पिछले कुछ सालों से देश में बेरोजगारी बड़े स्तर पर घटती ही जा रही है। करीब एक साल से कोरोना के चलते कई लोगों की नौकरियां चली गई ,लेकिन इस आधुनिक युग में अब ऑटोमेशन की ओर तेजी से बढ़ रहीं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की कंपनियां 2022 तक करीब 30 लाख नौकरियां खत्म करने की तैयारी में हैं। कहा जा रहा है कि इस कदम से कंपनियों को 100 अरब डॉलर यानी 7.3 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी।
इस बीच नासकॉम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि घरेलू आईटी क्षेत्र में करीब 1.6 करोड़ नौकरियां हैं, जिनमें से 90 लाख कर्मचारी बीपीओ व अन्य कम दक्षता वाले क्षेत्रों में काम करते हैं। इनमें से ही 30 फीसदी या 30 लाख नौकरियां अगले साल तक खत्म हो सकती हैं। सिर्फ रोबोट प्रोसेस ऑटोमेशन से ही सात लाख नौकरियां खत्म हो जाएंगी।

टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल, टेक महिंद्रा और कॉग्निजेंट जैसी कंपनियां अगले साल तक ऑटोमेशन की वजह से यह छंटनी कर सकती हैं। इन पर वेतन के रूप में 100 अरब डॉलर की बचत होगी, लेकिन ऑटोमेशन के लिए 10 अरब डॉलर खर्च भी करने होंगे। इसके अलावा 5 अरब डॉलर नई नौकरियों के वेतन पर खर्च आएगा।

फॉर्च्यून-500 की रिपोर्ट के अनुसार, महामारी की दूसरी लहर में युवा और ज्यादा उम्र वाले कर्मचारियों ने अधिक नौकरियां गंवाई हैं। 24 साल से कम उम्र वाले युवाओं में 11 फीसदी की नौकरियां गईं, जो पिछले साल 10 फीसदी थी। इसी तरह, 55 साल से ज्यादा उम्र वाले नौकरीपेशा में पांच फीसदी लोग बेरोजगार हो गए। पिछले साल यह संख्या 4 फीसदी थी।
बढ़ती महंगाई के दबाव में रिजर्व बैंक अगस्त में होने वाली मौद्रिक समिति की बैठक में भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। एसबीआई रिसर्च ने कहा है कि इकोरैप रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू और वैश्विक कारणों से अगले कुछ महीने खुदरा महंगाई में लगातार इजाफा दिख सकता है। मई में खुदरा महंगाई 6.3 फीसदी पहुंच गई, जो रिजर्व बैंक के तय दायरे से भी ज्यादा है। ऐसे में 4-6 अगस्त तक होने वाली अगली एमपीसी बैठक में भी ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी।
बैंक एम्प्लॉई फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) के संयुक्त सचिव चिरनजीत घोष का कहना है कि सरकार की गलत नीतियों से बढ़ती महंगाई लोगों की बचत को खा रही है। एफडी पर जहां पांच फीसदी ब्याज मिल रहा है, वहीं महंगाई दर 6.3 फीसदी पहुंच गई है। ईंधन पर ज्यादा टैक्स लेने से सभी वस्तुओं के दाम बेतहाशा बढ़ रहे हैं। सरकार को इसे कम करने की दिशा में काम करना चाहिए।
आयकर विभाग ने अप्रैल से 15 जून तक पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले दोगुनी प्रत्यक्ष कर वसूली की है। इस दौरान कुल 1.85 लाख करोड़ वसूली हुई, जो 2020 में 92 हजार 762 करोड़ थी। इसमें 74 हजार 356 करोड़ की वसूली कॉर्पोरेट आयकर के रूप में, जबकि 1.11 लाख करोड़ रुपये व्यक्तिगत आयकर में वसूले गए।
पिछले डेढ़ साल से कोरोना संक्रमण के चलते निजी क्षेत्र में नौकरियों का संकट बरकरार है, लेकिन भारत के आईटी सेक्टर में यह संकट कोरोना वायरस की दस्तक देने से पहले ही बना हुआ है। आंकड़ों ककी बात करें तो वर्ष 2019-20 में देश की टॉप पांच आईटी कंपनियों ने नई नौकरियों में लगभग 27 फीसदी की कटौती की थी ।कहा जा रहा है कि अब वर्ष 2021 -22 में इस कटौती में तीन फीसदी की बढ़ोतरी कर यानी 30 फीसदी तक छटनी की जा सकती है।
जॉब कटौती में सबसे आगे टेक महिंद्रा
पिछले वर्ष नई नौकरियों में कटौती करने में आईटी कंपनी टेक महिंद्रा और इंफोसिस सबसे आगे रही है। वित्त वर्ष 2019-20 में टेक महिंद्रा ने 4 हजार 154 नए लोगों को नौकरी दी, जबकि वित्त वर्ष 2018-19 में 8 हजार 275 लोगों को नौकरी दी गई थी। इस प्रकार टेक महिंद्रा ने 49.80 फीसदी कम नई नौकरियां दीं। वहीं इंफोसिस ने वर्ष 2018-19 की 24 हजार 16 के मुकाबले वर्ष 2019-20 में 14 हजार 248 यानी 40.67 फीसदी कम नई नौकरियां दीं।
कोरोना नहीं ज्यादा ऑटोमेशन का पड़ा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी सेक्टर में नई नौकरियों में कमी का कारण कोरोना वायरस नहीं है। भारत में कोरोना महामारी मार्च 2020 की शुरुआत में बड़े स्तर पर सामने आई थी । जानकारों के मुताबिक ऑटोमेशन और कारोबारी मॉडल में बदलाव की वजह से नई नौकरियों में कमी आई है।

