उत्तराखण्ड में गत् मार्च यकायक ही भाजपा ने अपना मुख्यमंत्री बदल डाला था। 18 मार्च को चार बरस पूरे करने जा रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटा तीरथ सिंह रावत के सत्ता संभालते ही नौकरशाही में बड़े बदलाव की चर्चा शुरू हो चली। नए सीएम ने अपने शुरुआती दिनों में पूर्ववर्ती सीएम के कई करीबी अफसरों को बदल भी डाला। देहरादून के सत्ता गलियारों में तब कयासबाजियों का बाजार गर्म था कि त्रिवेंद्र काल के कई ऐसे अफसरों के पर कटने तय हैं जो भाजपा मंत्री और विधायकों तक की नहीं सुनते। राज्य के मुख्य सचिव ओमप्रकाश को भी हटाने की बात की जाने लगी थी। चमोली की डीएम स्वाति एस भदौरिया, अल्मोड़ा के डीएम नीतीन भदौरिया और देहरादून के डीएम आशीष श्रीवास्तव को भी हटाए जाने की बात थी। इन तीनों ही अफसरों की कार्यशैली से जनता और जनप्रतिनिधि खासे नाखुश बताए जाते हैं। तीरथ सरकार में मंत्री बने मसूरी विधायक गणेश जोशी तो पूर्व में देहरादून डीएम के खिलाफ खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अब खबर गर्म है कि मुख्य सचिव समेत ऐसे सभी अफसरों को नए सएम हटाने में खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि संघ के एक बड़े नेता इनके संरक्षक बन चुके हैं। जानकारों की मानें तो त्रिवेंद्र रावत के हटते ही उनके करीबी नौकरशाहों ने संघ की शरण ले डाली है। बताया जा रहा है कि इन अफसरों को हटाए जाने की पूरी तैयारी हो चुकी थी लेकिन संघ के हस्तक्षेप चलते इसे टाल दिया गया है। खबर यह भी जोरों पर है कि नए मुख्यमंत्री पर आरएसएस पहले ही दिन से भारी दबाव दिए हुए है जिसके चलते तीरथ रावत मुख्यमंत्री होते हुए भी स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पा रहे हैं।


