दिल्ली.एनसीआर में वर्षों से आग लगने की घटनाएं होती आ रही हैं। सिनेमा हाॅलए होटलए अस्पताल कहीं भी यह विश्वास कर पाना काफी कठिन है कि जिंदगी यहां सुरक्षित है। ऐसे में शासन.प्रशासन को सबसे ज्यादा ध्यान स्कूलों की तरफ देना होगा। देखना होगा कि स्कूलों में आग नियंत्रित करने के पर्याप्त प्रबंध हैं भी या नहीं
करोलबाग के अर्पित होटल अग्नि कांड ने 21 साल पहले उपहार सिनेमा कांड की याद ताजा कर दी है। दोनों ही घटनाएं मानवीय भूल नहींए बल्कि लापरवाही और भ्रष्टाचार का उदाहरण हैं। उपहार की घटना में जहां साठ के करीब आम लोग जिंदा जल गए थेए वहीं अर्पित अग्नि कांड में 17 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। अमीरजदा और रसूख वाले किस तरह कायदे.कानून का माखौल उड़ाते हैंए यह दोनों घटनाओं से समझा जा सकता है। आम लोगों की जिंदगी रसूखदारों के लिए कोई मायने नहीं रखती। तभी तो उपहार कांड के आरोपी अंसल बंधु कोर्ट से छूट जाते हैं और आम लोगों पर कानून का कोड़ा बरसाया जाता है।
अनदेखी और लापरवाही के कारण ही एक बार फिर भीषण आग ने कहर बरपाया है। राजधानी दिल्ली के करोलबाग स्थित होटल अर्पित पैलेस में 12 फरवरी की तड़के तीसरी मंजिल पर शाॅर्ट सर्किट की एक छोटी सी चिंगारी ने देखते ही देखते भीषण आग का रूप ले लिया। इस वजह से 17 लोगों की मौत हो गई और तीन लोग बुरी तरह झुलस गए। मृतकों में दस पुरुषए छह महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल हैं। मृतकों में से अधिकतर लोग केरल के थे और कुछ विदेशी पर्यटक थे। 45 कमरों वाले इस होटल में 53 लोग थेए जो घटना के समय गहरी नींद में थे।
दम घुटने से जागे लोगों में हड़कंप मच गया और वे भागने लगे। लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला तो कुछ लोग छत पर चले गए। बचने के लिए म्यांमार के दो पर्यटक छत से कूद गए जिनकी मौत हो गई। शेष लोग दम घुटने से मर गए। ये हादसा इसलिए हुआ क्योंकि जिन पर भी इस होटल को नियम.कायदे के हिसाब से चलाने की जिम्मेदारी थीए उन सबने हद दर्जे की लापरवाही बरत रखी थी। यह अग्निकांड जरूर हैए लेकिन इसके पीछे का मुख्य कारण बरती गई लापरवाहीए अनदेखी और विभागीय भ्रष्टाचार की व्यवस्था ही है। होटल छह मंजिला थाए जिसमें सुरक्षा के उपाय होने चाहिए थेए जो पर्याप्त नहीं थे। एक आपातकालीन गेट तो थाए लेकिन काफी छोटा था और फिर उस पर ताला भी जड़ा था। भ्रष्टाचार यहीं खत्म नहीं होता। इसे गेस्ट हाउस का लाइसेंस प्राप्त था। मगर इसके मालिक ने इसे 3.4 स्टार होटल में तब्दील कर दिया था।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के करीब करोलबाग में 2 किलोमीटर की परिधि में एक सौ से भी ज्यादा होटल हैं। करोलबाग के अलावा स्टेशन से लगे पहाड़गंज में तो ऐसे होटलों की कोई गिनती नहीं है। पहाड़गंज इलाके की गलियां इतनी संकरी और पतली हैं कि यदि इस तरह की कोई घटना वहां हो जाए तो अग्निशमन की गाड़ियां पहुंच भी नहीं सकती। फिर भी ऐसे इलाकों में सैकड़ों होटल चल रहे हैं। जैसा कि पहले से होता आ रहा है। दिल्ली सरकार और एमसीडी में एक पार्टी की सत्ता नहीं होने पर लापरवाही का ठीकरा एक.दूसरे के सिर फोड़ दिया जाता है। अर्पित होटल अग्निकांड पर भी दिल्ली सरकार एमसीडी की लापरवाही बता रही है तो एमसीडी दिल्ली सरकार की। मगर भविष्य में ऐसा कांड दोबारा न हो इसके लिए कोई ठोस कदम उठाए नहीं जा रहे हैं।
अर्पित होटल कांड के बाद दिल्ली सरकार ने एक सौ के करीब होटलों के फायर लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। दिल्ली की जनता सरकार के इस कदम को काफी नहीं मानती। कई लोगों का कहना है कि कुछ समय बाद फिर से अपने पुराने अंदाज में सब कुछ होता रहेगा। इसलिए जरूरी है कि इस पर स्थाई कार्यवाही हो और समय.समय पर होटल से लेकर सभी सार्वजनिक भवनों का निरीक्षण हो। अर्पित होटल ने भी फायर लाइसेंस ले रखे थेए पर आग से बचाव के अन्य संसाधन केवल खानापूर्ति वाले थे। यही कारण रहा कि हादसे के बाद लोगों को जान बचाने का मौका नहीं मिला और होटलकर्मी कुछ उपाय नहीं कर पाए। अर्पित कांड के दिन ही दिल्ली के एक और भवन में भीषण आग लग गई। हालांकि उसमें किसी की जान नहीं गई। 18 फरवरी को भी दिल्ली की एक जूता फैक्ट्री में आग लगी। इसमें एक मजदूर की मौत हो गई। यानी अर्पित कांड के बाद भी प्रशासन सचेत नहीं हुआ है। इससे जाहिर होता है कि दिल्ली की अब तक की सरकारें और प्रशासन अव्वल दर्जे के लापरवाह रहे हैं। दिल्ली में बड़े.बड़े भवनए कई माॅल और होटल हैंए लेकिन व्यावसायिक गतिविधियां अभी भी मनमाने ढंग से चल रही हैं। इससे जाहिर होता है कि उपहार सिनेमा हाॅल कांड से दिल्ली प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।
व्यावसायिक गतिविधियां तब से लेकर आज तक वैसी की वैसी ही चल रही हैं। होटल अग्निकांड से पहले भी कई ऐसे हादसे होने के बावजूद प्रशासन लापरवाही का परिचय देता जा रहा है। दिल्ली में अवैध तरीके से चल रहे कई कारखानों में आग लगने की घटनाएं होती रहती हंै और तो और करोलबाग इलाके में ही ऐसी घटना पिछले दिनों घटी थी। दिल्ली सरकारए नगर निगम के अधिकारी अब होटल अग्निकांड की जांच की बात कर रहे हैं। होटल मालिकों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जा रहा है। होटल महाप्रबंधक और प्रबंधक को गिरफ्तार किया गया है।
प्रत्येक मृतक के परिजनों को पांच.पांच लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की गई हैए लेकिन यह नहीं कहा गया है कि भविष्य में ऐसे हादसे घटित नहीं होंगे। पहले के हादसों पर जांच के आदेशों का क्या नतीजा रहाए यह नहीं बताया जा रहा है। क्यों नहीं कारोबारी स्थलों में सुरक्षा के उपाय पुख्ता बनाने के कदम उठाए जातेघ् क्या कारोबारी स्थल बिना नियम.कायदों के ऐसे ही चलते रहने देना चाहिएघ् प्रशासन ने पिछले हादसों से क्यों नहीं कोई सबक लिया। क्यों नहीं सरकार अपने तंत्र को जवाबदेह बना पा रही हैघ्
यदि सुरक्षा नियम.कायदों पर ध्यान नहीं दिया गया तो ऐसे ही हादसे तो आगे भी होने वाले हैं। होटल अग्निकांड के लिए होटल प्रबंधन तो दोषी है हीए लेकिन दिल्ली सरकार और प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। यदि प्रशासन अपने काम के प्रति प्रतिबद्ध और जिम्मेदार होता तो होटल अग्निकांड घटित नहीं होता और इतने निर्दोष लोगों की मौतें भी नहीं होती।
आग के नियंत्रित होने की घटनाएं सिर्फ दिल्ली में ही नहींए बल्कि दूसरे राज्यों में भी भयानक रूप ले सामने आई हैं। शासन.प्रशासन में जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों को चाहिए कि वे स्कूलों पर विशेष ध्यान दें। हर स्कूल में फायर फाइटर की व्यवस्था दुरुस्त है या नहींए इस पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए। बड़े लोग तो आग लगने पर जैसे.तैसे कूदकर जान बचा भी लेते हैंए लेकिन बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। लिहाजा सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए जाने चाहिए कि वे अपने यहां आग को नियंत्रित करने की पूर्ण व्यवस्था होने के बारे में सुनिश्चित करें।
  • दिल्ली में उपहार सिनेमा अग्निकांड साल 1997 में 13 जून को हुआ था।
  • हाॅल में फिल्म ष्बाॅर्डरष् का शो चल रहा थाए जब ट्रांसफार्मर रूम में आग लगने से लपटें फैल गईं। फिल्म में धमाकों की आवाज थी। दर्शकों को हादसे का पता भी देर से चला।
  • इस हादसे में 59 लोग मारे गएए जबकि 103 जख्मी हुए क्योंकि बाहर निकलने के रास्ते बंद थे।
  •  इसके बाद सिनेमाघर के मालिक सुशील.गोपाल अंसल और 16 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हुआ।
  • साल 2003 में कोर्ट ने पीड़ित के परिवारों को 25 करोड़ रुपए मुआवजा देने का आदेश सुनाया।
  • अंसल बंधुओं को दो साल कैद की सजा सुनाई गईए जिसे हाई कोर्ट ने घटाकर एक साल कर दिया।
  • साल 2015 में 19 अगस्त को अदालत ने 30.30 लाख रुपए का जुर्माना भरने पर अंसल बंधुओं को बरी करने का फैसला सुनाया

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