चल रही हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार खनन में चलने वाले भारी और ओवरलोड वाहनों से लगातार धूल उड़ती रहती है, जिससे सांस सम्बंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। तेज रफ्तार और ओवर लोडेड वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस पर प्रभावी कार्रवाई की जाए तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है।
बस स्टेशन बना लेकिन बसें नहीं आतीं
नानकमत्ता बस स्टेशन की वीरान स्थिति भी क्षेत्र के विकास की तस्वीर बयां करती है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2000 में बस स्टेशन का संचालन शुरू हुआ था। इसके लिए गुरुद्वारे की ओर से लगभग पांच एकड़ भूमि सरकार को उपलब्ध कराई गई थी, ताकि क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके लेकिन बस स्टेशन खाली रहता है। दिनभर में केवल दो से तीन बसें ही स्टेशन के भीतर आती हैं जबकि अधिकांश बसें बाहर से ही निकल जाती हैं। यात्रियों को बस स्टेशन पर घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार बसें स्टेशन पर आए बिना ही आगे चली जाती हैं। बस स्टेशन का भवन भी जर्जर हो चुका है। रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से किसी भी सरकार या जनप्रतिनिधि ने इस बस स्टेशन को व्यवस्थित करने की दिशा में गम्भीर पहल नहीं की।
विधायक के प्रति जनता का नजरिया
स्थानीय विधायक गोपाल सिंह राणा को लेकर लोगों की राय मिली-जुली देखने को मिली। कई लोगों का कहना है कि लम्बे समय तक विकास से पिछड़े रहे नानकमत्ता में वर्तमान विधायक के कार्यकाल में सुनखरी में डिग्री काॅलेज का निर्माण, विद्युत सब सेंटर की स्थापना, कई जर्जर सड़कों का निर्माण तथा नदियों के किनारे पिचिंग जैसे कार्य शुरू हुए हैं, जिन्हें लोग सकारात्मक पहल मानते हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति, सिंचाई की समुचित व्यवस्था का अभाव, हर वर्ष आने वाली बाढ़, नगर पंचायत क्षेत्र की जर्जर सड़कें, जलभराव, बेरोजगारी और बस स्टेशन की बदहाल स्थिति जैसी कई मूलभूत समस्याएं अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी हैं। कुछ स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि विधायक के स्थानीय निवासी नहीं होने तथा राज्य में उनकी पार्टी की सरकार न होने के कारण कई विकास कार्यों और योजनाओं को अपेक्षित गति नहीं मिल पाई। हालांकि अन्य लोगों का मानना है कि विकास कार्य शुरू हुए हैं लेकिन विधानसभा की प्रमुख समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए अभी और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
बात अपनी-अपनी
मैं नानकमत्ता का 10 साल तक विधायक रहा। उस दौरान क्षेत्र की जितनी भी समस्याएं थीं, उनके समाधान और विकास के लिए हर सम्भव प्रयास किए। स्वास्थ्य की बात करें तो नानकमत्ता अस्पताल पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र था, जिसे हमने उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाया। उच्चीकरण के बाद सभी विभागों के डॉक्टर यहां उपलब्ध थे। कोविड काल में भी हमने यहां ऑक्सीजन प्लांट लगवाया था। उस समय पूरे ऊधमसिंह नगर जिले में सबसे पहला ऑक्सीजन प्लांट नानकमत्ता में ही स्थापित हुआ था। शिक्षा के क्षेत्र में नानकमत्ता में महाराणा प्रताप इंटर काॅलेज की स्थापना हुई। इसके अलावा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में नानकमत्ता विधानसभा में एकलव्य विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और पाॅलिटेक्निक काॅलेज की स्थापना हुई। क्षेत्र में एक बड़ा बस अड्डा भी बना। सड़कों की बात करें तो गांवों को जोड़ने के लिए पूरे विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में सड़कों का निर्माण कराया। आज उन सड़कों की हालत जर्जर हो चुकी है। ज्ञानपुर -गोड़ीवाला पुल का निर्माण भी मेरे ही कार्यकाल में स्वीकृत हुआ था और उसके मार्च तक पूरा होने की उम्मीद है। वर्तमान विधायक कहते हैं कि उनकी सरकार नहीं है, इसलिए काम नहीं हो पा रहा है। हम भी विपक्ष में रहे हैं लेकिन विपक्ष में रहते हुए भी अपने विवेक और प्रयासों से जितना सम्भव था, उतने विकास कार्य कराए।
प्रेम सिंह राणा, पूर्व विधायक, नानकमत्ता
नानकमत्ता में वर्ष 2018 में पहली बार नगर पंचायत चुनाव हुआ और मैं चेयरमैन बना। उस वक्त मैं कांग्रेस पार्टी में था। उसके बाद मैं बीजेपी में आ गया। 2025 के चुनाव में निर्विरोध चुना गया। हमारे यहां कांग्रेस का विधायक है इसलिए बहुत ज्यादा विकास वो नहीं कर पाए। पूर्व में प्रेम सिंह राणा जब विधायक थे तो उन्होंने काफी सड़कों का जाल बिछाकर बहुत अच्छा कार्य किया। जब से मैं चेयरमैन बना तो नानकमत्ता क्षेत्र में मैने 180 सड़कों का निर्माण कराया है और 236 शौचालय बनवाए हैं। लोगों को मैंने प्रधानमंत्री आवास और 180 पानी के कनेक्शन दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विकास को आगे बढ़ा रहे हैं। 25 करोड़ 67 लाख की लागत से जल निगम द्वारा 2 पानी की बड़ी टंकी लगाई गई हैं जिसमें 30 लाख लीटर पानी स्टोरेज रहेगा। 24 घंटे यहां टंकी में पानी उपलब्ध रहेगा। सड़कंे कहीं-कहीं काफी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसके लिए मैंने मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया है, उन्होंने पीडब्ल्यूडी को आदेश किए हैं। अभी हमारे यहां एक पार्क बनाया जा रहा है जिसमें 1 करोड़ की लागत से मुख्यमंत्री जी के सहयोग से कार्य सुचारू है। अभी हमने 2 करोड़ 27 लाख 16 हजार की एलईडी लाइटों से प्रकाश की व्यवस्था की है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने नानकमत्ता नगर में पानी की निकासी और सौंदर्यीकरण के लिए घोषणा की थी जिसमें अभी एक डीपीआर हमारे यहां से बन कर गई है जिसका काम सिंचाई विभाग द्वारा किया जाएगा। अभी 65 लाख तथा 10 करोड़ की डीपीआर और तैयार की जा रही है जिसमें नानकमत्ता नगर का सौंदर्यीकरण होगा। पानी की निकासी के लिए वर्तमान विधायक गोपाल सिंह राणा अपने स्तर से काम कर रहे हैं लेकिन विकास कार्यों की जो अपेक्षा उनसे थी उसमें वो अब तक
खरे नहीं उतरे।
प्रेम सिंह ट्यूनर, अध्यक्ष, नगर पंचायत, नानकमत्ता
नानकमत्ता विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक : गोपाल सिंह राणा (अवधि : 4 वर्ष)
क्र. क्षेत्र मुद्दा / जमीनी स्थिति अंक (10 में)
- जनसम्पर्क व क्षेत्रीय सक्रियता विधायक क्षेत्र में सक्रिय, कुछ महत्वपूर्ण विकास कार्य शुरू कराए 7/10
- स्वास्थ्य सेवाएं सीएचसी में विशेषज्ञ डाॅक्टर, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, ईसीजी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव 4/10
- शिक्षा सुनखरी में डिग्री काॅलेज निर्माणाधीन लेकिन कई गांवों के छात्रों को अब भी लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है 6/10
- सड़क व आधारभूत ढांचा कुछ सड़कें बनीं लेकिन नगर पंचायत और कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें अब भी जर्जर 5/10
- सिंचाई व बाढ़ प्रबंधन सिंचाई व्यवस्था कमजोर, हर वर्ष बाढ़ से फसल और गांव प्रभावित 3.5/10
- रोजगार व उद्योग स्थानीय रोजगार के अवसर सीमित, युवा सितारगंज सिडकुल पर निर्भर 4/10
- अवैध खनन व पर्यावरण खनन से धूल, सड़कें खराब और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा 4/10
- परिवहन व्यवस्था बस स्टेशन बना लेकिन बसों का संचालन बेहद सीमित, यात्रियों को परेशानी 3.5/10
- कृषि व किसान खाद की कमी, सिंचाई संकट और बाढ़ से किसानों को लगातार नुकसान 4/10
- समग्र विकास प्रदर्शन कुछ नई परियोजनाएं शुरू हुईं लेकिन मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान अभी बाकी 6/10
कुल अंक : 4.7/10 फाइनल ग्रेड : पास
‘हमारी सरकार होती तो विकास होता’
गोपाल सिंह राणा नानकमत्ता विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक हैं। इससे पहले 2002 और 2007 में वे आरक्षित सीट खटीमा से विधायक बने थे। 2012 और 2017 में वे नानकमत्ता में आए और कांग्रेस से चुनाव लड़े लेकिन अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा के प्रेम सिंह राणा से हार गए। 2022 में उनकी किस्मत का तारा चमका और उन्होंने प्रेम सिंह राणा को पराजित किया। उनकी पहचान एक जमीनी और सहज नेता के रूप में है जो क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उनके कार्यकाल में सुनखरी में राजकीय डिग्री काॅलेज, विद्युत सब स्टेशन और कुछ सड़क परियोजनाओं पर विकास कार्य शुरू हुए हैं। हालांकि स्वास्थ्य, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और रोजगार जैसी बुनियादी चुनौतियां अब भी क्षेत्र में निरंतर बनी हुई हैं। ‘दि संडे पोस्ट’ संवाददाता दिव्या भारती ने उनसे विधानसभा क्षेत्र की बाबत बातचीत की
नानकमत्ता विधानसभा में विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति को आप किस तरह देखते हैं?
हमलोग विपक्ष में हैं, सरकार हमारी नहीं है। नानकमत्ता क्षेत्र में विकास कराने की हमारी जो इच्छा थी वह भी अधूरी है, वह पूरी हो नहीं पा रही है लेकिन फिर भी हमने प्रयास किया है। सड़कों का यहां बहुत अभाव था, हमने कई सड़कें बनवाई हैं। पीडब्ल्यूडी के अलावा प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत भी सड़कें बनी हैं। पुल भी बनवाए गए हैं, विपक्ष का विधायक होने के बावजूद जितना हमारे से हो पाया है उतना विकास कराया है। नानकमत्ता विधानसभा क्षेत्र खटीमा से बिल्कुल लगा हुआ है जहां के हमारे मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री नानकमत्ता कई बार आते हैं फिर भी विकास कार्य नहीं हुए। कहा गया था कि हर विधानसभा में आईटीआई और
पाॅलिटेक्निक काॅलेज होगा लेकिन नानकमत्ता में न आईटीआई है और न ही पाॅलिटेक्निक। खटीमा विधानसभा क्षेत्र में जब नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे तब हमने वहां डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज का उच्चीकरण, अस्पताल, मुंसिफ कोर्ट, तहसील, दूध डेयरी सहित कई विकास कार्य कराए थे। मैं चाहता हूं कि नानकमत्ता में इससे भी बेहतर विकास हो लेकिन सरकार हमारी नहीं होने के कारण सारे विकास कार्य रुके हुए हैं। अगर सरकार हमारी होती तो नानकमत्ता भी आज बहुत विकसित होता।
आपके कार्यकाल में कौन-कौन से प्रमुख विकास कार्य हुए हैं?
यहां डिग्री कॉलेज टीन शेड में चल रहा था। उसके लिए जमीन की व्यवस्था कराई गई जिसमें भवन बन रहा है। यहां थारू विकास भवन की घोषणा हमारी पुरानी सरकार में हुई थी। भवन का निर्माण शुरू भी हो गया था लेकिन 2022 का चुनाव आते ही पैसा वापस चला गया। उसके बाद मैंने प्रयास करके किसी तरह एक करोड़ रुपए की व्यवस्था कराई। अब भवन बनकर तैयार है। फिलहाल उसमें 21 लाख रुपए और जारी कराने का प्रयास चल रहा है। एक डैम के पार रास्ता भी है। वहां का काम 2022 से पहले स्वीकृत हुआ था लेकिन पूर्व विधायक थे वो हार गए तो पैसा वापस चला गया और ये काम रुक गए। पुल बन रहा था वो भी रुक गया। हमारे पुराने विधायक की नाराजगी जनता को महंगी पड़ी। उन्होंने सारे विकास कार्य रुकवा दिए लेकिन फिर भी मैंने विभागीय मंत्री से कहकर प्रयास किया, फलस्वरूप आज पुल भी बन रहा है, थारू विकास भवन भी बन रहा है और डिग्री कॉलेज की बिल्डिंग भी बन रही है। यह मेरा सपना था कि मैं कुछ करूं।
बिजली व्यवस्था को लेकर आपने क्या प्रयास किए?
लामाखेड़ा और भरोनी में विद्युत आपूर्ति की बहुत दिक्कत है जहां मैंने विद्युत सब स्टेशन के लिए आवेदन किया है। किसानों को बिजली नहीं मिल पा रही थी और खेतों में पानी नहीं लग पा रहा था जिससे धान की फसल सूख रही थी। यूपीसीएल को प्रस्ताव भी भेजा गया लेकिन पता नहीं किन कारणों से उसे रोक दिया गया। इस कारण विद्युत सब स्टेशन भी नहीं बन पाया।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर विधानसभा में स्थिति संतोषजनक नहीं है?
हम चाहते हैं कि यहां चैमुखी विकास हो। शिक्षा के क्षेत्र में यहां बड़ी कमी है। क्योंकि मैं खटीमा में 10 साल विधायक रहा हूं और वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और सड़क सहित हर क्षेत्र में विकास कराया लेकिन सरकार हमारी नहीं है इसलिए जो हम चाहते थे वो नहीं हो पाया। पांच साल में एक भी हाई स्कूल का इंटर काॅलेज नहीं बना और न ही किसी विद्यालय का उच्चीकरण हुआ जबकि डैम के पार देवीपुरा और गिद्धौर गांव में हाई स्कूल है। मैंने विधानसभा में भी आवाज उठाई और शिक्षा मंत्री से भी कहा कि कम से कम उसका उच्चीकरण कर दिया जाए क्योंकि बच्चों को 7 से 8 किलोमीटर घने जंगल से होकर आना-जाना पड़ता है। वहां शेर, भालू, हाथी, चीते सहित कई जंगली जानवरों का खतरा रहता है लेकिन अभी तक केवल आश्वासन मिला, उच्चीकरण नहीं हुआ।
क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अब तक लचर है?
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ा बुरा हाल है। नानकमत्ता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं हैं। मरीजों को खटीमा उप जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। यह मुद्दा मैंने विधानसभा में उठाया और सरकार से पूछा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए डॉक्टरों के क्या मानक हैं, यहां मानकों के अनुसार डॉक्टर, नर्स और स्टाफ क्यों नहीं हैं लेकिन सरकार केवल गोलमोल जवाब देती है कि जांच करवा देंगे, देख लेंगे, हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है।
गड्ढों से भरी सड़कों की स्थिति को लेकर नानकमत्ता की जनता में बहुत आक्रोश है?
जितनी सड़कें मुझसे बन सकीं मैंने बनवाईं लेकिन गांवों में आज भी जगह-जगह सड़कें टूटी हुई हैं और गड्ढों से भरी हुई हैं। लोग परेशान होकर मेरे पास आते हैं। मैं ऊपर प्रस्ताव भेजता हूं लेकिन कुछ नहीं होता है। मगर हमारे साथ भेदभाव किया जा रहा है। बीजेपी के विधायकों को अच्छी सड़कें दी जा रही हैं जबकि हमें केवल दो-चार सड़कें ही मिलती हैं। बाकी प्रस्तावों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। पूरी भारतीय जनता पार्टी भ्रष्टाचार में लिप्त है। हमारे चेयरमैन भी भारतीय जनता पार्टी के हैं, इसलिए नगर पंचायत में भी भ्रष्टाचार हो रहा है। सड़कें बनती हैं और जल्द ही टूट जाती हैं। यही भ्रष्टाचार का प्रमाण है। बीजेपी भ्रष्टाचार की जननी है। खनन का मामला भी आप स्वयं देख सकते हैं। पूरा क्षेत्र और पूरा प्रदेश अवैध खनन से परेशान है।
25 साल पुराना बस अड्डा वीरान पड़ा है यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है आपने उसे सुचारू करने के लिए क्या प्रयास किए?
बस अड्डा मुख्य सड़क पर होना चाहिए था लेकिन उसे दूसरी जगह बना दिया गया जबकि यह बस अड्डा थाने के बगल में होना चाहिए था। कई बार बसें बाहर से ही निकल जाती हैं और यात्री वहीं बैठे रह जाते हैं। वहां सफाई नहीं है, शौचालय साफ नहीं हैं, दीवारें और बाउंड्री टूटी हुई हैं। सरकार का कोई ध्यान नहीं है हमने कई बार इस विषय को विधानसभा में उठाया है लेकिन हमें नजरअंदाज कर दिया जाता है।
आरोप है कि आप स्थानीय विधायक नहीं हैं जिस कारण विकास कार्यों को प्राथमिकता देने में सक्रियता नहीं दिखाते हैं?
जहां तक स्थानीय विधायक नहीं होने की वजह से विकास कार्य न होने की बात है तो मैंने खटीमा से ज्यादा नानकमत्ता में ध्यान दिया है। यहां के हर गुरुद्वारे और मंदिर में सौंदर्यीकरण का काम कराया है।
विधायक निधि से हर गांव में कुछ न कुछ विकास कार्य कराया है। मेरा कार्यालय भी नानकमत्ता में ही है और मैं रोज यहीं बैठता हूं, क्षेत्र में भ्रमण करता हूं। जनता को शायद इसलिए लगता है कि हमारा खटीमा पर ज्यादा ध्यान है क्योंकि वह पहले से विकसित क्षेत्र है लेकिन फिर वही बात है कि सरकार हमारी नहीं है इसलिए काम पूरे नहीं हो पा रहे हैं। अगर सरकार हमारी होती तो जनता ऐसा बिल्कुल नहीं कहती। मैं खुद स्वीकार करता हूं कि जितना विकास होना चाहिए था उतना नहीं हो पाया। 10 साल से बीजेपी की सरकार है। हमें उम्मीद थी कि खटीमा के हमारे मुख्यमंत्री होने के कारण नानकमत्ता और खटीमा दोनों का विकास तेजी से होगा लेकिन हमारी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं। खटीमा में भी पहले जो विकास कार्य हुए थे वही दिखाई देते हैं। आज भी खटीमा शहर के 20 में से 12 वार्ड नानकमत्ता क्षेत्र में आते हैं। वहां न ट्रंचिंग ग्राउंड है, न बायपास, न फ्लाईओवर। बारिश होते ही पूरा खटीमा जलमग्न हो जाता है। इसलिए मैं कहता हूं कि विकास कार्य कहीं भी उस स्तर पर नहीं हुए जिसकी जनता को अपेक्षा थी।
आगामी चुनाव के मद्देनजर आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?
देवीपुरा, गिद्धौर जैसे पिछड़े गांवों में जहां सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं वहां मूलभूत सुविधाओं का विकास करेंगे। कई बार वन विभाग हाथी काॅरिडोर का कारण बताकर काम रोक देता है और कई बार सरकार दूसरी वजहें बता देती है। फिर भी मैंने प्रयास करके पुल निर्माण शुरू कराया जो वर्षों से रुका हुआ था। ज्ञानपुर गोड़ी और गीत गोड़ी के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। हमने हमेशा विकास की बात कही है और विकास करके भी दिखाया है। हम चाहते हैं कि 2027 में जनता कांग्रेस को भारी मतों से जिताए और कांग्रेस की सरकार बनाएं। मैं निश्चित रूप से कहना चाहता हूं कि यदि कांग्रेस की सरकार बनी तो आपको नानकमत्ता का पूरा नक्शा बदला हुआ और विकसित दिखाई देगा।