नई दिल्ली। टेलीलविजन चैनलों पर लगातार खबरें आ रही थीं कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी ‘मोदी सरकार दो’ में मंत्री पद की शपथ लेने वाली हैं। लेकिन आश्चर्य तब हुआ जब सुषमा का नाम अंत तक शपथ लेने वालेां में आ रहा था और उन्होंने शपथ नहीं ली। दूसरकी तरफ जिन एस जयंशंकर को लेकर कहीं कोई पूर्वानुमान या चर्चा नहीं थी, उन्होंने शपथ ली। उनके शपथ लेने के साथ ही यह कयास लगाए जाने लगे थे कि वे सुषमा की जगह नए विदेश मंत्री होंगे।

एस. जयशंकर विदेश सचिव रहे चुके हैं। बताया जाता है कि विदेश सचिव के रूप में वे साउथ ब्लाॅक के अहम रणनीतिकार रहे। वे यूपीए सरकार के दौरान भारत-अमेरिका परमाणु करार पर बातचीत के लिए बनाई गई टीम में भी शामिल रहे। समझा जा रहा है कि एनडीए सरकार के दौरान चीन के साथ डोकलाम विवाद को सुलझाने में उनकी अहम भूमिका रही थी। लद्दाख के देपसांग विवाद का हल निकालने में भी उनकी भूमिका रही। वे अमेरिका और चीन में राजदूत भी रह चुके हैं। माना जा रहा है कि कूटनीतिक मामलों के जानकार होने के चलते ही उन्हें मंत्रिमंडल में लिया गया है।