फीफा वर्ल्ड कप 2018 के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में आज  बेल्जियम और फ्रांस आमने- सामने होंगे। दोनों टीमें फाइनल के टिकट के लिए भिड़ेंगी, सातवीं रैंकिंग वाली फ्रांस ने अब तक एक बार (साल 1998) में वर्ल्ड कप का खिताब जीता है, वहीं तीसरे नंबर की टीम बेल्जियम अब तक एक बार भी यह खिताब नहीं जीत पाई है। दोनों ही टीमें टूर्नामेंट में अब तक अजेय रही हैं। अपने अटैकिंग खेल से विरोधियों को मात देने वाली दोनों टीमों के बीच  मुकाबला काफी रोमांचक होगा।

बेल्जियम की सबसे बड़ी ताकत है उसके मिडफील्डर. अपनी इसी ताकत को आजमाने के लिए वो 3-4-3 के फॉर्मेशन में खेलते हैं।  वहीं कभी-कभी यह फॉर्मेशन 4-3-3 का भी होता है।  टीम के ऑलराउंडर खिलाड़ी के तौर पर केविन डी ब्रुइन, मारौएन फेलेनी जैसे खिलाड़ी डिफेंडर और अटैक दोनों तरह से टीम के लिए अहम भूमिका निभाते आए हैं।

वहीं स्ट्राइकर के तौर पर बेल्जियम की सबसे बड़ी ताकत लुकाकू हैं जो ना सिर्फ खेल से, बल्कि अपने शरीर के कारण  फील्ड पर विरोधियों के लिए मुश्किल बन जाते हैं. उनका साथ देने की जिम्मेदारी इडन हजार्ड की होती है।

टीम की ताकत यही है कि वह पूरी तरह हजार्ड और लुकाकू पर निर्भर नहीं है। टीम ने टूर्नामेंट में अब तक 14 गोल किए हैं जिसमें चार गोल लुकाकू और दो गोल हेजार्ड ने किए. इन दोनों के अलावा सात अन्य खिलाड़ियों ने भी गोल किए हैं। बेल्जियम की सबसे बड़ी कमजोरी है उसका डिफेंस. टीम के पास भले ही थिबॉ क्वरतुवा के रूप में शानदार गोलकीपर हैं, लेकिन इसके बावजूद टीम की ये कमजोरी उभर कर सामने आ जाती है। ब्राजील के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में टीम का डिफेंस कमजोर दिखाथा। ब्राजील के तेज अटैक के सामने टीम का डिफेंस कई बार फेल दिखाई दे रहा था। टीम ने अब तक पांच गोल खाए है, जिसमें से दो गोल ट्यूनीशिया ने किए थे।  ये मैच बेल्जियम ने 5-2 से जीता था। ऐसे में फ्रांस की कोशिश होगी कि वह इसी कमजोरी का फायदा उठाए।

बेल्जियम की तरह फ्रांस की ताकत भी उसके मिडफील्ड में ही बसतीहै।  फ्रांस आमतौर पर 4-2-3-1 के फॉर्मेशन में खेलता है। पॉल पोग्बा और एनगोलो कान्ते की मौजूदगी में मिडफील्ड में ही दोनों टीमों के बीच असल मुकाबला होगा।

टीम का डिफेंस भी बेल्जियम के मुकाबले ज्यादा मजबूत है,इसकी वजह ये है कि वो आमतौर पर चार डिफेंडरों के साथ खेल की शुरुआत करते हैं। और  टीम के पास राफेल वरान , सैमुअल उम्तीती जैसे डिफेंडर है। जिनसे पार पाना बेल्जियम के लिए आसान नहीं होगा.वहीं टीम के पास स्ट्राइकर के मामले में कायलिन एम्बाप्पे और एंटोनी ग्रीजमैन जैसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने टीम को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।  बेंजामिन पावर्ड राइट बैक पोजीशन पर अच्छा खेल दिखाते हुए अटैक में मदद करते हैं।

टीम की कमजोरी उनका अटैक पर ज्यादा ध्यान देना है।  अक्सर टीम इसी कारण काउंटर अटैक का बचाव नहीं कर पाती है।  खेल के सभी विभागों में एक सामान ध्यान नहीं दे रही उनका अटैकिंग खेल उन्ही के लिए मुश्किल बन जाता है। ऐसे में यह मुकाबला काफी दिचस्प होगा की कौन किस पर भरी पड़ता है।

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