world

क्लाउडिया गोल्डिन को मिला नोबेल पुरस्कार

विज्ञान अर्थशास्त्र के क्षेत्र में हावर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर क्लाउडिया गोल्डिन को अर्थशास्त्र विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया है। क्लाउडिया गोल्डिन को यह पुरस्कार अमेरिकी अर्थव्यवस्था में काम करने वाली महिलाओं पर शोध किए जाने को लेकर दिया गया है। क्लाउडिया को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महिलाओं पर उनके ऐतिहासिक काम पर किए गए शोध के लिए जाना जाता है।

क्लाउडिया गोल्डिन को इस वर्ष यानी साल 2023  नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा इसकी जानकारी नोबेल प्राइज ने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा, “रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने ‘महिलाओं के श्रम बाजार के परिणामों के बारे में हमारी समझ को उन्नत करने के लिए’ क्लाउडिया गोल्डिन को अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में स्वेरिगेस रिक्सबैंक पुरस्कार 2023 देने का निर्णय लिया है।

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में स्वेरिजेस रिक्सबैंक पुरस्कार से सम्मानित क्लाउडिया गोल्डिन को 10 मिलियन स्वीडिश क्रोना यानी करीब 9 लाख 7 हजार डॉलर दिए जाएंगे।

 

क्या है स्वेरिजेस रिक्सबैंक पुरस्कार

 

गोल्डिन

 

वर्ष 1968 में  स्वेरिगेस रिक्सबैंक (स्वीडन का केंद्रीय बैंक) ने नोबेल पुरस्कार के संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान में पुरस्कार की स्थापना की। यह पुरस्कार बैंक की 300वीं वर्षगांठ के अवसर पर 1968 में स्वेरिगेस रिक्सबैंक द्वारा नोबेल फाउंडेशन को प्राप्त दान पर आधारित है।

क्लाउडिया गोल्डिन से पहले वर्ष 2022 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार अमेरिकी अर्थशास्त्री बेन बर्नांके, डगलस डायमंड और फिलिप डायबविग को बैंकों और वित्तीय संकटों पर उनके द्वारा किए गए कामों के लिए दिया गया था। वहीं इससे पहले केमिस्ट्री के क्षेत्र में मौंगी जी। बावेंडी, लुईस ई। ब्रूस और आई। एकिमोव को क्वांटम डॉट्स की खोज और संश्लेषण के लिए नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया है।

क्लाउडिया गोल्डिन द्वारा किया गया शोध

 

गोल्डिन

 

इस साल नोबेल पुरस्कार पाने वाली क्लाउडिया गोल्डिन अपने महत्वपूर्ण शोध के लिए जानी जाती है। उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महिलाओं पर उनके ऐतिहासिक काम पर किए गए शोध के लिए जाना जाता है।

“डाउन टू अर्थ” एक समाचार पोर्टल के अनुसार गोल्डिन ने अपने अध्ययन के दौरान श्रम बाजार में लैंगिक असमानताएं क्यों होती हैं ,इसके पीछे की मुख्य वजहों को उजागर किया है। शोध अनुसार पिछली एक सदी के दौरान कई समृद्ध देशों में महिला कामगारों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है । इन श्रमिकों को मेहनताना भी दिया जा रहा है। जो कि श्रम बाजार के आधुनिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक बदलावों में से एक है।

यह भी पढ़ें : ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता को मिला शांति नोबेल पुरस्कार

 

80 के दशक तक किसी भी शोधकर्ता ने इन असमानताओं की उत्पत्ति को समझने के लिए व्यापक दृष्टिकोण नहीं अपनाया था। गोल्डिनने शोध में श्रम बाजार में महिलाओं की ऐतिहासिक और वर्तमान स्थिति पर नए और अप्रत्याशित दृष्टिकोण प्रदान किए हैं। उन्होंने 200 वर्षों के आंकड़ों की मदद से अपने शोध में यह साबित किया है कि कमाई और रोजगार दरों में लिंग अंतर कैसे और क्यों बदल गया?

क्लाउडिया गोल्डिन के शोध से यह भी जानकारी प्राप्त होती है कि वैश्विक श्रम बाजार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। काम करने के बावजूद आय के मामले में वे पुरुषों से पीछे रहती हैं। इसके अलावा गोल्डिन इस बात पर भी प्रकाश डालती हैं कि कैसे महिलाओं की पसंद अक्सर शादी, घर चलाने और परिवार की देखभाल की जिम्मेवारियों से बाधित होती है।अपने शोध में गोल्डिन जो भी तथ्य सामने लाइ हैं वो अमेरिका ही नहीं बल्कि बाहर के देशों में भी तर्कसंगत बैठते हैं।

You may also like

MERA DDDD DDD DD