सूबे की योगी सरकार भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कितनी तेजी से करती है, इसकी एक बानगी देखिए। विगत 15 मई को प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस में एक पुल हादसा होता है जिसमें लगभग डेढ़ दर्जन लोग काल-कवलित हो जाते हैं। चूंकि मामला पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र का था लिहाजा मीडिया में सुर्खियां बनते ही सरकार से लेकर सम्बन्धित विभाग की नौकरशाही तक ने इस मामले को संजीदगी से लिया और दावा कि जल्द ही दोषी लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई की जायेगी। सरकार और नौकरशाही संजीदगी महज चन्द दिनों की मेहमान रही। लगभग दो माह बाद की स्थिति यह है कि सरकार द्वारा महज दुख जताने के अलावा अभी तक दोषी लोगों को चिन्हित तक नहीं किया जा सका है। हालांकि इस दौरान जांच समितियां भी गठित की गयीं और फौरी तौर पर कुछ निचले क्रम के लोकसेवकों के खिलाफ निलम्बन की कार्रवाई भी की गयी लेकिन वास्तविक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के बाबत गठित की गयी कमेटी की रिपोर्ट का कोई अता-पता नहीं। सरकार की संवेदनहीनता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि दो माह पश्चात भी कमेटी अपनी जांच पूरी नहीं कर पायी है और न ही हादसे के लिए उत्तरदायी लोगों का निर्धारण ही हो पाया है।
इतना ही नहीं शासन स्तर से लेकर सेतु निगम तक किसी को भी हादसे में मारे गए व्यक्तियों की वास्तविक संख्या और उनको दिए गए सरकारी मुआवजे की जानकारी तक नहीं है। इस सम्बन्ध में पूरी जानकारी केवल जिला प्रशासन के पास होने की बात सरकार द्वारा आरटीआई के जबाब में कही जा रही है।

प्रथम दृष्टया प्रकाश में आया है कि इस कमेटी ने जांच के नाम पर महज खानापूर्ति की है और यह कमेटी पुल हादसे के किसी भी दोषी का नाम सामने लाने में नाकामयाब रही है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस मामले में सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी दोषी हैं। यदि वे सजगता बरतते तो शायद इस तरह का ह्दय विदारक हादसा न हुआ होता।
2261.20 मीटर लम्बे फ्लाईओवर को बनाने की जिम्मेदारी राज्य सेतु निगम की थी। इस कार्य की लागत लगभग 13 करोड़ है जिसमें लगभग 10 करोड़ रुपया फ्लाईओवर के निर्माण में खर्च किया जा चुका है।

आरटीआई के माध्यम से जब पुल हादसे के लिए दोषी पायी गयी कम्पनियों और ठेकेदारों के नामों की सूची मांगी गयी तो सेतु निगम की ओर से कहा गया कि प्रकरण में विभिन्न स्तर पर जांच चल रही है और जांच की कार्यवाही पूरी हो जाने के बाद ही दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की बात कही गयी।
आश्चर्य इस बात का है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद सूबे की सरकार दो माह बीत जाने के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पायी।

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