ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी द्वारा मंगलवार को संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) से हटने के लिए अमेरिका पर हमला बोला दरअसल, ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि अमेरिका ने उनके देश पर प्रतिबंध लगाकर मानवता पर हमला किया है। यह आर्थिक आतंकवाद है। उन्होंने कहा कि संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) से हटना ठीक नहीं है। रूहानी द्वारा 15 अक्टूबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की क्षेत्रीय समिति के 66वें सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही गई थी।
ईरान की एक न्यूज एजेंसी ने रूहानी के हवाले से कहा, ‘‘अमेरिका ने महज घरेलू अतिवादियों और सऊदी अरब के दबाव के आगे घुटने टेक दिए और ईरान के खिलाफ कार्रवाई की गई। ईरान पहले भी कह चुका है कि उसका एटमी कार्यक्रम सिर्फ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए है। ऐसे में ट्रम्प प्रशासन का रवैया गैर-जिम्मेदाराना है।’’
ईरानी ने कहा, ‘‘किसी देश का सुरक्षा परिषद से समर्थन प्राप्त समझौते से बाहर निकलना दूसरे देश के लिए अपमान जैसा है। तब तो और भी ज्यादा जब उन्होंने दवाओं और खाने जैसी चीजों पर भी प्रतिबंध लगा दिया हो।’’
ईरान, जर्मनी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों- अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के बीच जुलाई 2015 में जेसीपीओए समझौता हुआ था। इसके तहत ईरान को उसके एटमी कार्यक्रम सीमित करने थे। बदले में उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जानी थी। 8 मई 2018 को अमेरिका इस समझौते से अलग हो गया था।

