बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हालिया संपन्न राज्य विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के चलते मिले सदमे से उबर कुछ ऐसा करने में इन दिनों व्यस्त बताए जा रहे हैं जिससे न केवल सरकार में बड़े भाई की भूमिका में आ चुकी भाजपा को काबू में रखा जा सके, बल्कि तेजस्वी यादव की ताजातरीन चमक को भी फीका किया जा सके। खबर है कि राजनीतिक पैंतरेबाजी के शातिर और माहिर खिलाड़ी नीतीश सबसे पहले राजद के घर में सेंधमारी करने जा रहे हैं। लालू यादव के अति विश्वस्त और राज्य में मुसलमानों के बड़े नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी जल्द ही पाला बदल जद(यू) में शामिल हो सकते हैं। पहली बार 1977 में जनता पार्टी के 
टिकट पर बहेटा विधानसभा सीट जीत विधायक बने सिद्दिकी सात बार विधायक रह चुके हैं। इन चुनावों में लेकिन हार मिलने से वे खासे व्यथित और तेजस्वी यादव से नाराज बताए जा रहे हैं। उनकी नाराजगी के मूल में उन्हें उनकी परंपरागत सीट अलीनगर से टिकट न देकर खेरी विधानसभा से चुनाव लड़ाया जाना है। बिहार क्रिकेट और बेडमिंटन एसोशियन के अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दिकी का कद राजद में लालू यादव के समकक्ष रहा है। खबर है कि नीतीश उन्हें विधान परिषद सदस्य बना अपने मंत्रिमंडल में लेने का आॅफर भेज चुके है। इतना ही नहीं बिहार में चिराग पासवान को भीतरखाने समर्थन देने वाली भाजपा को सबक सिखाने के लिए नीतीश जद(यू) के कभी अटूट हिस्सा रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा को भी विधान परिषद भेज अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हैं। चर्चा जोरों पर है कि अपनी पार्टी के शर्मनाक प्रदर्शन से घबराए उपेन्द्र कुशवाहा जद(यू) संग पार्टी के विलय पर तैयार हो चुके हैं। खबर तेजस्वी की कार्यशैली ने नाराज चल रहे कुछ बड़े राजद नेताओं को लेकर भी खासी गर्म है। बताया जा रहा है इनमें से कुछ नेता नीतीश कुमार के सीधे संपर्क में हैं। यदि नीतीश कुमार की योजना परवान चढ़ती है तो आने वाले समय में एक बार फिर भाजपा का छोटे भाई भूमिका में आना तय हो जाएगा।

