Poltics

क्या फांसी से बच पाएंगे भारतीय पूर्व सैनिक

 

इजरायल-हमास की जंग के बीच खाड़ी देश कतर ने भारतीय 8 पूर्व नौसेना के अधिकारियों को फांसी की सजा सुना दी है। कतर के इस फैसले के बाद यह मामला भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इन लोगों को सुनाई गई सजा पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार इस फैसले से स्तब्ध है लेकिन वह इस समस्या को सुलझाने के लिए सारे कानूनी रास्ते तलाश कर रही है। कतर की अदालत के इस फैसले को चुनौती देने और भारतीय नौसेना के इन पूर्व कर्मचारियों को बचाने के लिए भारत विकल्प तलाश कर रहा है। यह मुद्दा भारत के लिए एक बड़ा डिप्लोमैटिक चैलेंज बन गया है, क्योंकि मोदी सरकार पर सजायाफ्ताओं के परिवार, विपक्ष और आम जनता द्वारा भी इस मुद्दे को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। 

 

नौसेना के इन आठ कर्मचारियों में कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कैप्टन वीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुग्नाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और सेलर रागेश शामिल हैं। यह सभी भारतीय नौसेना से रिटायर हो चुके हैं। और रिटायरमेंट के बाद यह पूर्व सैनिक क़तर की एक डिफेंस सर्विसेज कंपनी के लिए काफी समय से काम कर रहे थे। कतर में इन लोगों को 30 अगस्त वर्ष 2022, को गिरफ़्तार किया गया था। तभी से इन्हे कैद में रखा हुआ है। काफी समय कैद के बाद इन लोगों का मुकदमा 29 मार्च वर्ष 2023, में शुरु किया गया। एक रिपोर्ट के द्वारा पता चला है कि भारत के इन पूर्व नौसैनिक अधिकारियों के परिवार वालों को भी उन आरोपों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, जिनके आधार पर इनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया है।
 
क्या हैं आरोप
 
जिन भारतीयों को मौत की सजा सुनाई गई है वो एक डिफेंस सर्विसेज प्रोवाइडर कंपनी अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंस्लटेंसी सर्विसेज के लिए काम कर रहे थे। ये कंपनी ओमानी नागरिक खमीस अल-आजमी की है। आजमी रॉयल ओमान एयर फोर्स के रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर हैं। उन्हें भी इन आठ भारतीयों के साथ गिरफ़्तार किया गया था। हालांकि उन्हें वर्ष 2022 के नवंबर महीने में छोड़ दिया गया था, लेकिन इन पांचो भारतीय पूर्व सैनिकों पर जासूसी करने और देश की ख़ुफ़िया इंफॉर्मेशन रखने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई है। 
 
कंपनी क्या करती है?

कंपनी की पुरानी वेबसाइट को अपडेट नहीं किया गया है, लेकिन मौजूदा वेबसाइट में बताया गया है कि कंपनी ने कतरी अमीरी नेशनल फोर्स (क्यूईएनएफ) के लिए ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और मेंटनेंस सर्विसेज मुहैया कराती है। नई वेबसाइट में कंपनी का नाम दहरा ग्लोबल है लेकिन कतरी अमीरी नेशनल फोर्स को दी जाने वाली इसकी सेवाओं का कोई ज़िक्र नहीं है, कहा जा रहा है कि यह कंपनी कतर की नेवी के लिए काम करती है। इस कंपनी की वेबसाइट पर न ही उन गिरफ़्तार पूर्व नौसैनिक अधिकारियों का जिक्र किया गया है। सूत्रों से पता चला है कि ‘इन भारतीयों को मौत की सजा सुनाई गई है उनमें से एक (कमांडर पूर्णेंदु तिवारी) इस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर थे। भारत और कतर के संबंधों को बेहतर बनाने में योगदान देने के लिए वर्ष 2019 में उन्हें प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। उस समय उनका सम्मान क़तर में तत्कालीन भारतीय राजदूत और क़तर डिफेंस फोर्सेज के इंटरनेशनल मिलिट्री को-ऑपरेशन के पूर्व चीफ पी कुमारन ने किया था। ये समारोह इंडियन कल्चरल सेंटर में आयोजित किया गया था। उस दौरान समारोह में भारतीय दूतावास के डिफेंस अताशे कैप्टन कौशिक भी मौजूद थे। जिन भारतीयों को सजा सुनाई गई है वो गिरफ़्तारी से पहले दहरा में चार से छह साल तक नौकरी कर चुके थे। कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया है कंपनी कतर सरकार को सैन्य पनडुब्बी खरीदने में मदद कर रही थी। हालांकि इसका अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं मिल पाया है। 

भारतीय नौसेना के जिन पूर्व नौसेना अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई गई है, उन्हें क़तर की ख़ुफिया एजेंसी स्टेट सिक्योरिटी ब्यूरो ने गिरफ़्तार किया था। भारतीय दूतावास को पहली बार उनकी गिरफ़्तारी के बारे में पिछले साल (2022) सितंबर मध्य में पता चला। 30 सितंबर को इन लोगों को अपने परिवार वालों से थोड़े वक्त के लिए टेलीफोन पर बातचीत की इज़ाज़त दी गई। हिरासत में लिए जाने एक महीने से ज्यादा समय के बाद पहली बार इन लोगों को कॉन्सुलर एक्सेस दी गई है। उस दौरान भारतीय दूतावास के एक अधिकारी ने इन लोगों से मुलाकात की थी। 

 

इस मुलाकात के बाद अगले कुछ महीनों तक गिरफ़्तार भारतीयों को हर सप्ताह अपने परिवार वालों से बात करने की इजाजत दी जाती थी। लेकिन अभी इन लोगों पर लगाए गए आरोप सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि आरोप सुनवाई के तहत ही लगाए गए थे। न तो भारत और न ही क़तर की सरकार ने नौसेना के इन पूर्व अधिकारियों पर लगे आरोपों को सार्वजनिक किया है। कतर में क़ैद भारत के पूर्व नौसैनिकों को छुड़ाना क्यों है मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती। 

 
कैसे आया मुद्दा सामने ?
पिछले साल गिरफ़्तारी के बाद एक भारतीय वेबसाइट ने गिरफ़्तार कमांडर पूर्णेंदु तिवारी की बहन डॉ. मीतू भार्गव और कैप्टन नवतेज सिंह गिल के भाई नवदीप गिल से बात की थी। डॉ. मीतू भार्गव ने उस समय मोदी सरकार से इन लोगों को छुड़ाने की अपील थी। मीतू भार्गव ने कहा था कि उनके भाई सीनियर सिटीजन हैं और वो कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। उनकी उम्र 63 होने के बावजूद भी उन्हें अलग कैद में रखा गया है। वह इस बात का अंदाजा नहीं लगा पा रही हैं कि वो किन तकलीफों से गुजर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि उनके भाई पूर्णेंदु तिवारी ने अपनी 83 साल की मां से जेल से बात की है। वो अपने बेटे की सुरक्षा लेकर बेहद चिंतित हैं।

कैप्टन नवतेज सिंह गिल के भाई नवदीप गिल ने बताया था कि उनके भाई ने जब छह सितंबर को अपने जन्मदिन पर भेजे गए व्हाट्सएप मैसेज का जवाब नहीं दिया तो उन्हें शक हुआ। बाद में उनसे फोन से कांटेक्ट बंद हो गया। जब उन्होंने कंपनी से संपर्क किया तो पता चला कि उन्हें कतर की सिक्योरिटी सर्विस ने गिरफ़्तार कर लिया है। नवदीप गिल का कहना था कि उनके भाई के साथ मेडिकल दिक्कतें हैं। उनके भाई ने रिटायरमेंट तक भारतीय नौसेना की सेवा की। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वो उनके भाई को छुड़ा कर भारत ले आएं। पिछले साल दिसंबर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था गिरफ़्तार भारतीयों वापस लाना सरकार की प्राथमिकता है।
भारत के पास क्या हैं विकल्प

अभी कुछ दिनों पहले ही पाकिस्तान ने भी भारत के पूर्व नेवी अधिकारी कुलभूषण जाधव को इसी तरह से मौत की सजा दी थी लेकिन भारत ने इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में अपील की और फांसी पर रोक लग गई थी। यह विकल्प कतर के मामले में भी भारत के पास मौजूद है। इसके अलावा हम कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी 8 भारतीयों को माफी दे सकते हैं। ये भी जरूरी है कि इसके लिए समय पर आवेदन करना होगा। वह साल में दो बार ऐसी सजा को माफ करते हैं और निश्चित तौर पर भारत अपील करने में देरी नहीं करेगा। भारत विदेश मंत्रालय की तरफ से गुरुवार (26 अक्टूबर) को कहा गया कि कतर की अदालत के फैसले से स्तब्ध हैं।  परिवार के सदस्यों और कानूनी टीम से संपर्क किया जा रहा है। सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत ने ये भी साफ कर दिया है कि वह कतर की कैद में बंद भारतीयों को राजनयिक परामर्श देता रहेगा।

पहले भी मौत की सजा कम कर चुका है कतर

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने एक वाकये का जिक्र करते हुए कहा है कि फिलिपंस के एक नागरिक को भी इसी तरह से मौत की सजा सुनाई गई थी। वह कतर जनरल पेट्रोलियम में काम करता था। आरोप था कि वायुसेना के दो अन्य आरोपी उसे खुफिया जानकारी देते थे जिससे वह फिलीपींस तक पहुंचाता था। मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था, इसलिए फिलीपींस के नागरिक को मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन इस मामले में अपील की गई और कोर्ट ने सजा कम करके आजीवन कारावास में बदल दिया था। वायुसेना के दो अन्य आरोपियों को भी 25 साल की सजा घटाकर 15 साल कर दी गई। फैबियन कहते हैं कि वहां के कानूनों में इस तरह की सजा और बाद में माफ करने का रिवाज रहा है। इसके अलावा भारत से कूटनीतिक रिश्ते भी खास हैं। इस वजह से कतर के लिए आठ भारतीयों को फांसी के फंदे पर लटका देना आसान नहीं होगा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ 
 
सरकार इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में याचिका लगाकर पैरवी कर सकती है। वहां सवाल पूछा जा सकता है कि किन सबूतों के आधार पर फांसी दी गई है। भारत की दुनिया के कई देशों के साथ लीगल ट्रीटी हो रखी हैं। इसके मुताबिक, जिन देशों के साथ समझौते हैं, उनके नागरिकों को या भारतीय नागरिकों को वे देश मौत की सजा नहीं सुना सकते हैं। हालांकि, वे जेल में बंद कर सकते हैं या फिर भारी भरकम जुर्माना लगा सकते हर ऐसी कोई ट्रीटी कतर के साथ भी है तो वो भी भारतीय नौसेना के अधिकारियों को बचाने में मददगार साबित होगी।
हालांकि इस तरह के मामलों में राजनयिक स्तर पर बातचीत नहीं होती है तब तक ये मामला क्या रुख लेगा कहना मुश्किल है। हां, लेकिन इससे भारत में पब्लिक ओपिनियन पर असर जरूर पड़ेगा। न तो भारत और न ही क़तर ने नौसेना के इन पूर्व अधिकारियों पर लगे आरोपों को सार्वजनिक किया है। आख़िर इसकी वजह क्या है? विशेषज्ञ कहते हैं ”ये संवेदनशील मामला है। जब इस तरह के संवेदनशील मामला हो तो दोस्ताना रिश्ते वाले देश काफी सावधानी बरतते हैं। दोनों देशों ने जिस तरह से कोई फौरी प्रतिक्रिया नहीं दी है इससे ऐसा लग रहा है कि ये काफी संवेदनशील मामला है। चूंकि आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा है इसलिए भी इस बात की कम ही गुंजाइश है कि ये संवेदनशील मामला नहीं होगा। चूंकि मौत की सजा सुनाई गई है इसलिए ये तय है कि जिन लोगों को सजा सुनाई गई है, उन पर कोई बेहद गंभीर आरोप है। या फिर उन्होंने कोई गंभीर अपराध किया है।’

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ‘इसे डिप्लोमैटिक चैलेंज कहना मुश्किल होगा। क्योंकि जो लोग गए थे वो भारत की नेवी के पूर्व सैनिक हैं। लेकिन वो किसी सरकारी काम के लिए नहीं गए थे, वो निजी कंपनी के लिए काम कर रहे थे। इसलिए डिप्लोमैटिक चैलेंज कहना मुश्किल है। इसका कुछ राजनीतिक और राजयनिक असर हो सकता है लेकिन अभी ये भी कहना मुश्किल है। चूंकि मामला अदालत में था और इस पर कोई सार्वजनिक सूचना साझा नहीं की गई है। इसलिए विदेश नीति के हिसाब से संयमित तरीके से ही इसे सुलझाने की कोशिश हो रही है। भारत सरकार को सबसे पहले फैसले का ब्योरा देना होगा। वो देखेगी कि इसमें अपील की संभावना है या नहीं। अगर कतर के कानून के हिसाब से इस मामले में अपील की संभावना है तो देखना होगा इसका कितना अधिकतम लाभ लिया जा सकता है। ये भी देखना होगा कि मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत में ले जाया जा सकता है या नहीं। इस मामले के कई सारे पहलू हैं जिन पर भारत और कतर के मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं, लेकिन इस रिश्ते में पहली चुनौती जून 2022 में आई, जब बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने एक टीवी शो में पैगंबर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। उस दौरान क़तर पहला देश था जिसने भारत से ‘सार्वजनिक माफी’ की मांग की। कतर ने भारतीय राजदूत को बुलाकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। इस्लामी दुनिया में गुस्सा न फैले इसके लिए बीजेपी ने तुरंत नुपुर शर्मा को बर्खास्त कर दिया था।

अब आठ पूर्व भारतीय नौसैनिकों की मौत की सजा को भारत क़तर रिश्तों को दूसरी बड़ी चुनौती माना जा रहा है। चूंकि क़तर में लगभग आठ-नौ लाख भारतीय काम करते हैं इसलिए भारत सरकार ऐसा कोई कदम उठाने से बचने की कोशिश करेगी जो वहां भारतीयों के हितों को नुकसान पहुंचे। भारत कतर से प्राकृतिक गैस भी आयात करता है। क़तर प्राकृतिक गैस निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश है। यह मामला ऐसे वक्त में सामने आया है जब गाजा में इजरायल की बमबारी चल रही है और कतर इजरायल और फिलिस्तीन के साथ मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी बंधकों को हमास की कैद से छुड़ाया जा सके।
 
सरकार पर दबाव 
 
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है,”कतर में भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों से संबंधित अत्यंत दुखद घटनाक्रम का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बेहद दुख, पीड़ा और अफ़सोस के साथ संज्ञान लिया है। उन्होंने लिखा,”हम आशा और अपेक्षा करते हैं कि भारत सरकार कतर सरकार के साथ अपने राजनयिक और राजनीतिक प्रभाव का जितना अधिक से अधिक हो सके, उपयोग करेगी। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अधिकारियों को अपील करने में भरपूर सहारा मिले। साथ ही उन्हें जल्द से जल्द रिहा कराने के लिए भी हर संभव प्रयास किए जाएं।’

इस बीच, एआईएमआईएम के चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर लिखा,’पीएम नरेंद्र मोदी को सभी पूर्व कर्मियों को वापस लाना चाहिए। अगस्त में मैंने कतर में फंसे नौसेना के पूर्व अधिकारियों का मुद्दा उठाया था। आज उन्हें मौत की सजा सुनाई गई है। पीएम मोदी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं कि इस्लामिक मुल्क उनसे कितना प्यार करते हैं। उन्हें पूर्व अधिकारियों को वापस लाना चाहिए। ये बेहद ही दुर्भाग्य की बात है कि उन्हें मौत की सजा का सामना करना पड़ रहा है।’

वरिष्ठ पत्रकार शीला भट्ट ने लिखा, ‘जब भारत सरकार निजी कंपनी में काम करने वाले नौसेना के पूर्व अधिकारियों की मदद करने की कोशिश कर रही थी तो कतर झुकने को तैयार नहीं दिख रहा था क्योंकि वे इसके जरिये सौदेबाजी करना चाहते हैं। क़तर इस क्षेत्र में तुर्की और ईरान के साथ मिलकर बड़ा खेल खेल रहा है। इसे संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के साथ भारत के स्थिर द्विपक्षीय संबंध पसंद नहीं हैं।’

You may also like