पिथौरागढ़ जिले में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। शहरों से निकलकर अब यह गांवों में अपना पांव पसार चुका है। कई गांव एवं कस्बे कंटेनमेंट जोन में तब्दील हो रहे हैं। न सरकार और न ही प्रशासन गांवों तक पहुंच पा रहे हैं। कुछ गांव वालों ने खुद कमर कस रखी है तो कई गांव भगवान भरोसे है।
कोरोना को रोकने के लिए सरकारी व्यवस्थाओं पर नजर डालें तो खामियां ही खामियां नजर आएंगी। जनपद में ऑक्सीजन सिलेंडरों की कमी है। इसकी रीफिलिंग हल्द्वानी से होती है जिसमें काफी देर हो रही है। आॅक्सीजन सिलेंडर चाहने वालों इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। गांवों में प्रत्येक बीमार तक दवा उपलब्ध नहीं हैं। मेडिकल किट भी आसानी से कोरोना मरीजों तक नहीं पहुंच पा रही है। गांवों में तो टेस्टिंग एवं टीकाकारण की रफ्तार बेहद सुस्त है। जिन जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर कोरोना रोकथाम की जिम्मेदारी है वह भी ऐसा होना चाहिए, वैसा होना चाहिए, सामूहिकता ही कोरोना को रोकेगी जैसे जुल्म उत्पन्न अपने कर्तव्यों से इतिश्री करने में लगे हुए हैं।
जनपद में एएनएम एवं आशा बेहतर भूमिका निभा सकती हैं लेकिन उन तक मेडिकल किट नहीं पहुंच पा रही है। कोरोना को रोकने के लिए गांव से शहर तक विशेष अभियान की जरूरत है लेकिन लेकिन यह सच बयानबाजी तक सीमित है। लोगों में हाहाकार मचा है। लोग डरे-सहमे हैं। विभागों के बीच बेहतर समन्वय की कमी देखी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में टेस्टिंग नहीं के बराबर हो रही है। हालांकि जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आनंद स्वरूप का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में सैम्पिलिंग बढ़ाने के लिए हर विकासखंडमें पांच टीम बनाई गई है। यह टीम रोज पांच गांवों को सैम्पिलिंग लेगा। लेकिन निकट भौगोलिक स्थिति एवं कई गांवों में आने-जाने में लगने वाले समय को देखते हुए भी यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं कही जा सकती। जनपद में 8 विकासखंडों में 690 ग्राम पंचायतें हैं। जब तक यहां टेस्टिंग हो तब तक तो कोरोना गांवों को अपनी चपेट में ले चुका होगा।
यहां महत्वपूर्ण यह भी है कि लोग खुद काफी लापरवाही बरत रहे हैं। मास्क पहनना हो या फिर खुद को सेनिटाइज करना, इसमें काफी कोताही हो रही है। जनपद में बाहर से आने वाले कुछ लोगों ने कोरोना जांच के नाम पर हेराफेरी की। जांच का सैम्पल तो दिया लेकिन गलत नाम एवं नंबर रजिस्टर में दर्ज करा दिया। जांच रिपोर्ट पाॅजीटिव आने के बाद अधिकारी उनको ढूंढ़ने-खोजने में ही परेशान रहे। इधर ये लोग खुलेआम गांव में घूमकर संक्रमण फैला रहे।
वर्तमान में जिला पिथौरागढ़ में 1312 मामले सक्रिय हैं। जिसमें 701 होम आइसोलेशन एवं 339 अन्य स्थानों पर आइसोलेट हैं। जिला चिकित्सालय में बने कोविड केयर सेंटर में 60 एवं बेस अस्पताल में 111 कोरोना मरीज भर्ती हैं। अभी तक कोरोना से जनपद में 85 लोगों की मौत हो चुकी है। जिला मुख्यालय के निर्माणाधीन बेस अस्पताल में टूनेट मशीन स्थापित की गई है। लेकिन यहां जांच के लिए आने वाले लोगों के बैठने एवं पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। इस जांच में औसतन 12 लोग रोज पाॅजिटिव आ रहे हैं। अभी तक इस मशीन से 5000 लोगों की जांच हो चुकी है। जहां तक टीकाकरण की बात है तो जिले में टीकाकरण के लिए 74 केंद्र बनाए गए हैं। कुछ लोग अपने स्तर पर मास्क एवं सेनिटाइजर बांट रहे हैं। नगरपालिका पिथौरागढ़ ने अपने निर्माणाधीन बारातघर में 100 बेड लगाने की बात कही है। लेकिन इसके लिए डाॅक्टर एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था कहां से हो, यह बड़ा सवाल है। नगर में सेनिटाइजर का काम चल रहा है। लेकिन इसकी गति धीमी है। चिंता की बात यह है कि जनपद में संक्रमण की दर तेजी से बढ़ रही है। बीते रोज जनपद में 437 लोगों की जांच हुई इसमें 165 लोग संक्रमित मिले, यानी एक दिन में संक्रमण की हदर 37.75 प्रतिशत रही। जनपद में 17 माइक्रो कंटेनमेंट जोन वन चुके हैं। रिपोर्ट आने की रफ्तार बेहद सुस्त हैं 2867 लोगों की सैम्पल रिपोर्ट अभी भी लंबित है। जनपद के आठों विकासखंड में खबर लिखे जाने तक संक्रमितों की संख्या 289 पहुंच चुकी है। जिसमें बेरीनाग में 102, गंगोलीहाट में 86, मुनस्यारी में 20, धारचूला में 64, डीडीहाट में 43, विण में 63, मूनाकोट में 48, कनालीछीना में 54 लोग अभी तक संक्रमित हो चुके हैं। कोरोना संक्रमित शवों को ढोने के वाहन एवं कर्मचारियों की भारी कमी है। एक ही वैन में 6 शवों को एक साथ ले जाने की घटना सामने आ चुकी है। इसके अलावा दिहाड़ी मजदूर, टैक्सी एवं वाहन चालक, दुकानदार से लेकर रोज कमाने वाले आदमी को आर्थिक स्थिति लाॅकडाउन के चलते लगातार कमजोर होती जा रही है।