यूं तो भारतीय जनता पार्टी- कांग्रेस और कांग्रेस के इतिहास से नायकों से परहेज करती आई है, अपनी सुविधानुसार पिछले कुछ समय से वे ऐसे नायकों को स्वीकारने लगी है जिन्हें लाख चाह कर भी वह जनमानस से दूर नहीं कर सकती। सरदार वल्लभ भाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री और महात्मा गांधी ऐसे जननायकों में शामिल हैं। पटेल की विरासत को तो पूरी ताकत, पूरी रणनीति बना भाजपा कब्जाने का प्रयास सबसे ज्यादा रहा है। महात्मा गांधी को भी भाजपा इग्नौर करने से बचती नजर आ रही है। गत् वर्ष जब मध्य प्रदेश भाजपा के प्रमुख अनिल कुमार सौमित्र ने महात्मा गांधी को पाकिस्तान का जनक कह पुकारा था तो उन्हें पार्टी ने तत्काल अपनी प्राथमिक सदस्यता से निलंबित करने का ऐलान कर गांधी प्रशंसकों के गुस्से को काबू करने का काम किया था। तब पार्टी ने अनिल कुमार के कथन को पार्टी के विचार, संस्कार और सिद्धांतों के खिलाफ बताया था। अब इन्हीं अनिल कुमार को प्रतिष्ठत संस्थान ‘इंडियन इस्टीट्यूट आॅफ मास कम्यूनिकेशन’ में प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति दे दी गई है। महात्मा गांधी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वाले अनिल कुमार की नियुक्ति को लेकर नाना प्रकार की चर्चाओं का बाजार गर्म हैं। जानकारों की माने तो राष्ट्रीय स्वयं संघ के इशारे पर उन्हें प्रोफेसर बनाया गया है। जानकारों का यह भी दावा है कि भले ही दिखावटी तौर पर अनिल कुमार को भाजपा ने अपनी सदस्यता से निलंबित किया हो, वे पार्टी में लगातार सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

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