राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को एक कुशल रणनीतिकार माना जाता है। पिछले दिनों पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को संघ मुख्यालय में लाने के पीछे उन्हीं का मुख्य किरदार रहा। कांग्रेस के तमाम प्रयासों के बावजूद वे प्रणब दा को न केवल नागपुर खींच लाए, बल्कि संघ संस्थापक हेडगेवार की प्रशंसा भी पूर्व राष्ट्रपति से करवा डाली। हालांकि प्रणब मुखर्जी ने संघ मुख्यालय में दिए अपने संबोधन में भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति पर अपना फोकस रखा लेकिन संघ को जो लाभ और कांग्रेस को जो नुकसान होना था, वह होकर ही रहा। अब खबर है कि देश के श्रेष्ठ उद्योगपति रतन टाटा भी संघ के मुंबई में होने जा रहे कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। संघ सूत्रों की मानें तो मोहन भागवत का लक्ष्य ऐसी हस्तियों को संघ के मंच पर लाने का है जिनकी छवि स्वच्छ और प्रतिबद्ध व्यक्तित्व की हो। निश्चित ही रतन टाटा से बड़ा नाम इस समय भारतीय औद्योगिक जगत में दूसरा नहीं। भागवत भली-भांति जानते हैं कि भले ही ऐसे व्यक्ति संघ की विचारधारा से इत्तेफाक ना रखें, उनका संघ के मंच में आना चुनावी वर्ष में भाजपा के लिए खासा लाभप्रद होगा। यही कारण है कि आरएसएस प्रमुख अपनी इस रणनीति को परवान चढ़ाने में इन दिनों जुटे हैं।
संघ प्रमुख की रणनीति