दिल्ली में 18 लाख प्रवासी उत्तराखण्डियों के बीच मुख्यमंत्री धामी ने अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी। दिल्ली की कुल 23 विधानसभा में धामी ने चुनावी रैलियां की जिसमें 18 पर भाजपा को जीत मिली। निश्चित तौर पर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री धामी ने पिछले कुछ समय में भाजपा के लिए एक भरोसेमंद प्रचारक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। धामी इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में भी देशभर में स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल थे। मतदाताओं के बीच उनके सटीक भाषणों से युवाओं से जुड़ने की उनकी क्षमता और पहाड़ी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने का उनका कौशल सराहा गया। देश में पहली बार उत्तराखण्ड में यूसीसी लागू कर राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो रहे मुख्यमंत्री धामी को भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व हिंदुत्व के रूप में आगे बढ़ा रहा है
‘दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी से जीत मिली है। अब दिल्ली का विकास डबल इंजन सरकार में तेजी से होगा। भाजपा अपने संकल्प पत्र में किए सभी वादों को पूरा करेगी। 27 साल बाद देश की राजधानी से गैर भाजपा सरकारों की विदाई हुई। भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड है कि पार्टी संकल्प पत्र में जो भी बातें कहती है, उनको पूरा जरूर करती है।’
दिल्ली के चुनावी दंगल को जीतने के बाद उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक पत्रकार वार्ता में अपने मन की उक्त बात कही। मुख्यमंत्री धामी दिल्ली विधानसभा में निभाई गई अपनी स्टार प्रचारक की भूमिका में सफल रहे हैं। दिल्ली में लोकसभा चुनाव में प्रचार कर सातों सीटों पर परचम लहराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी अपना जलवा कायम रखा। धामी के नेतृत्व और आक्रामक प्रचार शैली का ऐसा असर रहा कि जिन 23 सीटों पर उन्होंने प्रचार किया, उनमें से 18 पर भाजपा को जीत मिली है। इस तरह मुख्यमंत्री धामी के प्रचार वाली सीटों पर पार्टी को 78 प्रतिशत सफलता मिली है। माना जा रहा है कि इससे उनका राष्ट्रीय राजनीति में कद और मजबूत हुआ है।
दिल्ली में उनके लोकप्रिय चुनावी प्रचार अभियान के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री धामी की सधी हुई रणनीति और आक्रामक प्रचार शैली ने एक बार फिर उन्हें मजबूत नेताओं में सुमार किया है। इससे वे भविष्य में पार्टी के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय नेता बन उभर सकते हैं। विशेष रूप से युवा नेतृत्व के रूप में उनका उभरना भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकता है। कहा भी जाने लगा है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व धामी को हिंदुत्व का चेहरा बनाकर देश में पेश कर सकती है। चुनाव नतीजों के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच ‘धामी मैजिक’ की हो रही चर्चा से इसे बल मिलता दिखाई दे रहा है।
भाजपा ने दिल्ली चुनाव के लिए कुल 40 स्टार प्रचारकों की सूची तैयार की थी। इस सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई केंद्रीय मंत्री शामिल थे। जिनमें भाजपा शासित राज्यों के सात मुख्यमंत्रियों को भी प्रचार की जिम्मेदारी दी गई थी। इनमें उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा जैसे दिग्गज नेताओं के नाम भी शामिल रहे।
उत्तराखण्ड देश का ऐसा पहला राज्य है, जिसने समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा से पारित कराया और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह अधिनियम लागू कराया है। देशभर में इस पहल के लिए मुख्यमंत्री धामी चर्चा के केंद्र में रहे हैं। इसके साथ ही उत्तराखण्ड में भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने को सख्त कानून बनाया तथा लव जिहाद के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने और दंगारोधी कानून को लेकर भी धामी ने राष्ट्रीय स्तर पर सराहना बटोरी। इन फैसलों से निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री धामी का कद बढ़ा है। धामी सरकार के ऐसे बड़े फैसलों को देश में व्यापक फलक पर देखा जा रहा है। माना जा रहा कि इस सबके दृष्टिगत ही पार्टी ने उन्हें दिल्ली विधानसभा चुनाव में स्टार प्रचारकों की सूची में स्थान दिया है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली में जिन उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया, उनमें से 18 ने जीत दर्ज की है। जिनमें कस्तूरबा नगर से नीरज बैसोया, मोती नगर से हरीश खुराना, शालीमार बाग से रेखा गुप्ता, आरके पुरम से अनिल शर्मा, ग्रेटर कैलाश से शिखा राय, पटपड़गंज से रविंद्र सिंह नेगी, करावल नगर से कपिल मिश्रा और रिठाला से कुलवंत राणा ने जीत दर्ज की है। इसी के साथ द्वारका से प्रद्युम्न राजपूत, नजफगढ़ से नीलम पहलवान, मटियाला से संदीप सहरावत, लक्ष्मी नगर से अभय वर्मा, संगम विहार से चंदन कुमार चौधरी, उत्तम नगर से पवन शर्मा, पालम से कुलदीप सोलंकी, वजीरपुर से पूनम शर्मा और बवाना से रविंद्र इंद्राज सिंह ने जीत का फरचम लहराया है। इन सभी सीटों पर मुख्यमंत्री धामी ने जनसभाएं और रोड शो किए थे। जिनका सीधा लाभ भाजपा के उम्मीदवारों को मिला है।
पार्टी के केंद्रीय संगठन ने मुख्यमंत्री धामी को दिल्ली में मिली बड़ी जीत के लिए अहम भूमिका निभाने वाला मुख्यमंत्री बताया है। भाजपा का दावा है कि सीएम धामी के दिल्ली जाने से 18 लाख से अधिक उत्तराखण्डी प्रवासियों ने भाजपा के पक्ष में एकजुट होकर कमल के फूल को खिलाया। बताया जाता है कि दिल्ली की कई विधानसभाओं में उत्तराखण्ड मूल के लगभग 18 लाख मतदाता हैं। इनमें नई दिल्ली, आरके पुरम, तिमारपुर, कस्तूरबा नगर, बदरपुर, संगम विहार, देवली, पालम, द्वारका, किराड़ी, बुराड़ी, घोंडा, करावल नगर और पटपड़गंज में बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड के लोग रहते हैं। इसके साथ ही लक्ष्मी नगर, त्रिलोकपुरी, शाहदरा, सीमापुरी, रोहिणी, छतरपुर और महरौली विधानसभा सीटों में भी उत्तराखण्डी मतदाताओं की संख्या इतनी है कि वे परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियों से उत्तराखण्ड मूल के कुल 9 नेता चुनावी रण में थे। जिसमें से भाजपा प्रत्याशी मोहन सिंह बिष्ट और रविंद्र सिंह नेगी ने जीत हासिल की है। रविंद्र सिंह नेगी ने पटपड़गंज से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी अवध ओझा को 23,000 वोटों से हराया है। जबकि मोहन सिंह बिष्ट ने मुस्तफाबाद सीट से आम आदमी पार्टी के अदील अहमद खान को शिकस्त दी।
भाजपा से बगावत करने वाले योगेश्वर सिंह बिष्ट को बसपा ने महरौली सीट से टिकट दिया था। योगेश्वर भाजपा युवा मोर्चा में प्रदेश पदाधिकारी और आरएसएस में विभिन्न दायित्वों पर रहे हैं। लेकिन वह यह चुनाव हार गए। इसी सीट पर उत्तराखण्ड मूल के महावीर सिंह ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ा. वो भी हार गए। इनके अलावा बुराड़ी से प्रेमा रावत, करावल नगर से अजय सिंह नेगी, संगम विहार से सुधीर नेगी और देवली (सुरक्षित) से बचन राम भी चुनावी मैदान में उतरे थे लेकिन इन्हें भी हार का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री धामी ने दिल्ली में चुनावी सभाओं में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की डबल इंजन सरकार के ऐतिहासिक कार्यों को उजागर करते हुए आम आदमी पार्टी की सरकार को कई मोर्चों पर घेरा था। उन्होंने यमुना नदी की स्वच्छता, भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और शराब माफिया को बढ़ावा देने जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला किया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यमुना नदी में जहर मिलाने की बात करने वाले अरविंद केजरीवाल की मानसिकता ही जहरीली है। अगर झूठ बोलने की कोई प्रतियोगिता होती तो वे निश्चय ही गोल्ड मेडल लाते।
एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली के जन-जन की यही पुकार, डबल इंजन सरकार चुनेंगे इस बार। इस दौरान लोगों को सम्बोधित करते हुए वे यह भी बताना नहीं भूलते थे कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी कांग्रेस के भ्रष्टाचार को दिखाकर सत्ता में आई थी, लेकिन उसने भ्रष्टाचार करने के मामले में कांग्रेस को भी पीछे छोड़ दिया। अब सभी लोग केजरीवाल और उनकी पार्टी की असलियत को पहचान चुके हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री और कई विधायकों तक को भ्रष्टाचार के मामलों में जेल की हवा खानी पड़ी है। अब समय आ गया है कि जनता अपने वोट की चोट से इन भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाए। विकास को प्राथमिकता देने वाली भाजपा को सत्ता में लाए। निश्चित तौर पर इस विधानसभा चुनाव में दिल्ली की देवतुल्य जनता के आशीर्वाद से डबल इंजन सरकार बनने जा रही है।
उत्तराखण्ड में जिताने वाले दिल्ली में हारे
दुष्यंत गौतम, वह नाम जो दिल्ली विधानसभा चुनावों में चर्चाओं में रहा। चर्चा है कि यह वह चेहरा था जिसे भाजपा ने बतौर सीएम चुनावी मैदान में उतारा था। उत्तराखण्ड में पार्टी प्रभारी रह लोकसभा और नगर निकाय चुनावों में फतह दिलाने के लिए गौतम की सांगठनिक रणनीतियों को अहम माना जाता है। लेकिन जब वह दिल्ली में चुनाव लड़े तो अपने किले को ढहने से बचा नहीं पाए। गौतम भाजपा के दिग्गज नेताओं में से एक हैं। वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं। इसके साथ ही वे दलित समाज से आते हैं। जिसके कारण वे भाजपा के सम्भावित सीएम फेस के तौर पर सुर्खियों में रहे। बताया जाता है कि दुष्यंत गौतम की कैडर पर अच्छी पकड़ है। कहा भी जाता है कि पार्टी जब भी कहीं फंसती नजर आती है तो दुष्यंत गौतम को याद किया जाता है। उत्तराखण्ड में भाजपा की जीत में दुष्यंत गौतम का बड़ा हाथ रहा है। उनकी संगठन पर मजबूत पकड़ का ही नतीजा रहा कि भाजपा ने उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव में जीत का इतिहास रचा। दुष्यंत गौतम की सांगठनिक क्षमता बेजोड़ बताई जाती है। उनकी जोरदार कार्यशैली, मिलनसार स्वभाव उन्हें संगठन में शीर्ष पर पहुंचाता है। इसके अलावा जमीनी स्तर पर रणनीति बनाने में भी दुष्यंत को अव्वल माना जाता है।
लोकसभा चुनाव में भी दुष्यंत गौतम के नेतृत्व में उत्तराखण्ड की पांचों सीटों पर कमाल खिला। पिछले दिनों हुए नगर निकाय चुनाव में भी भाजपा को 11 नगर निगम में से 10 पर जीत हासिल हुई थी। दुष्यंत गौतम के एक के बाद एक करिश्मे को देखते हुए भाजपा ने उन्हें दिल्ली विधानसभा में करोलबाग से चुनावी मैदान में उतारा था। इस चुनाव में दुष्यंत गौतम ने पूरी जान लगा दी। यहां तक कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उनके क्षेत्र में चुनावी जनसभाएं कीं। इसके बाद भी दुष्यंत गौतम चुनाव नहीं जीत सके। करोलबाग सीट पर आम आदमी पार्टी के विशेष रवि ने दुष्यंत गौतम को हरा दिया। दुष्यंत गौतम की इस हार के बाद उनके उत्तराखण्ड में प्रभारी पद पर बने रहने पर सवालिया निशान लग सकते हैं। प्रदेश में नेताओं का एक ऐसा वर्ग है जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ सत्ता की पगडंडी पर चलकर सूबे को आगे बढ़ाने वालों के लिए स्पीड ब्रेकर का काम करने को तत्पर रहता है। वह वर्ग ऐसे में दुष्यंत गौतम के प्रभारी पद पर बने रहने पर सियासी दवाब बना सकता है।

