राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल से बातचीत भाजपा कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के होते हुए क्षेत्रीय पार्टी की जरूरत क्यों आन पड़ी?
देखिए, हमारा साफ मानना है कि ‘दिल्ली वाले दल सबसे बड़ा छल, एक ही हल उत्तराखण्ड का क्षेत्रीय दल।’ यह इसलिए कहते हैं कि इन 23-24 सालों में उत्तराखण्ड में जो पलायन, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी बढ़ी है, उसके पीछे यही दल जिम्मेदार हैं। हमसे हमारा संविधान के द्वारा दिया गया मूल निवास-1950 जैसा अधिकार छीन लिया गया। पिछले दो सरकारों में भू कानून को लगभग खत्म ही कर दिया गया। दरअसल, जब तक राज्य का अपना क्षेत्रीय दल नहीं होगा, तब तक मूल अधिकार खत्म होते रहेंगे।
आप अक्सर अपने भाषणों मे कहते हैं कि उत्तराखण्ड दिल्ली वाले दलों का उपनिवेश बन गया?
देखिए, गुलामी के समय भी भारत इंग्लैंड का उपनिवेश था। भारत पर भारत के बाहर से शासन होता था और भारत के संसाधन भारत के बाहर चले जाते थे। इसी तरीके से आज भी उत्तराखण्ड में उत्तराखण्ड के बाहर से शासन हो रहा है। उत्तराखण्ड के बाहर की पार्टियां यहां पर शासन कर रही हैं। बाहर के नेताओं का यहां पर पूरा-पूरा दखल है। उत्तराखण्ड के बाहर की पार्टियों के बड़े नेताओं के यहां पर अधिकांश निवेश हैं और उत्तराखण्ड के तमाम रोजगार के अवसर नौकरियां और संसाधन उत्तराखण्ड से बाहर चले जा रहे हैं। इसलिए हम कहते हैं कि उत्तराखण्ड को बाहर की पार्टियों ने अपना उपनिवेश बना लिया है। उत्तराखण्ड के नेता उन्हीं के रिमोट कंट्रोल पर कठपुतली की तरह काम करते हैं। इस सबसे उभरने के लिए यहां पर एक सशक्त क्षेत्रीय दल की जरूरत है।
अगर आपकी क्षेत्रीय पार्टी सत्ता में आई तो आप क्या करेंगे?
उत्तराखण्ड में इन 23 -24 सालों में या तो जनता को मित्र विपक्ष मिला है या फिर मृत्य विपक्ष। इसलिए जितना जरूरी सत्ता है, उससे कहीं अधिक एक मजबूत विपक्ष की भी जरूरत है। चाहे वह मजबूत विपक्ष सड़कों पर दिखे या फिर सदन में, लेकिन एक सत्ता को जनता के प्रति ज्यादा जवाबदेह बनाने के लिए एक मजबूत विपक्ष की भी जरूरत है और वही हम कर रहे हैं। अभी हम सड़कों पर लड़ रहे हैं जिस दिन जनादेश मिलेगा, उस दिन सदन में भी करेंगे?
आपकी क्षेत्रीय पार्टी के क्या अलग मुद्दे हैं?
प्रत्येक राज्य के कुछ अपने विषय होते हैं लेकिन उन विषयों को पूरे देश में संगठन चलाने वाली राजनीतिक पार्टियों नहीं आत्मसात कर सकती। इसलिए आपने देखा होगा कि जिन राज्यों में क्षेत्रीय दल सत्ता में हैं या मजबूत विपक्ष की स्थिति में हैं, वहां पर जनता के मुद्दे ज्यादा अच्छे ढंग से हल होते हैं और वहां की सरकारें जनता के प्रति ज्यादा जवाबदेह हैं। उत्तराखण्ड में भी मूल निवास 1950 का अधिकार हमें संविधान और राष्ट्रपति के नोटिफिकेशन से मिला है लेकिन यहां की सरकारों ने असंवैधानिक रूप से यह अधिकार हमसे छीन लिया है। अगर भू-कानून इसी तरह से खत्म होता रहा तो न सिर्फ उत्तराखण्ड की पूरी डेमोग्राफी बदल जाएगी, बल्कि एक दिन उत्तराखण्ड की पहचान इस हद तक बदल जाएगी कि उत्तराखण्ड राज्य का औचित्य ही खत्म हो जाएगा। इसको रोकने के लिए यहां पर क्षेत्रीय दल का होना बहुत जरूरी है। क्योंकि इन 23-24 सालों में भू-कानून को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय पार्टियां ही जिम्मेदार रही हैं।
मूल निवास, भू-कानून के अलावा और आपके क्या मुद्दे हैं?
बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे इस राज्य के लिए सबसे अहम मुद्दे हैं। इन दोनों समस्याओं के कारण प्रदेश की युवाओं की और प्रदेश की आर्थिक रीढ की हड्डी टूट चुकी है। लेकिन अब तक की सरकारें इन समस्याओं के प्रति जरा भी गंभीर नहीं रही ं, बल्कि बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के लिए सीधे-सीधे जिम्मेदार हैं। 100 दिन में लोकायुक्त लाने का वादा करके वर्ष 2017 में सत्ता में आई भाजपा अभी तक लोकायुक्त को ठंडे बस्ते में डालकर बैठी हुई है। वहीं पेपर लीक घोटाले मे सीबीआई जांच कराने के बजाय घोटालेबाजों को बचाती रही हैं। खनन घोटाले, उद्यान घोटाले और त्रिवेंद्र सरकार के रिश्वत घोटाले में तो हाई कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के बावजूद जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली भाजपा सरकार सीबीआई जांच रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक चली गई। आखिर यह कैसा जीरो टॉलरेंस है। प्रदेश की जनता भ्रष्टाचार पर सरकार के दोहरे चरित्र को समझ रही है। इसलिए अब राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के साथ लोग जुड़ रहे हैं।
आपकी पार्टी का नाम राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी रखने के पीछे क्या कारण था?
अब उत्तराखण्ड की जनता को राष्ट्रवाद के जुमले से और ज्यादा बहलाया नहीं जा सकता। हम राष्ट्रवादी हैं लेकिन हमारा मानना है कि जो प्रदेश भक्त नहीं है वह देशभक्त भी नहीं हो सकता। जो अपने घर से बाहर प्यार नहीं करता उसका देश प्रेम भी झूठा है। सरकारें राज्य की मूलभूत समस्याओं को अनदेखा करने के लिए अब जनता को धर्म के आधार पर बांटने की राजनीति और नहीं चल सकती। इसलिए यहां पर एक ऐसी राजनीतिक विचारधारा की जरूरत है जो राष्ट्रवादी तो हो लेकिन रीजनल भी हो। इसलिए हमने इसी विचारधारा के तहत पार्टी का भी नामकरण किया।

