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अधर में लटका लाॅयन सफारी का सफर

करोड़ों की लागत से बनकर तैयार हो चुके पार्क (इटावा लायन सफारी) को योगी सरकार की तरफ से हरी झण्डी की दरकार है लेकिन सरकार इस पार्क को हरी झण्डी देने से कतरा रही है। चर्चा हो रही है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि आम जनता पार्क की उपलब्धि को पूर्ववर्ती सपा सरकार की उपलब्धियों से जोड़कर न देखने पाए। इन सत्ता विरोधी दलों से लेकर आम जनता के बीच हो रही चर्चाओं में कितना दम है? इस पर संशय हो सकता है लेकिन पिछले छह माह से अधिक समय से बनकर तैयार हो चुके पार्क को सरकार की तरफ से हरी झण्डी क्यों नही दी जा रही? इसका जवाब किसी के पास नही।
कुमार राकेश
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के सपनों का पार्क (इटावा लायन सफारी) लगभग डेढ़ दशक का सफर तय करने के बाद भी आम जनता के लिए खोला नहीं जा सका है। खासतौर से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में इस पार्क को लेकर इटावा की जनता बेसब्री से इंतजार करती रही लेकिन कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही ने सारे मंसूबे ध्वस्त कर दिए। यहां यह बताना जरूरी है कि इटावा लायन सफारी का ख्वाब पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपने कार्यकाल वर्ष 2005 में देखा था लेकिन राजनीतिक अस्थिरता के चलते मुलायम अपने इस सपने को पूरा नहीं कर पाए। सत्ता परिवर्तन के साथ ही मुलायम के इस सपने को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पूरी तरह से ध्वस्त करने के इरादे से पार्क के लिए चिन्हित भूमि पर कोल्ड स्टोरेज खोले जाने की स्वीकृति प्रदान कर दी थी। मायावती सरकार के कार्यकाल में स्थानीय प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली का ही नतीजा है कि पार्क के लिए चिन्हित भूमि पर कोल्ड स्टोरेज नहीं बन पाया और माया सरकार अपना कार्यकाल पूरा करके सत्ता से बाहर हो गयी। वर्ष 2012 में जब सूबे की कमान पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम के पुत्र अखिलेश यादव के हाथो में सौंपी गयी तो यह प्रोजेक्ट एक बार फिर से जीवित हो उठा। चूंकि इटावा लायन सफारी का सपना मुलायम ने देखा था लिहाजा उनके पुत्र अखिलेश यादव ने बतौर मुख्यमंत्री इस सपने को अपना सपना मानकर प्रोजेक्ट को तीव्र गति से शुरु करने का आदेश दिया। इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द तैयार करने के लिए आवास विकास परिषद की लगभग पूरी टीम लगा दी गयी थी। बताया जाता है कि पिता के सपनों को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव स्वयं अक्सर जायजा लेने पहुंच जाते थे। यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट को अखिलेश सरकार के रहते लगभग पूरा कर लिया गया था। उद्घाटन भी किया जा चुका था लेकिन कमियों के कारण और सुरक्षा के पर्याप्त उपायों के न होने के कारण इस पार्क को आम जनता के लिए नहीं खोला जा सका था। वर्ष 2017 में सूबे की सत्ता भाजपा के हाथो में आयी और मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना भेदभाव किए इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करके आम जनता के लिए खोले जाने का आदेश सुनाए, साथ ही इस प्रोजेक्ट की राह में आने वाली आर्थिक दिक्कतों को दूर करने के लिए भी राजकोष से धन आवंटन की संस्तुति प्रदान कर दी। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों की माने तो इटावा लायन सफारी के बचे-खुचे प्रोजेक्ट को पूरा करने में महज 18 से 20 करोड़ की अतिरिक्त रकम की आवश्यकता थी। मौजूदा स्थिति यह है कि 350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले और सैकड़ों करोड़ का यह प्रोजेक्ट मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों के बावजूद कमियों के चलते आम जनता के लिए खोला नही जा सका है। बताते चलें कि पहले इटावा लायन सफारी का उद्देश्य शेरों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए किया जाना था लेकिन बाद में यह प्रोजेक्ट सेन्ट्र जू अथाॅरिटी के प्लान पर पूरी तरह से प्राणि उद्यान की शक्ल में तैयार किया गया।
350 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले इस पार्क में 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल सिर्फ मछली पार्क के रूप में बनाया जाना था। बताया जाता है कि यदि पूर्ववर्ती सरकार की यह योजना जस की तस धरातल पर उतरती तो निश्चित तौर पर यह पार्क देश का ही नही बल्कि पूरे विश्व का एक अनोखा पार्क होता। दिसम्बर 2012 यानी पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए पहली किश्त 89 करोड़ रुपए आवंटित कर दी गयी थी। स्पष्ट है कि सत्ता संभालने के कुछ ही माह में इतनी बड़ी रकम सरकारी खजाने से आवंटित किए जाने के पीछे उद्देश्य क्या होगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार मौजूदा समय में इस पार्क में शेरों के साथ ही अन्य जानवरों को मिलाकर 75 जानवर हैं। यहां यह बताना भी जरूरी है कि पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के कार्यकाल में कई शेरों और शावकों की मौत हो जाने से भी इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में समय लगा, ऐसा इसलिए कि सरकार ने शेरों और शावकों के मरने पर जांच बिठा दी थी और स्पष्ट आदेश दिया गया था कि जब तक शेरों की मौतों का कारण ज्ञात न हो तब तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में जल्दबाजी न की जाए।
इस सबके बावजूद मौजूदा योगी सरकार के कार्यकाल में भी इटावा के सफारी पार्क का उद्घाटन कर दिया गया और दावा किया गया था कि वर्ष 2018 के अंत तक या फिर पहली जनवरी 2019 को यह पार्क आम जनता के लिए खोल दिया जायेगा। बताते चलें कि जून 2018 में इस पार्क का उद्घाटन किया जा चुका है। एक जून को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने सफारी पार्क का उद्धाटन किया था। योगी आदित्यनाथ उद्घाटन के बाद भी इटावा आ चुके हैं फिर भी लायन सफारी के दीदार आम जनता को नही हो सके हैं। स्थिति यह है कि कोई जिम्मेदारी अधिकारी भी यह बताने कही स्थिति में नही है कि आखिर लायन सफारी को कब तक खोला जाएगा। कहा जा रहा है कि ऐसा तब है जब सफारी प्रशासन ने सारी कमियों को पूर्ण कर लिया है और इस बाबत शासन को पत्र भी लिखा जा चुका है। सफारी प्रशासन भी कहता है कि उसने समस्त शेष कार्य जुलाई 2018 में ही पूरे कर दिए थे।
अब एक नजर इटावा जनपद मे हो रही चर्चाओं पर भी डाल ली जाए। सत्ता विरोधी दल से जुडे़ कई नेताओं का दावा है कि योगी सरकार इस पार्क को लोकसभा चुनाव के बाद ही खोलेगी। भाजपाइयों का अनुमान है कि यदि उसने लोकसभा चुनाव से पहले ही इस पार्क को आम जनता के लिए खोल दिया तो इसका सीधा लाभ सपा को मिल सकता है लिहाजा पूरी तरह से तैयार हो जाने के बावजूद पार्क को आम जनता के लिए नही खोला जा रहा। ज्ञात हो इटावा सफारी के दर्शन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ही कई बड़ी हस्तियां कर चुकी हैं। दावा किया जा रहा है कि इटावा की लायन सफारी विश्व स्तर की है और यह एशिया में इकलौती है।

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