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उत्तर कोरिया – यूएस ने कहा बातचीत रद्द ,दूसरे ने किया खंडन

 उत्तर कोरिया ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण नीति का त्याग नहीं कर देता तब तक उसके साथ किसी तरह की शांति वार्ता नहीं की जा सकती। उत्तर कोरिया का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी प्रशासन ने यह दावा किया है कि जल्द ही राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात शासक किम जोंग के साथ होगी। इसके साथ ही उन अटकलों के दौर पर विराम लग गया जो जोंग और ट्रंप की मुलाकात कराने पर आमादा थे। एक समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार उत्तर कोरिया के वार्ताकार किम म्योंग गिल ने शनिवार को स्वीडन के स्टॉकहोम में कहा कि वार्ता हमारी अपेक्षाओं को पूरी नहीं कर रही थी। उन्होंने इस पर निराशा जाहिर की। स्वीडन के स्टॉकहोम में उत्तर कोरियाई दूतावास के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए किम म्योंग ने कहा कि वार्ता टूटने के पीछे अमेरिका का अपने पुराने रुख में बदलाव नहीं करना वजह है। उन्होंने कहा कि हमने दिसंबर तक वार्ता सस्पेंड करने का प्रस्ताव रखा है। किम ने कहा कि उत्तर कोरिया का रुख प्रैक्टिकल और रिजनेबल है।  उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान हमने स्पष्ट कर दिया कि दोनों देश उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में कदम उठाने पर तभी चर्चा कर सकते हैं, जब अमेरिका पूर्व में उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु और लंबी दूरी की मिसाइलों के परीक्षण स्थगित करने, अपने भूमिगत परमाणु परीक्षण केंद्र को बंद करने जैसे  उपायों पर ईमानदारी से जवाब देगा।
वहीं अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि दोनों देशों के बीच अच्छी बातचीत हुई है और दो सप्ताह के भीतर एक और बैठक की योजना है। बैठक के बाद, दोनों पक्षों ने इस दौरान क्या हुआ उसे लेकर प्रेस को अलग  -अलग बयान दिया। यही नहीं आगे बातचीत होगी या नहीं इसे लेकर भी दोनों पक्षों से अलग-अलग बयान आए। उत्तर कोरिया के मुख्य वार्ताकार किम म्योंग-गिल ने बैठक को लेकर पहले प्रेस को संबोधित किया था । उन्होंने कहा था कि वार्ता को रद्द कर दिया गया है क्योंकि अमेरिका, परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर अपने रुख पर अड़ा हुआ है। उत्तर कोरियाई दूतावास के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए किम म्योंग ने कहा कि वार्ता टूटने के पीछे अमेरिका का अपने पुराने रुख में बदलाव नहीं करना वजह है।  एक न्यूज़ चैनल के अनुसार उन्होंने कहा कि वार्ता हमारी उम्मीद के अनुकूल नहीं हुई है और अंत में टूट गई। दूसरी तरफ इसके कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टागस ने एक बयान में कहा कि डीपीआरके (उत्तर कोरियाई) प्रतिनिधिमंडल का बयान आज की 8.5 घंटे की चर्चा से एकदम अलग है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने डीपीआरके समकक्षों के साथ रचनात्मक और अच्छी चर्चा की। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने 12 जून, 2018 को ऐतिहासिक सिंगापुर शिखर सम्मेलन के बाद की घटनाओं की समीक्षा की, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने पूर्ण रूप से परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया था।

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