पिछले दो महीनों से भी ज्यादा समय से नए कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर के किसानों का आंदोलन जारी है। बीते मानसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए ये तीनों नए कृषि कानून सरकार के लिए गले ही हड्डी बने हुए हैं। ऐसे में अब जब संसद में बजट सत्र चल रहा है तो किसानों की हुंकार सड़क से लेकर संसद तक सुनाई दे रही है। संसद के बजट सत्र का आज तीन फरवरी को तीसरा दिन है और किसानों के मुद्दे पर आज भी काफी हंगामा हुआ । राज्यसभा की कार्यवाही में आज एक बार फिर से संसद में किसान आंदोलन और कृषि कानूनों पर हंगामा इतना बढ़ गया कि सभापति एम. वेंकैया नायडू को आम आदमी पार्टी के तीनों सांसद संजय सिंह, सुशील कुमार गुप्ता और एन.डी. गुप्ता को आज दिन भर के लिए निष्कासित करना पड़ा ।
किसानों के मुद्दे को लेकर राज्यसभा में भारी हंगामा कर रहे आम आदमी पार्टी के तीनों सांसद संजय सिंह, सुशील कुमार गुप्ता और एन.डी. गुप्ता को आज दिन भर के लिए निष्कासित कर दिया गया। सभापति एम. वेंकैया नायडू ने शून्यकाल काल के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा कराने का प्रयास किया तो आप के तीनों सांसद अपनी सीटों पर खड़े होकर नारे लगाने लगे। उन्होंने ‘कृषि कानूनों को रद्द करो’ के नारे लगाए।
वैंकैया नायडू ने कहा कि अभिभाषण पर चर्चा के दौरान ही किसानों के मुद्दे पर बहस करने की सहमति बन चुकी है। ऐसे में इन सदस्यों का सदन की कार्यवाही को बाधित करना अनुचित है। ये लोग वास्तव में किसानों के मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने तीनों सदस्यों से शांत होने और सदन की कार्यवाही चलने देने का अनुरोध किया, लेकिन इस पर भी तीनों सांसद नारे लगाते रहे।
इसके बाद उन्होंने तीनों सांसदों को नियम 255 के तहत सदन की कार्यवाही से बाहर करने की चेतावनी दी लेकिन सदस्यों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा और वे नारे लगाते रहे। इस पर सभापति ने कहा कि इन तीनों सदस्यों को सदन की कार्यवाही से दिनभर के लिए बाहर कर रहे हैं और उन्होंने तीनों सदस्यों को दिन भर के लिए सदन से बाहर जाने का आदेश दिया और सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित की ।
किसानों के मुद्दे पर आज कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने 19 पार्टियों की ओर से किसानों के मुद्दे पर चर्चा कराने का प्रस्ताव रखा। वहीं, संसद के दोनों सदनों में आज राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 फरवरी को राज्यसभा में राष्ट्रपति के भाषण पर चर्चा का जवाब देंगे।
किसानों के आंदोलन और उनसे जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए सरकार और विपक्ष में सहमति बन गई है। सरकार और विपक्ष में बनी सहमति के मुताबिक, राज्यसभा में किसानों के मुद्दे पर 15 घंटे तक चर्चा होगी। पिछले शुक्रवार यानि 29 जनवरी को हुए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अधिक समय आवंटित करने पर सहमत हुए हैं और सदस्य चर्चा के दौरान किसानों के विरोध के मुद्दों को उठा सकते हैं।
कल दो फरवरी को विपक्षी दलों ने कृषि क़ानूनों के मुद्दे पर वाकआउट किया था। उनके हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा था। सहमति बनने से पहले राज्यसभा में विपक्षी दलों ने हंगामा किया। हंगामा तब और बढ़ गया था जब राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने घोषणा की कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के बाद किसानों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी।
सदन की कार्यवाही आज जब फिर से शुरू हुई तो सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सदस्यों को सदन के भीतर मोबाइल फोन के इस्तेमाल के ख़िलाफ़ चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ‘राज्यसभा कक्षों के भीतर सेलुलर फोन के उपयोग पर प्रतिबंध है। यह देखा गया है कि कुछ सदस्य अपने मोबाइल फोन का उपयोग सदन की कार्यवाही को रिकॉर्ड करने के लिए कर रहे हैं जबकि ऐसा आचरण संसदीय शिष्टाचार के खिलाफ है। कल दो फरवरी को राज्यसभा में कामकाज शुरू होते ही कुछ विपक्षी दलों ने किसान आंदोलन पर चर्चा कराने की मांग की थी। कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद और आनंद शर्मा ने राज्यसभा में किसानों के मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दिया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद अर्पिता घोष ने भी इसी मुद्दे पर नोटिस दिया था।

