जम्मू कश्मीर में बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन वापस लिया. मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की सरकार अल्पमत में आ गई है. जानकारी के मुताबिक मुखयमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने राजपाल को इस्तीफा सौंप दिया है
ईद खत्म होते ही जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के लिए बुरी खबर आ गई. बीजेपी ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ने का एलान क्र दिया. प्रदेश के बीजीपी प्रभारी राममाधव ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में गठबंधन से अलग होने का एलान किया. उन्होंने वजह बताते हुए कहा, ‘हमने तीन साल पहले जिन उद्देश्यों को लेकर सरकार बनाई थी, उनकी पूर्ति की सफलता पर विस्तृत चर्चा हुई. जिसके बाद यह निर्णय लेना पड़ा. ‘
उन्होंने कहा, ‘पिछले दिनों जम्मू कश्मीर में जो घटनाएं हुई हैं, उन पर तमाम इनपुट लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से परामर्श लेने के बाद आज हमने निर्णय लिया है कि गठबंधन सरकार में चलना संभव नहीं होगा.’
राममाधव का कहना था, ‘पिछले तीन साल से ज्यादा समय में बीजेपी अपनी तरफ से सरकार अच्छे से चलाने की कोशिश कर रही थी, राज्य के तीनों प्रमुख हिस्सों में विकास को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही थी. आज जो हालात राज्य में बने हैं, जिसमें एक भारी मात्रा में आतंकवाद और हिंसा बढ़ गई. उग्रवाद बढ़ रहा है, नागरिकों के मौलिक अधिकार और बोलने की आज़ादी ख़तरे में पड़ गए हैं.’ राममाधव ने इस सिलसिले में वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुख़ारी की गोली मारकर हत्या किए जाने का भी जिक्र किया.
केंद्र सरकार ने दो दिन पहले ही जम्मू कश्मीर में घोषित एकतरफा संघर्षविराम को और आगे नहीं बढ़ाने का फ़ैसला किया था. यह संघर्षविराम रमज़ान के महीने के दौरान राज्य में 16 मई को घोषित किया गया था. गृह मंत्रालय ने कहा कि चरमपंथियों के ख़िलाफ़ फिर से अभियान शुरू किया जाएगा. यह घोषणा ईद के एक दिन बाद की गई थी.
क्या पीडीपी गठबंधन से अलग होने की एक वजह संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने पर पीडीपी के साथ मतभेदों का होना था, संवाददाताओं के इस सवाल पर राममाधव ने कोई सीधा जबाव नहीं दिया.
कांग्रेस ने पीडीपी को समर्थन देने से साफ़ मना कर दिया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि बीजेपी को वहां सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं था. इस सरकार ने प्रदेश को बहुत पीछे धकेल दिया. पीडीपी को समर्थन कांग्रेस नहीं देने जा रही है.