अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकार हर क्षेत्र से छीने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं के बावजूद तालिबान थमने का नाम नहीं ले रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार अपील की है कि अफगानी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जाए। हालांकि इन आलोचनाओं और अपीलों के बाद भी तालिबान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अफगानिस्तान में महिलाएं मेडिकल क्षेत्र से भी अब दूर हो सकती हैं। दरअसल तालिबान द्वारा अफगानी महिलाओं की नर्सिंग और मिडवाइफरी की पढ़ाई पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे महिलाओं की मेडिकल क्षेत्र में पहुंच पूरी तरह से खत्म हो गई है। तालिबान के इस फैसले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महिलाएं एक दूसरे को रोती हुई सांत्वना दे रही हैं।
तालिबान के एक सर्वोच्च नेता के इस फरमान को स्वास्थ्य अधिकारीयों और शिक्षक संस्थान के निदेशकों के बीच सांझा किया गया है। हालांकि इस तालिबानी फरमान का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन तालिबानी अधिकारी के अनुसार निदेशकों को सूचित किया गया है कि अब महिलाये और लड़कियां नर्सिंग और मिडवाइफरी की पढ़ाई नहीं कर पाएंगी। इससे अंदेशा लगाया जा सकता है कि भविष्य में अफगानी महिलाओं को कई परेशानियों और संकटों का सामना करना पड़ सकता है। मिडवाइफ़री या प्रसूतिविद्या, विज्ञान का एक क्षेत्र है। इसमें गर्भावस्था की तैयारी, प्रसव, स्तनपान, प्रजनन क्षमता, रजोनिवृत्ति, नवजात शिशुओं और बच्चों से जुड़ी जानकारी दी जाती है। मिडवाइफरी देखभाल, समग्र स्वास्थ्य और सूचित विकल्पों पर आधारित होती है।
इससे पहले भी अफगानी महिलाओं पर तालिबान द्वारा कई तरह के प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। साल 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से ही महिलाओं पर प्रतिबंध लगाना लगातार जारी रहा है। तालिबान के एक फरमान द्वारा साल 2022 में कक्षा 6 और उससे ऊपर की लड़कियों को स्कूल जाने से रोक दिया गया था। महिलाओं के विश्वविद्यालय में दाखिला लेने पर भी उसी साल प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस प्रतिबंध के अंतर्गत इंजीनियरिंग, पत्रकारिता , चिकित्सा जैसे विषयों पर भी पाबंदी लगाई गई थी। कहा गया कि ये क्षेत्र “महिलाओं के लिए अनुपयुक्त” हैं। शिक्षा क्षेत्र के अतिरिक्त महिलाओं को तालिबान शासन ने रोजगार, खेल , क्षेत्र से भी महिलाओं को वंचित कर दिया है। यही नहीं तालिबान की पाबंदियां महिलाओं के सार्वजनिक जीवन तक को प्रभावित कर रही हैं । महिलाओं को पार्कों, जिमों और यहां तक कि सार्वजनिक स्नानघरों में जाने से भी रोका गया है।

