घाटी में सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीदों पर उस समय पानी फिर गया, जब अनंतनाग जिले के बायसारन घाटी में 22 अप्रैल की दोपहर करीब 1ः45 बजे छह हथियारबंद आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया। ये आतंकी जंगल की ओर से आए और पर्यटकों से नाम व धर्म पूछकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल और खुफिया ब्यूरो के अधिकारी मनीष रंजन शहीद हुए। इसके अलावा 25 भारतीय पर्यटक, 1 नेपाली नागरिक और 1 स्थानीय गाइड की मौत हुई, जबकि 17 लोग गम्भीर रूप से घायल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमले के वक्त सऊदी अरब के दौरे पर थे, जिसे उन्होंने तुरंत बीच में छोड़कर दिल्ली लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने हमले को ‘कायरता की पराकाष्ठा’ बताते हुए कहा -‘भारत इस घिनौने हमले को भूलेगा नहीं। दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। खून बहाने वालों को अब पानी नहीं मिलेगा।’ इसके साथ ही केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ 1960 में हुई सिंधु जल संधि को निलम्बित कर दिया – यह एक ऐतिहासिक और रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। 2024 में जम्मू-कश्मीर के पर्यटन का जीडीपी में 8 प्रतिशत योगदान था। पहलगाम, बेताब घाटी, शेषनाग और अरु वैली जैसे स्थल अब भय और पीड़ा के प्रतीक बन गए हैं। सरकार ने नए सुरक्षा उपायों और प्रचार अभियानों की घोषणा की है ताकि पर्यटकों का भरोसा दोबारा बहाल किया जा सके
बाईस अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम की बायसारन घाटी में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में 28 लोग मारे गए, जिनमें भारतीय पर्यटक, एक नेपाली नागरिक और एक स्थानीय गाइड शामिल थे, जबकि 17 अन्य घायल हुए। ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ नामक आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। इस कायराना हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करने का ऐलान करते हुए सख्त रुख अपनाया और कहा – ‘हम न खून बहाने देंगे, न पानी।’
घाटी में सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीदों पर उस समय पानी फिर गया, जब अनंतनाग जिले के बायसारन घाटी में 22 अप्रैल की दोपहर करीब 1ः45 बजे छह हथियारबंद आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया। ये आतंकी जंगल की ओर से आए और पर्यटकों से नाम व धर्म पूछकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल और खुफिया ब्यूरो के अधिकारी मनीष रंजन शहीद हुए। इसके अलावा 25 भारतीय पर्यटक, 1 नेपाली नागरिक और 1 स्थानीय गाइड की मौत हुई, जबकि 17 लोग गम्भीर रूप से घायल हुए।
लश्कर समर्थित ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली जिम्मेदारी


हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा समर्थित आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ)’ ने ली है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हमले की योजना लश्कर के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह खालिद ने बनाई थी, जो हाफिज सईद का करीबी है।
तीन आतंकियों के स्केच जारी किए गए हैं – आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबु तल्हा। हमले में शामिल आतंकियों में दो पाकिस्तानी और दो कश्मीरी बताए जा रहे हैं। उनका मकसद अधिकतम जनहानि और धार्मिक उकसावे को अंजाम देना था।
प्रधानमंत्री ने छोड़ा सऊदी दौरा, सिंधु जल संधि निलम्बित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमले के वक्त सऊदी अरब के दौरे पर थे, जिसे उन्होंने तुरंत बीच में छोड़कर दिल्ली लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने हमले को ‘कायरता की पराकाष्ठा’ बताते हुए कहा – ‘भारत इस घिनौने हमले को भूलेगा नहीं। दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। खून बहाने वालों को अब पानी नहीं मिलेगा।’

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ 1960 में हुई सिंधु जल संधि को निलम्बित कर दिया – यह एक ऐतिहासिक और रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। गृहमंत्री अमित शाह ने श्रीनगर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और एनआईए-आईबी की संयुक्त टीम जांच के लिए रवाना कर दी गई है।
आतंक का इनकार, पर उकसावे की भाषा जारी
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के हालिया बयान – ‘कश्मीर हमारी गले की नस है’, को इस हमले की पृष्ठभूमि से जोड़ा जा रहा है। हमले के बाद पाकिस्तान ने इसे भारत का ‘अंदरूनी मामला’ बताते हुए बलूचिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप का आरोप लगाया।
पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ जैसे नेता खुलकर भारत को धमकी देते नजर आए, जिससे पाकिस्तान की भूमिका और अधिक संदेह के घेरे में आ गई है।
भारत के साथ एकजुटता
अमेरिका और रूस ने भारत के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई। इजरायल ने इस हमले को ‘हमास जैसी रणनीति’ बताया और भारत से हमास को आतंकी संगठन घोषित करने की मांग की। इटली, जापान और फ्रांस जैसे देशों ने भारत की आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई का समर्थन किया।

पर्यटन और भरोसे पर गहरा असर
2024 में जम्मू-कश्मीर के पर्यटन का जीडीपी में 8 प्रतिशत योगदान था। पहलगाम, बेताब घाटी, शेषनाग और अरु वैली जैसे स्थल अब भय और पीड़ा के प्रतीक बन गए हैं। सरकार ने नए सुरक्षा उपायों और प्रचार अभियानों की घोषणा की है ताकि पर्यटकों का भरोसा दोबारा बहाल किया जा सके। पहलगाम हमला केवल आतंक का चेहरा नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के धैर्य की परीक्षा थी। भारत ने अब स्पष्ट कर दिया है – जो खून बहाएगा, उसे पानी नहीं मिलेगा। कूटनीति, सुरक्षा और जलनीति – तीनों मोर्चों पर अब निर्णायक लड़ाई शुरू हो चुकी है।
भारत ने पाकिस्तान के सैन्य राजनयिकों को किया निष्कासित, वीजा छूट योजना भी रद्द
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार लगातार कठोर कदम उठा रही है। ताजा निर्णय के तहत पाकिस्तानी नागरिक अब सार्क वीजा छूट योजना के तहत भारत की यात्रा नहीं कर सकेंगे। पहले से जारी सभी वीजा रद्द माने जाएंगे और इस योजना के तहत भारत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही भारत ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के रक्षा, नौसेना और वायुसेना सलाहकारों को ‘पर्सोना नाॅन ग्रेटा’ (अवांछित व्यक्ति) घोषित कर दिया है। उन्हें एक सप्ताह के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।
भारत ने इस्लामाबाद में स्थित अपने उच्चायोग से भी इन्हीं समकक्ष पदों पर तैनात सैन्य अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से वापस बुलाने का निर्णय लिया है, और दोनों देशों के उच्चायोगों में इन पदों को स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा की है। इन सैन्य सलाहकारों के साथ तैनात पांच सपोर्ट स्टाफ को भी तत्काल प्रभाव से वापस बुलाया जाएगा। साथ ही, दोनों उच्चायोगों में कार्यरत कुल कर्मचारियों की संख्या 1 मई 2025 से घटाकर 55 से 30 कर दी जाएगी।
भारत का यह कदम स्पष्ट संकेत है कि अब पाकिस्तान के साथ राजनयिक और सैन्य संवाद की प्रकृति ‘नाॅर्मल बिजनेस’ जैसी नहीं रह सकती, जब तक आतंक के स्त्रोतों पर निर्णायक कार्यवाही नहीं की जाती। यह भारत की बदलती विदेश नीति की दिशा का स्पष्ट प्रतिबिंब है – कूटनीति अब जवाबदेही से जुड़ी होगी।

