प्रदेश सरकार के खादी ग्रामोद्योग मंत्री  सत्यदेव पचौरी के गार्ड मुकेश शर्मा ने चिकित्सकीय प्रोटोकालकी धज्जियां उड़ाते हुए एमआरआई कक्ष में पिस्टल के साथ प्रवेश किया था औरपांच करोड़ रुपए से अधिक की कीमत वाली एमआरआई मशीन को खराब कर दिया था। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने तब इस घटना की एफआईआर लिखाने और जांच कराकरदोषियों को दंडित कराने जैसी बड़ी-बड़ी बातें कीं थीं लेकिन जैसा कि सत्ताधारी मंत्रियों के मामले हमेशा से होता आया है वैसा ही इस मामले में भी हुआ। कार्यवाही के नाम पर महज दो चिट्ठियां लिखकर मामले की लीपा-पोती कर दी गई। 
 
मौजूदा योगी सरकार के कार्यकाल में सूबे की जनता बिना भेदभाव के नियम-कानून के पालन की उम्मीद रखती है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। यदि आम जनता ने कोई गुनाह किया है तो उसे सजा देने में कोताही नहीं बरती जाती, यदि मामला सरकार के किसी मंत्री और उसके नजदीकी से संबंधित हो तो सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग गलतियों को ऐसे पचा जाते हैं जैसे कुछ हुआ ही न हो। अभी पिछले दिनों एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एस.पी. गोपाल पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। राज्यपाल ने इस आरोप की जांच के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र क्या लिखा कि प्रदेश की राजनीति में भारी भूचाल आ गया। तुरंत ही आरोप लगाने पर कार्यवाही की गई। आरोप लगाने वाले शख्स ने अपना आरोप वापस ले लिया और माना कि उसने रंजिशन प्रमुख सचिव को फंसाया। इस मामले का तत्काल निस्तारण इसलिए हुआ क्योंकि सीएम कार्यालय की छवि पर आंच आ रही थी। दूसरी तरफ एक अन्य मामले में पूरा सरकारी महकमा खामोश बैठा है, जबकि इस मामले में सरकारी धन की बड़ी हानि हुई है।
राम मनोहर लोहिया अस्पताल के एमआरआई कक्ष में एक मंत्री के गनर से लगभग 70 लाख रुपए के नुकसान की जानकारी आम जनता को जरूर होगी। यह भी मालूम होगा के उस वक्त जिम्मेदार अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि गलती करने वाला चाहें कोई भी क्यों न हो उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी। इस घटना को घटित हुए महीनों बीत चुके हैं। इस बीच लोहिया संस्थान 69 लाख रुपया खर्च कर मशीन भी ठीक करवा ली लेकिन गलती करने वाले मंत्री के गनर के खिलाफ न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही किसी प्रकार की विभागीय अथवा विधि सम्मत कार्रवाई ही की गई।

सबसे हैरतनाक यह कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कार्रवाई के बाबत जानकारी मांगे जाने पर जानकारी भी नहीं दी जा रही। ज्ञात हो

सत्यदेव पचौरी खादी ग्रामोद्योग मंत्री

प्रदेश सरकार के खादी ग्रामोद्योग मंत्री  सत्यदेव पचौरी के गार्ड मुकेश शर्मा ने चिकित्सकीय प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाते हुए एमआरआई कक्ष में पिस्टल के साथ प्रवेश किया था औरपांच करोड़ रुपए से अधिक की कीमत वाली एमआरआई मशीन को खराब कर दिया था। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने तब इस घटना की एफआईआर लिखाने और जांच करा कर दोषियों को दंडित कराने जैसी बड़ी-बड़ी बातें कीं थीं लेकिन जैसा कि सत्ताधारी मंत्रियों के मामले हमेशा से होता आया है वैसा ही इस मामले में भी हुआ। कार्यवाही के नाम पर महज दो चिट्ठियां लिखकर मामले की लीपा-पोती कर दी गई। बताते चलें कि उक्त घटना को लेकर अभी तक किसी को भी दंडित नहीं किया गया है। योगी के मंत्री के गनर की गलती से लोहिया संस्थान 69 लाख से अधिक का नुकसान तो हुआ ही है साथ ही साथ एमआरआई कराने की लाइन में लगे मरीज भी प्रभावित हुए। समाचार लिखे जाने तक घटना की कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी।

सरकार का लोहिया संस्थान के अधिकारियों और चिकित्सकों पर दबाव का आंकलन भी कर लीजिए। खौफ इतना है कि जनता के टैक्स के 69 लाख से ज्यादा रुपए गटर में चले गए पर लोहिया संस्थान घटना के संबंध में कराई जांच की रिपोर्ट को आरटीआई में मांगे जाने पर भी देने से इनकार कर रहा है। चौंकाने वाला यह खुलासा एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा लोहिया संस्थान के कार्यालय में दायर की गई एक आरटीआई से हुआ है। लोहिया संस्थान के निदेशक प्रोफेसर दीपक मालवीय ने अपने जवाब में कहा है कि घटना के दिन बीते 2 जून को ही एमआरआई जांच की वेटिंग में लगे 20 मरीजों को बिना जांच हॉस्पिटल से वापस जाना पड़ा। मशीन के 16 दिन खराब रहने और इस से वेटिंग में लगे 213 मरीजों के प्रभावित होने की बात भी बताई गई है। एमआरआई की जांच रूम में प्रवेश से पूर्व किसी धातु का प्रवेश न होने देने के लिए एडिशनल प्रोफेसर डॉ. गौरव राज, जूनियर रेजिडेंट डॉ. अशोक कुमार गौतम, रेडियोग्राफर दीपक जोशी और अटेंडेंट राम नरेश की ड्यूटी होने की बात भी बताई गई। घटना के संबंध में एफआईआर लिखाने के लिए निदेशक द्वारा घटना के अगले दिन 3 जून को विभूति खंड के थानाध्यक्ष को पत्र लिखा गया था लेकिन इस बात की जानकारी निदेशक के पास नहीं है कि घटना की एफआईआर लिखी भी गई है अथवा नहीं। घटना की जांच के लिए लोहिया संस्थान के निदेशक द्वारा कार्डियोलॉजी विभाग के डीन एवं विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मुकुल मिश्रा की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय जांच समिति भी बनाई गई थी लेकिन आरटीआई में इस रिपोर्ट को देने से मना कर दिया गया। संस्थान के निदेशक का कहना है कि उक्त घटना से संस्थान को 69 लाख 3 हजार रुपयों का आर्थिक नुकसान हुआ है

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