कोरोना महामारी के बाद दिल के दौरे से बढ़ती मौतों की वजह को लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर पर कई शोध सामने आए हैं । अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी ‘सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी), समेत यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की शोध अनुसार कोविड 19 वैक्सीन के प्रयोग से लोगों को कई प्रकार के साइडएफेक्ट का सामना करना पड़ रहा है । ये साइडएफेक्ट कुछ लोगों के लिए जानलेवा भी साबित हो रहे हैं। इन शोधों के अनुसार कोरोनाकाल में लगाई गयीं वैक्सीन के बाद लोगों में कई तरह की शारीरिक बीमारियां जैसे; हाई ब्लड प्रेशर, डायबटीज़, मांसपेशियों में लगातार दर्द, नियमित थकान, शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस ,हार्ट अटैक, जैसी बिमारियों को तेजी से बढ़ते हुए देखा गया है।
कोरोना काल के बाद से ही दिल के दौरे से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ी है। जिसका जिम्मेदार अंतराष्ट्रीय संस्थानों के शोध ने कोरोना वेक्सीन को माना है । इनके अनुसार चलते फिरते, डांस करते ,जिम करते हुए दिल के दौरे से होने वाली अचानक मौतों की एक वजह कोरोना टीको का एक दुष्परिणाम है। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर के ये शोध इस तरह से होने वाली मौतों का जिम्मेदार कोरोना वैक्सीन को ठहरा रहे हैं वहीं भारतीय ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ‘(आईसीएमआर) द्वारा भी एक शोध किया गया है। जो कि दिल के दौरे से होने वाली मौतों के विषय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए शोधों से ठीक विपरीत है। आईसीएमआर के शोध का विषय था आखिर दिल के दौरों से होने वाली मौतों के मामले अचानक क्यों बढ़ रहे हैं। जिसका परिणाम आईसीएमआर द्वारा किए गए शोध अनुसार युवाओं में दिल के दौरे से होने वाली मौतों का खतरा कोरोना के टीको की वजह से नहीं बढ़ा है, बल्कि टीके से मौत का खतरा कम हुआ है।
कोरोना टीका नहीं कोरोना संक्रमण है मौतों की वजह

कई मामले तो ऐसे सामने आए जिनमें लोग डांस करते हुए, गरबा खेलते हुए, गाना गाते हुए या फिर जिम में कसरत करते हुए दिल के दौरे के शिकार हुए हैं । लगातार हो रही इस तरह की मौतों के बाद ही आईसीएमआर ने इस विषय पर शोध किया। शोध अनुसार इस तरह की मौतों की वजह कोरोना की वजह से अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहना, ज्यादा मेहनत वाले काम करना या ज्यादा शराब पीना माना गया है।
डी डब्लू की एक रिपोर्ट अनुसार आईसीएमआर द्वारा किए गए शोध में दावा किया गया है कि जिन लोगों को कोरोना संक्रमण का गंभीर सामना करना पड़ा है ,उन्हें कम से कम एक या दो साल अत्यधिक परिश्रम नहीं करना चाहिए। कोविड-19 के बाद दिल के मरीजों में 14 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। आईसीएमआर ने इस शोध के लिए देश में 18-45 आयु वर्ग के स्वस्थ वयस्कों के बीच अचानक मौतों की जांच की। इसमें पता चला कि कोविड-19 वैक्सीन से अचानक मौत का खतरा नहीं बढ़ा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भी आईसीएमआर के हवाले से कहा कि कोरोना टीका दिल के दौरे से होने वाली मौतों की वजह नहीं है। मनसुख मांडविया ने आईसीएमआर की इसी रिपोर्ट के तर्ज पर ही बीते दिनों एक बयान में कहा था कि “आईसीएमआर ने एक स्टडी जारी की है। जिसमें कहा गया है कि जिन्हें गंभीर कोविड हुआ, संक्रमण को ज्यादा वक्त ना हुआ हो…उन्हें ज्यादा शारीरिक मेहनत नहीं करनी चाहिए, तेज दौड़ने, हैवी वर्कआउट से बचना चाहिए, ये सावधानी एक से दो साल के लिए बरतनी है। स्वास्थ्य मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया था जब बीते कुछ दिनों पहले गरबा में बहुत ज्यादा दिल के दौरे से होने वाली मौतों के मामले सामने आए थे। गुजरात में नवरात्रे इवेंट्स के दौरान 24 घंटे के दौरान 12 की मौतें हो गई थी, जो कि चिंता का विषय रहा। उस दौरान गुजरात के अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया था।
सरकार को बनानी चाहिए नीतियां
वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के इस बयान पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य मंत्री कह रहे हैं कि लोगों को ज्यादा मेहनत वाला काम या कठोर परिश्रम नहीं करना चाहिए तो उसके लिए सरकार ही एक पॉलिसी बनाए और बताएं कि जिन लोगों का ऐसा पेशा है तो उनके लिए सरकार की क्या नीतियां हैं। सरकार को ऐसा तंत्र बनाना चाहिए…जिसको भी गंभीर कोविड हुआ और उसके पास इसके सबूत हैं, तो सरकार कोई ऐसा तंत्र बनाए जिससे उन्हें दो साल तक नौकरी में आराम की सुविधा मिल सके। इसके अलावा जिस पेशे में भारी वजन उठाना पड़ता है, वैसे लोगों के लिए सरकार को जरूर कुछ नीति पेश करनी चाहिए ताकि उन्हें काम में आराम मिल सके।
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