केंद्र में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में काबिज भाजपा अब पूरी तरह से मोदी-शाह की भाजपा में तब्दील हो चुकी है। अटल-आडवाणी काल के ज्यादातर प्रमुख चेहरे या तो मार्गदर्शक मंडल का हिस्सा बन चुके हैं या फिर राज्यों में राज्यपाल बना एक्टिव राजनीति से दूर कर दिए गए हैं। मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार बाद तो अब गिने-चुने ही ऐसे नेता मंत्री पद पर बचे हैं जिनका पहले वाली भाजपा में खासा कद हुआ करता था। पार्टी के दो पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी अकेले ऐसे बड़े नेता हैं जिनकी कुर्सी हाल फिलहाल तक सलामत है। नए मंत्रिमंडल में 30 कैबिनेट मंत्री हैं जिनमें से अधिकांश या तो आयातित चेहरे हैं या फिर जनाधार विहीन हैं। पांच कैबिनेट मंत्री ऐसे हैं जिनका राजनीति से दूर-दूर तक का कोई नाता नहीं रहा है। ये पांचों आईएएस अथवा आईपीएस अफसर रह चुके हैं। दो मंत्री कांग्रेसी मूल के हैं तो अन्य ऐसे चेहरे हैं जिनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर कभी नहीं रही। राज्य मंत्रियों में तो अधिकांश ऐसे ही चेहरों की भरमार है। पुरानी भाजपा के कई दिग्गज हालिया फेरबदल में पैदल किए जा चुके हैं। इनमें कई बार के सांसद संतोष गंगवार, डॉ हर्षवर्धन, रवि शंकर प्रसाद, थावर चंद्र गहलोत, डीवी सदानंद गौड़ा, प्रकाश जावेडकर आदि शामिल हैं। खबर है मोदी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भाजपा भीतर खासा आक्रोश पनपने लगा है। जानकारों का दावा है कि 2022 में पांच राज्यों के चुनावी नतीजे यदि पार्टी के प्रतिकूल रहे तो इन नेताओं का आक्रोश बगावत में बदल सकता है।

पायलट के बहुरेंगे दिन

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