पीछले साल कर्नाटक के शैक्षिक संस्थानों से हिजाब प्रतिबंध को हटाया गया । इसी राह को अपनाते हुए असम के राजनीतिक दल (ऐआईयूडीएफ) ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने असम की महिलाओं से हिजाब पहनने की अपील की है। उनके अनुसार मुस्लिम महिलाओं का हिजाब पहनना उन्हें औरों से अलग दिखाता है। ऐआईयूडीएफ के चीफ बदरुद्दीन का कहना है कि आईएस ,आईपीएस , डॉक्टर महिलाओं को हिजाब पहनना चाहिए, जिससे उनकी पहंचान मुस्लिम के रुप में सके।
बदरुद्दीन अजमल द्वारा इस तरह की अपील असम करीमगंज की एक रैली को सम्बोधित करते हुए असम की महिलाओं से की गई। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम महिलाओं को हिजाब पहनना ,बाल ढकना नहीं आता तो उन्हें मुस्लिम के रुप में कैसे पहचाना जाएगा।बदरुद्दीन अजमल के इस अपील अनुसार मुस्लिम महिलाओं का हिजाब पहनना और नजरों को नीचे बनाए रखना जरूरी हैं। दरअसल रैली संबोधन के दौरान उन्होंने कहा है कि बाहरी क्षेत्रों की लड़कियां जब पढ़ने जाती है तो सिर पर हिजाब रहता है ,सर नीचे की ओर होता है और वह आंखें नीचे की ओर करके जा रही होती हैं। बदरुद्दीन अजमल ने कहा असम की महिलाओं का भी हिजाब पहनना जरूरी है ,सिर के बाल को छिपाकर रखना और हिजाब पहनना हमारे धर्म में है।
बदरुद्दीन अजमल ने लड़कियों के बाल और उनके मेकप को शैतान की रस्सी कहा है। महिलाओं का बाजार में या सार्वजनिक स्थल में जाने से पहले सर ढका हुआ यानि हिजाब पहन कर जाना और बाजार में महिलाओं की आँखें नीचे की ओर झुकी हुई जरूरी मानते हैं। वे मुस्लिम महिलाओं को कहते हैं कि साइंस लेकर पढों ,डॉक्टर बनो ,आईएस बनो ,आईपीएस बनो लेकिन महिलाएं अपने धर्म को फॉलो नहीं करेंगी तो यह कैसे समझ आएगा की मुसलमान डॉक्टर ,आईपीएस कौन है ,फर्क का अंदाजा कैसे करेंगे।
गौरतलब है कि ऐआईयूडीएफ के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल पहले भी विवादित बयानों के चलते सुर्ख़ियों में आते रहे हैं। पिछले वर्ष उन्होंने कहा था कि हम (मुस्लिम) चोरी, डकैती, रेप, लूट.. सभी अपराधों में नंबर-1 हैं। हम जेल जाने में भी नंबर-1 हैं, हालांकि, बाद में अपने बयान पर सफाई देते हुए अजमल ने कहा था कि दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय में शिक्षा की कमी है, हमारे बच्चे पढ़ते नहीं है, वो हायर एजुकेशन के लिए नहीं जाते, यहां तक कि मैट्रिक की पढ़ाई भी नहीं करते. इसलिए पढ़ाई का महत्व समझाने के लिए उन्होंने ऐसा कहा था।

