सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को ‘आधुनिक नीरो’ की संज्ञा देते हुए कश्मीरी अवाम से अपील की है कि वे सामाजिक रूप से श्री मलिक, और उनके सलाहकारों का बहिष्कार करें और किसी भी समारोह में शामिल न हों जहां वे मौजूद हों।
जस्टिस काटजू ने अपने सत्यापित फेसबुक पेज पर “Appeal to my Kashmiri brothers and sisters” शीर्षक से अंग्रेजी में लिखी अपनी पोस्ट में कहा कि जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक, जो आधुनिक नीरो हैं, ने घोषणा की है कि पर्यटकों को कश्मीर घाटी छोड़ने के लिए गृह विभाग की एडवाइजरी को आगामी 10 अक्तूबर से उठाया जा रहा है। लेकिन इंटरनेट, मोबाइल आदि पर प्रतिबंध और कई स्थानों पर कर्फ्यू और अन्य प्रतिबंध जारी हैं।
उन्होंने कहा कि मोटे कैप्रोइगाइम की यह नवीनतम नौटंकी जले पर नमक छिड़कती है। उन्होंने लिखा कि मैं अब अपने सभी कश्मीरी भाइयों और बहनों से अपील करता हूं कि वे 10 अक्तूबर से निम्न कार्य करें, लेकिन हिंसा के किसी भी कार्य को किए बिना। होटल, रेस्तरां में अपने घरों में या कहीं भी किसी भी तरीके से किसी भी पर्यटक की आव-भगत न करें। अपनी छाती पर एक बैज लगाएं “अगले नोटिस तक कश्मीर में पर्यटकों का स्वागत नहीं है”। हालाँकि, उन पर कोई हिंसा न करें।कश्मीर में अनुचित और अमानवीय प्रतिबंधों के विरोध के निशान के रूप में अपनी बाईं कलाई पर एक काली पट्टी बाँधें।इस पत्रक को प्रिंट करें, इसे स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित करें, और इसे व्यापक रूप से वितरित करें।

हालाँकि जस्टिस काटजू की इस अपील का कश्मीरियों तक पहुंचना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि प्राप्त जानकारी के मुताबिक कश्मीर में अभी तक समाचारपत्रों का प्रकाशन बंद है और इंटरनेट व मोबाइल बंद हैं। ऐसे में जस्टिस काटजू की अपील का कश्मीर पहुंचना संभव प्रतीत नहीं होता है। लेकिन उन्होंने इस अपील के माध्यम से केंद्र की सरकार को संदेश तो दे ही दिया है।
याद रहे कि अपने ऐतिहासिक फैसलों के लिए प्रसिद्ध रहे जस्टिस मार्कंडेय काटजू 2011 में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए उसके बाद वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे। आजकल वह अमेरिका प्रवास पर कैलीफोर्निया में समय व्यतीत कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय हैं और भारत की समस्याओं पर खुलकर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।

