world

बढ़ता मुस्लिम विरोध

इक्कीस अप्रैल 2019 को जब पूरा विश्व ईस्टर का त्यौहार मना रहा था, श्रीलंका बम धमाकों से दहल गया। दोपहर बाद श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के तीन पंचतारा होटलों में बम विस्फोट हुए। साथ ही तीन चर्च भी धमाकों से लहूलुहान हो गए। बम विस्फोट की जद में कोलंबो के अतिरिक्त कई अन्य शहर भी रहे। इन विस्फोटों में 290 नागरिक मारे गए जिनमें पैंतीस विदेशी भी शामिल हैं। श्रीलंका पुलिस के अनुसार एक स्थानीय आतंकी संगठन ‘राष्ट्रीय ताहीथ जमात’ का इन धमाकों में हाथ था। यह संगठन पिछले लंबे अर्से से बौद्ध धर्म को मानने वालों पर हमला करता रहा है।


गौरतलब है कि श्रीलंका की सत्तर प्रतिशत आबादी आबादी बौद्ध है, 9 .7 प्रतिशत मुस्लिम एवं 7 .4 प्रतिशत ईसाई आबादी है। ‘नेशनल क्रिश्चियन इंवेजेसिकल अलाइंस ऑफ श्रीलंका’ के अनुसार देश में ईसाइयों के खिलाफ हमलों में भारी तेजी कुछ वर्षों में दर्ज की गई है। 21 अप्रैल को किए गए आतंकी हमले में राजधानी कोलंबो के ऐतिहासिक सेंट एंथनी चर्च में उस समय विस्फोट हुआ जब वहां ईस्टर की प्रार्थना सभा चल रही थी। अकेले इस चर्च में ही 50 लोग मारे गए।

इन धमाकों से श्रीलंका दहल उठा है। कुख्यात ‘इस्लामिक स्टेट’ आतंकी संगठन का हाथ इन धमाकों के पीछे होने की बात श्रीलंका सरकार कह रही है। देश के ख्याति प्राप्त बौद्ध संन्यासी अथुरालिए रतना थेरा इन दिनों भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने देश के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना की सरकार में शामिल एक मुस्लिम मंत्री और दो प्रांतों के गवरनर्स पर आतंकी समर्थक होने का आरोप लगाया गया है। उनके भूख हड़ताल पर जाने के साथ ही देश में साम्प्रदायिक तनाव शुरू होने की खबरें हैं। मैत्रीपाला सरकार में शामिल सभी नौ मुस्लिम मंत्रियों ने राष्ट्रपति को सामूहिक इस्तीफा दे डाला है। हालांकि इन मंत्रियों ने अपने त्यागपत्र के पीछे एक निष्पक्ष जांच कराए जाने की बात कही है लेकिन श्रीलंका के अल्पसंख्यक समाज में भारी नाराजगी उभर कर सामने आ रही है। इन मंत्रियों के साथ-साथ दो प्रांतों के मुस्लिम राज्यपालों ने भी अपने इस्तीफे राष्ट्रपति को भेज दिए हैं।

मुस्लिम मंत्रियों को निशाने पर लेने का कड़ा विरोध श्रीलंका के हिंदू नेताओं ने भी दर्ज कराया है। ‘द तमिल नेशनल एलाइंस’ के प्रवक्ता और सांसद एक सुमनतिरन ने कहा है कि ‘आज मुस्लिम निशाने पर हैं, कल हमें निशाने पर लिया जाएगा। देश सबका है, सबको साथ लेकर चलने की जरूरत है। एक अन्य तमिल संगठन ‘तमिल प्रोग्रेसिव एलाइंस’ के नेता मनो गणेशन ने एक कदम आगे बढ़कर कह डाला है कि ‘यदि श्रीलंका सरकार बौद्ध संन्यासियों के दबाव में काम करती है तो गौतमबुद्ध भी देश को बचा नहीं पाएंगे।’ गणेशन ने दावा किया है कि देश के मुसलमानों का इन आतंकी हमलों में शामिल होने के कोई प्रमाण नहीं हैं। इस बीच मुस्लिम मंत्रियों और राज्यपालों के इस्तीफे के बाद बौद्ध संन्यासी अथुरालिए ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है।

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may also like

MERA DDDD DDD DD