उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ के लिए माना जाता है कि वे भाजपा आलाकमान की पसंद के चलते सीएम नहीं बनें, बल्कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के समक्ष ऐसी स्थितियां पैदा कर दी थी कि उन्हें सीएम बनाने के सिवा नेतृत्व के समक्ष कोई विकल्प न था। यही कारण रहा कि तेज-तर्रार योगी को थामने की नीयत से प्रदेश में दो-दो उपमुख्यमंत्री बनाए गए। इसमें से एक उपमुख्यमंत्री ने शपथ ग्रहण के बाद से ही योगी विरोधी तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे। दरअसल केशव प्रसाद मोर्या खुद को सीएम पद का हकदार मान रहे थे। उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते ही भाजपा उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई जो है। योगी के लिए दूसरा बड़ा संकट प्रदेश भाजपा के संगठन मंत्री सुनील बंसल बन कर उभरे। बंसल की तूती संगठन के साथ-साथ सरकारी तंत्र में भी खासी सुनाई देती है। अब लेकिन कैराना और नूरपुर की पराजय के बाद योगी ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी है। खबर है कि योगी की पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी संग हुई मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री विरोधियों को सीएम के खिलाफ दुष्प्रचार करने से बाज आने को कहा गया है। सुनील बंसल को भी उत्तर प्रदेश से हटाए जाने की खबर है।