एनडीए के घटक दल अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश लाने के कतई पक्ष में नहीं बताए जा रहे हैं। यही कारण है भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर खामोशी साधे हुए है। दरअसल, इस प्रकरण को लेकर भाजपा के भीतर भी एकमत नहीं है। कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसा कोई भी अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट को मान्य नहीं होगा क्योंकि इससे दूसरे पक्ष को न्याय नहीं मिलने का मुद्दा उठेगा ही उठेगा जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट ऐसे किसी भी अध्यादेश को खारिज कर देगा। दूसरी तरफ एनडीए के सहयोगी दल भी इसका विरोध कर रहे हैं। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के बाद अब जद (यू) ने भी भाजपा नेतृत्व के सामने स्पष्ट कर दिया है कि वह कोर्ट के जरिए इस विवाद को सुलझाने के पक्ष में हैं। खबर यह भी है कि रामविलास पासवान भी इस मुद्दे पर भाजपा के साथ नहीं है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार शायद ही अध्यादेश के जरिए मंदिर निर्माण की तरफ कदम बढ़ाएगी।
राम मंदिर अध्यादेश चलते तनाव