लोकसभा चुनावों से पूर्व ही बंगाल में सियासी आग लगा दी गयी थी। यह सियासी हिंसा का दौर चुनावों के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर दिन हिंसा की खबरें आ रही हैं। तृणमूल और भाजपा के बीच लोकसभा चुनाव के परिणाम आने बाद से टकराव बढ़ गई जिसमें लगातार खून बह रहा है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर गुंडागर्दी का आरोप लगा रही हैं।
भाजपा बार-बार आरोप लगाती रही है कि तृणमूल के कार्यकर्ता गुंडागर्दी कर रहे हैं और उनके कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहे हैं। 12 जून को इसी के विरोध में भाजपा ने पुलिस मुख्यालाय (लालबाजार) तक अभियान चलाकर प्रदर्शन किया। जहां पुलिस की तरफ से उनपर आंसू गैस के गोले दागे गए।
बंगाल में कल भी एक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या की खबर आई है। मालदा में बीजेपी कार्यकर्ता असित सिंह का शव मिला है। असित सिंह पिछले दो दिन से लापता थे और आज उनका शव घर से थोड़ी दूर मिला। 10 जून की रात को भी उत्तर 24 परगना जिले में बम से हमला कर दो लोगों की हत्या कर दी गई। तृणमूल ने दोनों को अपना समर्थक बताया है। वहीं हावड़ा में दो भाजपा समर्थकों की हत्या कर दी गई थी। दूसरी ओर राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी द्वारा दिल्ली में दिए गए बयान को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
वहीं 11 जून को ममता ने कहा था कि बंगाल को गुजरात नहीं होने देंगे। ममता ने दावा किया कि लोकसभा चुनावों के बाद से 10 लोगों की मौत हुई है और इनमें से आठ तृणमूल कांग्रेस के लोग हैं, बाकि बीजेपी के समर्थक हैं। उन्होंने हालांकि 10 लोगों के मारे जाने के संबंध में कोई और जानकारी नहीं दी। अब राज्यपाल ने जब पहल कर राज्य में शांति स्थापित करने को लेकर चार दलों की बैठक बुलाई है तो इस पर तृणमूल प्रमुख व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी क्या कहती हैं यह देखने वाली बात होगी।

