Sargosian / Chuckles

तीसरे से दसवें पायदान में लुढ़के महाराज

सिंधिया राजघराने के वारिस ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से बगावत कर भले ही मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनवा डाली हो, उनको भाजपा में कांग्रेस समान महत्व न मिलने की बात सामने आने लगी है। मध्य प्रदेश कांग्रेस में वे टॉप पायदान में हुआ करते थे। कमलनाथ के बाद उनका ही नाम था। भाजपा में लेकिन वे भीड़ का हिस्सा बनकर रह गए हैं। इसका प्रमाण सिंधिया विरोधी कांग्रेसी इन दिनों चटकारे लेकर गिनाते घूम रहे हैं। इन कांग्रेसियों का कहना है कि भाजपा के लिए अब महाराज साहब की उपयोगिता समाप्त हो चली है। उपचुनावों के लिए जारी स्टार प्रचारकों की सूची में सिंधिया का नाम दसवें नंबर पर रखा गया है, कांग्रेस में रहते उनका नाम दूसरे नंबर पर रखा जाता था। इन कांग्रेसियों का यह भी दावा है कि 28 सीटों में हो रहे उपचुनावों में 22 सीटें सिंधिया समर्थक उन विधायकों की हैं जिन्होंने पाल बदलते वक्त अपना इस्तीफा दे दिया था। इन 22 सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में भले ही सभी सिंधिया समर्थकों को भाजपा ने वायदा निभाते हुए टिकट दिया है, जीते जाने के बाद उनकी निष्ठा बदलना तय है। ऐेस में सिंधिया भाजपा नेतृत्व के साथ खास मोलभाव करने की स्थिति में नहीं रह जाएंगे। राज्यसभा उन्हें भाजपा भेज ही चुकी है। बहुत हुआ तो केंद्र में उन्हें मंत्री बना दिया जाएगा। लेकिन मंत्रालय चुनने का ऑप्शन उनके पास नहीं होगा। कांग्रेस नेताओं के बयानों का दबे सुर में भाजपा नेता भी समर्थन कर रहे हैं। इन खांटी भाजपाइयों का कहना है कि पार्टी सिंधिया के भरोसे इन उपचुनावों को नहीं लड़ रही है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। ऐसे में सिंधिया कांग्रेस के भीतर अपने रूतबे से दूर भाजपा में भीड़ का हिस्सा बनकर रह गए हैं।

You may also like

MERA DDDD DDD DD