बेटा इंदौर में लेफ्टिनेंट बनकर देश सेवा की शपथ ले रहा था और भारत माता की जय का उद्घोष गौतम बुद्ध नगर के दुजाना में गूंज रहा था। गौतम बुद्ध नगर के सबसे बड़े गांव दुजाना के लेफ्टिनेंट मनीष नागर की कामयाबी पर पिता रगबीर सिंह ही नहीं बल्कि पूरा दुजाना गांव खुशी से फूले नहीं समा रहा था। हालांकि, इस खुशी के बीच ऑनलाइन पासिंग आउट परेड देख रहे पिता के मन में बेटे के बैच का अनावरण नहीं कर पाने की टीस बनी हुई थी।

मध्यप्रदेश के इंदौर से 90 युवाओं का सलेक्शन हुआ था। जिसमें मनीष नागर ने 22 वी रैंक हांसिल कर मुकाम हासिल किया हैं। बहरहाल, मनीष की इस कामयाबी पर दुजाना ही नहीं बल्कि पूरे जिला गौतम में जश्न का माहौल है। आज वह जनपद गौतम बुद्ध नगर के युवाओं का रोल मॉडल बन चुका है।

गांव के सोमेंद्र प्रधान बताते हैं कि मनीष ने दिल्ली के लोदी रोड स्थित बाल भारती एयर फोर्स एजूकेशन सेंटर से 12वीं की पढ़ाई के दौरान ही सेना में जाने का फैसला कर लिया था। जहां विज्ञान वर्ग में वह प्रथम श्रेणी का छात्र रहा था। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कालेज में मनीष ने बीएससी कंप्यूटर में प्रवेश ले लिया।

हालांकि, बीएससी कंप्यूटर कोर्स पूरा होने से पहले ही मनीष का एयर फोर्स ने सलेक्शन कर लिया। उसका यह सलेक्शन आर्मी ट्रेस टेक्निकल एट्री स्कीम के तहत एसएसबी के आधार पर हुआ। यह सलेक्शन भी सीडीएस और एनडीए की तर्ज पर होता है। जिसमे विज्ञान वर्ग में इंटरमीडिएट होना जरूरी है। इसके बाद आर्मी ने ही मनीष को मिलेट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग से चार साल का बीटेक का कोर्स कराया था। इसके बाद मनीष को आर्मी टेक्निकल आफिसर (लेफ्टिनेंट) बनाया गया है।

शनिवार को इंदौर में मनीष नागर की पासिंगआउट परेड थी। लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से स्वजन नहीं जा सके। पिता रगबीर सिंह कहते हैं कि बेटे के कंधे पर लगे अशोक की लाट के बैज का अनावरण करने की ख्वाहिश थी। लेकिन कोरोना ने ये हक छीन लिया। खुशी इस बात की है कि बेटे ने देश की सेवा के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। मनीष नागर के पिता रगबीर सिंह एयर फोर्स में वारंट अफसर के पद पर राजस्थान के माउंट आबू में तैनात है। समय-समय पर नौकरी के अनुसार उनकी जगह बदलती रही। इस तरह ही मनीष की पढाई के शिक्षण संस्थान भी परिवर्तित होते रहे।

पिता रगबीर सिंह बताते है कि मनीष की प्राथमिक शिक्षा अहमदाबाद में हुई थी। जहां के स्कूल में वह 9वी तक पढा। इसके बाद वह 12 वी तक दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल में पढ़ा। इस दौरान वह सभी कक्षाओं में प्रथम या द्वितीय स्थान पर ही आता रहा। रगबीर सिंह बताते है कि उनका सपना मनीष को पायलट बनाने का था। जिसमें उसने एग्जाम भी क्लियर कर लिया था। यही नहीं बल्कि मनीष का पायलट के लिए मेडिकल भी फाइनल हो चुका था। लेकिन इस दौरान कोई विकेन्सी नही निकली। जिससे वह पायलट बनते-बनते रह गया।

तेजवीर नेताजी के अनुसार दुजाना गांव में मनीष का परिवार फुलैदे पट्टी में रहता है। चौधरी वेदराम सिंह नागर स्टेडियम के सामने इनका घर स्थित है। मनीष के बाबा केशराम सिंह केशू एक समाजसेवी के तौर पर लोगों की मोच सही करने का निशुल्क उपचार करते हैं। केशराम सिंह के तीन पुत्र हैं। जिनमें एक मनीष नागर के पिता रगबीर सिंह है। जबकि दूसरे राजबीर सिंह हैं और तीसरे जगदीश नागर है जो तहसील दादरी में अमीन के पद पर सुसज्जित है। मनीष नागर के तीन भाई है , जिनमें वह सबसे छोटा है।

