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पुरस्कारों के इतिहास में बड़ा बदलाव

 

विश्व में भारत का नाम रोशन करने वाले खिलाडियों को भारत सरकार विभिन्न पुरस्कारों से पुरस्कृत करती है ताकि वे खेलों में और अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित होते रहें। खेल के क्षेत्र में दिए जाने वाले विभिन्न पुरस्कार हैं, अर्जुन पुरस्कार, एकलव्य पुरस्कार, मेजर ध्यान चंद अवार्ड, द्रोणाचार्य अवार्ड और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार।खेल मंत्रालय ने अनोखा फैसला लेते हुए राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के चयन के लिए सिंगल विंडो प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। खेल पुरस्कारों के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न, अर्जुन, ध्यानचंद, द्रोणाचार्य अवार्ड के अलावा मौलाना अब्दुल कलाम आजाद ट्राफी, राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार का चयन तीन-तीन कमेटियां नहीं, बल्कि 12 सदस्यीय एक कमेटी करेगी। इन पुरस्कारों के लिए मंत्रालय की ओर से गठित की गई सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत जज मुकंदकम शर्मा की अगुवाई वाली कमेटी में टोक्यो ओलंपिक के लिए दावेदारी ठोक रहीं और वर्तमान खिलाड़ी एमसी मैरीकॉम को जगह दी गई है।

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 29 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में दिए जाने हैं। इसके लिए 16 व 17 अगस्त को कमेटी बैठेगी। द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए चेयरमैन को छूट दी गई है कि अगर उन्हें चयन में दिक्कत आती है तो वह दो अतिरिक्त सदस्यों को कमेटी में शामिल कर सकते हैं।माना जा कि मंत्रालय ने अवार्ड के लिए सिंगल विंडो प्रक्रिया को इस वजह से तरजीह दी है, जिससे अर्जुन अवार्ड में चयनित नहीं होने वाले योग्य उम्मीदवारों को लाइफटाइम ध्यानचंद अवार्ड में जगह दी जा सके, लेकिन इसके लिए मंत्रालय को कमेटी के समक्ष खुद संज्ञान लेना होगा।


अमूमन वर्तमान खिलाड़ियों को कमेटी में शामिल नहीं किया जाता है, लेकिन मंत्रालय ने इस बार मैरीकॉम को जगह दी है। उनके अलावा विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाली इकलौती एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज, टेबल टेनिस खिलाड़ी कमलेश मेहता, फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया, पैरा स्पोर्ट्स में द्रोणाचार्य अवार्डी आरडी सिंह, राजेश कालड़ा, कमेंटेटर चारू शर्मा, महिला क्रिकेटर अंजुम चोपड़ा, टॉप्स सीईओ राजेश राजगोपालन, डीजी साई संदीप प्रधान और मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी इंदर धमीजा कमेटी में शामिल किए गए हैं।

राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान है। इस पुरस्कार की शुरुआत 1991 -92 में हुई थी। इस पुरस्कार के विजेता को 7 . 5 लाख रुपए पुरस्कार राशि के रूप में मिलते हैं, और यह पुरस्कार हर साल दिया जाता है।

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