संयुक्त राज्य अमेरिका 1960 के दशक से इजराइल का प्रबल समर्थक रहा है। यही वजह रही कि अमेरिका की विदेश नीति में इजरायल के साथ संबंध एक महत्वपूर्ण कारक दशकों से बना रहा है। इजरायल अमेरिकी विदेशी सहायता नीति का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता रहा है। अमेरिका इजरायल का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार भी है। साल 2023 तक दो-तरफा व्यापार लगभग 50 बिलियन से ज्यादा हो गया। वित्तीय और सैन्य सहायता के अलावा, अमेरिका बड़े पैमाने पर राजनीतिक समर्थन प्रदान करता है, उसने इजराइल की निंदा करने वाले प्रस्तावों के खिलाफ 42 बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वीटो शक्ति का उपयोग किया है। लेकिन गाजा-इजरायल के बीच जारी जंग ने इजरायल और अमेरिका के बीच खटास ला दी है। मौजूदा समय में दोनों मुल्कों के बीच तनाव की स्थिति बढ़ती जा रही। अमेरिका इजरायल का साथ देता रहा है लेकिन मौजूदा समय में उसने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं
संयुक्त राज्य अमेरिका 1960 के दशक से इजराइल का प्रबल समर्थक रहा है। यही वजह रही कि अमेरिका की विदेश नीति में इजरायल के साथ संबंध एक महत्वपूर्ण कारक दशकों से बना रहा है। इजरायल अमेरिकी विदेशी सहायता नीति का सबसे बड़ा प्राप्त कर्ता रहा है। फरवरी 2022 तक, अमेरिका ने इजरायल को 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर देकर सहायता प्रदान की थी। इससे पहले 1999 में, अमेरिकी सरकार ने इजराइल को दस वर्षों तक सालाना कम से कम 2.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सैन्य सहायता प्रदान करने की प्रतिबद्धता पर हस्ताक्षर किए। 2009 में इसे बढ़ाकर 3 बिलियन से ज्यादा कर दिया गया, और 2019 में न्यूनतम 3.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ गया। इसके अलावा साल 1972 से, अमेरिका ने आवास की कमी, नए यहूदी आप्रवासियों के अवशोषण और आर्थिक सुधार में सहायता के लिए इजरायल को ऋण गारंटी भी दी। अमेरिका इजरायल का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार भी है। साल 2023 तक दो-तरफा व्यापार लगभग 50 बिलियन से ज्यादा का हो गया। वित्तीय और सैन्य सहायता के अलावा, अमेरिका बड़े पैमाने पर राजनीतिक समर्थन प्रदान करता है, उसने इजराइल की निंदा करने वाले प्रस्तावों के खिलाफ 42 बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वीटो शक्ति का उपयोग किया है। लेकिन गांजा-इजरायल के बीच जारी जंग ने इजरायल और अमेरिका के बीच खटास ला दी है। मौजूदा समय में दोनों मुल्कों के बीच तनाव की स्थिति बढ़ती जा रही। अमेरिका इजरायल का साथ देता रहा है लेकिन मौजूदा समय में उसने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
अमेरिका-इजरायल में खटास और तनाव की स्थिति लगातार देखी जा सकती है। एक महीने से ज्यादा समय तक दोनों में बोलचाल बंद थी, अब बातचीत हो रही है तो उसमें कड़वाहट और धमकियों के सुर गूंज रहे हैं। पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए क्रूर हमले के बाद से बिडेन और नेतन्याहू के बीच 6 मई को 20वीं कॉल हुई थी। यह कॉल के बीच में सबसे लंबे अंतराल यानी 32 दिन को भी चिन्हित करता है। इससे पहले 23 दिसंबर से 19 जनवरी तक, दोनों के बीच बिना बात किए बिताए सबसे लंबे समय 26 दिन थे। दोनों देशों के बीच रिश्ते कई महीनों से अस्थिर चल रहे हैं। इसमें एक कारण यह भी है कि राष्ट्रपति जो बाइडेन को इजरायल के लिए अमेरिकी समर्थन पर डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील विंग के दबाव का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि गाजा में हजारों फिलिस्तीनी मारे गए हैं। हाल ही में बाइडेन ने एमएसएनबीसी टीवी चैनल पर एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि इजराइल रक्षा बलों द्वारा राफा पर आक्रमण उनके लिए एक ‘लाल रेखा’ होगी। इजरायल द्वारा राफा पर हमला करने की ओर इशारा करते हुए बाइडेन ने कहा कि ‘वहां कोई लाल रेखा नहीं है जहां मैं सभी हथियारों को काट दूं ताकि उनकी सुरक्षा के लिए उनके पास आयरन डोम न हो। लेकिन लाल रेखाएं अगर वह उन्हें पार करता है तो वह 30,000 से अधिक फिलिस्तीनियों को नहीं मार सकता।’
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 8 मई को पहली बार सार्वजनिक रूप से इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर इजरायली सेना दक्षिण गाजा में शरणार्थियों से भरे शहर राफा पर हमला करती है तो अमेरिका हथियारों की आपूर्ति बंद कर देगा। इसी राह पर कदम बढ़ाते हुए हाल ही में इजरायल द्वारा राफा पर हमले किए जाने के बाद अमेरिका ने बमों की बड़ी खेप को इजरायल भेजे जाने से रोक दिया। अमेरिका को संदेह था कि इजरायल इन बमों का प्रयोग राफा अभियान में कर सकता है। अमेरिका इजरायल द्वारा राफा पर हमले किये जाने का लगातार विरोध करता आया है। इजरायल और हमास के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब अमेरिका ने इजरायल भेजे जाने वाले हथियारों की खेप को रोक दिया हो। अमेरिका ने यह फैसला तब लिया जब इजरायली सेना ने राफा में हमला किया।
संयुक्त राष्ट्र ने भी दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन इजरायल के दृढ़ सहयोगी रहे हैं लेकिन देश में बढ़ते इजरायल विरोध प्रदर्शन ने उनके लिए मुश्किल खड़ी कर दी हैं। ऐसे में बाइडन प्रशासन ने इजरायली लड़ाकू विमानों के लिए हथियार और करीब तीन हजार बम भेजना बंद कर दिया है। गाजा में लगातार बढ़ता मानवीय संकट बाइडन की छवि खराब कर रहा है। बाइडन ने इजरायल का साथ सम्भवतः इसलिए भी छोड़ा क्यांेकि इसी साल बाइडन को चुनाव में जाना है। इजरायल को समर्थन से उनको जनमत हासिल करने में दिक्कत हो सकती है। इसी को देखते हुए वह इजरायल से अपना हाथ पीछे खींचते हुए दिख रहे हैं। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इजरायल के खिलाफ उठाए गए इस कदम के बावजूद भी इजरायल को इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इजरायल ने अपने सैन्य अभियान को बढ़ाने के लिए गाजा के दक्षिणी शहर राफा को खाली करने का नया आदेश जारी किया है। राफा को हमास का आखिरी गढ़ माना जाता है। इजरायल के आदेशों के बाद वहां शरण लिए हुए 10 लाख से अधिक नागरिकों में से लगभग 3,00,000 लोग शहर छोड़कर चले गए हैं। इजरायल ने अब राफा के पूर्व के तिहाई हिस्से को खाली करा दिया है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य ने चेतावनी दी है कि इजरायल की योजना के अनुसार राफा पर पूरी तरह से आक्रमण होने से मानवीय कार्य ठप हो जाएंगे और हताहतों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। अमेरिका ने खुद स्वीकार किया हैं कि इजरायल द्वारा गाजा में नागरिकों को मारने के लिए अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल किया गया है। हाल ही में अमेरिका द्वारा भेजे गए 2 हजार पाउंड के बमों के बारे में जो बाइडेन ने कहा है कि उन बमों के अलावा अन्य तरीकों का इस्तेमाल करके भी इजरायल द्वारा गाजा में नागरिकों को मारा गया है। अमेरिकी चेतावनी के बावजूद इजरायल ने इसी सप्ताह राफा पर हमला किया है। यह वो जगह है जहां दस लाख से ज्यादा फिलिस्तीनियों ने शरण ली है। इजरायल लगातार गाजा पर जमीनी और हवाई हमले कर रहा है। इजरायल ने हमास को खत्म करने के उद्देश्य से सात महीने से यह आक्रामक और हिंसक अभियान चलाया हुआ है। पिछले साल 7 अक्टूबर के बाद से गाजापट्टी में मरने वालों की संख्या 35 हजार से अधिक हो गई है।
अमेरिका और इजरायल के बीच परेशानी की एक वजह माकृ 80 सीरीज का बम भी बना हुआ है। अमेरिका द्वारा लगातार चेतावनी के बावजूद इजरायल ने राफा पर हमले कर रहा है। फिलिस्तीन के दूसरे हिस्सों पर हमले के बाद राफा में इस समय लाखों शरणार्थी मौजूद हैं। अमेरिका ने राफा पर हमले से पैदा होने वाले मानवीय संकट की ओर इशारा करते हुए इसका विरोध किया है। दूसरी ओर इजरायल ने अमेरिका के विरोध को दरकिनार कर राफा में रह रहे लोगों से शहर खाली करने को कहा है। इस समय राफा में दस लाख से ज्यादा फिलिस्तीनियों ने शरण ली है। इजरायल द्वारा किए गए हमले को बाइडेन फुल स्केल हमला नहीं मानते हैं क्योंकि उन्होंने जनसंख्या केंद्रों पर हमला नहीं किया है। खबरों के मुताबिक वॉशिंगटन ने राफा में इस्तेमाल होने वाले हथियारों की डिलीवरी की सावधानीपूर्वक समीक्षा की थी और इसके बाद 1,800 2,000-पाउंड (907-किलो) बम और 1,700 500-पाउंड वाले शिपमेंट को रोक दिया गया था। अमेरिका के इस फैसले के बाद 10 मई को इजरायल ने दावा किया कि गाजा के दक्षिणी शहर राफा में सैन्य कार्रवाई करने के लिए जरूरी हथियार उनके पास हैं। इजरायली सेना प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हैगरी से जब सवाल किया गया कि क्या सेना अमेरिकी हथियारों के बिना भी अभियान चला सकती हैं। इस पर डेनियल ने कहा कि सेना के पास उन सभी अभियानों के लिए हथियार हैं जिनकी योजना वो बना रहे हैं। राफा अभियान के लिए वो है जो उन्हें चाहिए। डेनियल की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के उस बयान के बाद आई जिसमें कहा गया था कि अमेरिका वहां हमले के चपेट में नागरिकों के आने की आशंका के मद्देनजर हमास के आखिरी गढ़ राफा में सैन्य कार्यवाई के लिए हथियार आपूर्ति नहीं करेगा।
हमास को सुरक्षित पनाहगाह की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए
इसी साल 18 मार्च को वाशिंगटन के एक महत्वपूर्ण कॉल के दौरान राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को इजरायल द्वारा राफा में एक नियोजित सैन्य अभियान को अंजाम देने के खिलाफ चेतावनी दी थी। इसी संदर्भ में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि हमास को राफा या कहीं और सुरक्षित पनाहगाह की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन वहां एक बड़ा जमीनी अभियान एक गलती होगी, इससे और अधिक निर्दोष नागरिकों की मौत होगी, पहले से ही गंभीर मानवीय संकट और भी खराब हो जाएंगे, गाजा में अराजकता और गहरी हो जाएगी जिससे इजरायल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि गाजा शहर और खान यूनिस से दूर जाने के बाद दस लाख से अधिक लोगों ने मिस्र की सीमा के साथ दक्षिण-पश्चिमी गाजापट्टी के एक शहर राफा में शरण ली है। अमेरिकी राष्ट्रीय सलाहकार के मुताबिक इन शरणार्थियों के लिए और कहीं जाने की जगह नहीं है। इजरायल ने हमें या दुनिया को इस बारे में कोई योजना नहीं दी है कि वे उन नागरिकों को कैसे और कहां सुरक्षित रूप से ले जाएंगे, उन्हें भोजन और आवास की तो बात तो छोड़ ही दो। सुलिवन के मुताबिक राफा मिस्र और इजरायल से गाजा में प्रवेश किया जा सकता है। गाजा में पहुंचने वाली मानवीय सहायता के लिए यह प्रवेश बिंदु है और उन्होंने चेतावनी दी कि ‘एक आक्रमण इसे बंद कर देगा या कम से कम इसे बड़े जोखिम में डाल देगा।’
इजरायल को राफा पर हमला क्यों नहीं करना चाहिए ये समझाने और अमेरिकी चिंताओं को सुनने के लिए ‘सैन्य, खुफिया और मानवीय अधिकारियों से बनी एक वरिष्ठ अंतर-एजेंसी टीम’ को वाशिंगटन भेजने के लिए कहा। उन्होंने पुष्टि की कि नेतन्याहू निमंत्रण पर सहमत हो गए हैं। उस समय उम्मीद जताई जा रही थी कि बातचीत होने तक इजराइल राफा पर आक्रमण नहीं करेगा। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। इजरायल ने गाजा में अपने सैन्य अभियानों में हमास से लड़ते हुए प्रगति की है, निर्दोष फिलिस्तीनियों पर इसका प्रभाव विनाशकारी रहा है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में गाजा में सभी युद्धों की तुलना में अधिक नागरिक मारे गए हैं। अमेरिका के अनुसार लक्ष्य हमास को हराने का होना चाहिए न कि राफा में हमले कर निर्दोष नागरिकों को मारने का। सुलविन के अनुसार राष्ट्रपति ने कई बार प्रधान मंत्री से कहा कि हमारा लक्ष्य हमास को हराना है, लेकिन हमारा मानना है कि ऐसा करने के लिए आपको एक सुसंगत और टिकाऊ रणनीति की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त अमेरिकी राष्ट्रपति ने उत्तर पर विशेष जोर देने के साथ, पूरे गाजा में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने वाली जीवनरक्षक सहायता को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है। बाइडेन ने पहले ही कह दिया था कि यदि इजरायली सरकार फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए एक विश्वसनीय योजना के बिना राफा में जमीनी आक्रमण शुरू न करने की प्रशासन की चेतावनियों को नजरअंदाज करती है तो इसकी प्रतिक्रिया उन्हें मिलेगी। उसके बावजूद पिछले ही हफ्ते नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि उन्होंने वहां जमीनी हमले की योजना को मंजूरी दे दी है और सेना ‘परिचालन पक्ष और आबादी की निकासी के लिए तैयारी कर रही है।’
दोस्त, दोस्त न रहा


संयुक्त राज्य अमेरिका 1960 के दशक से इजराइल का प्रबल समर्थक