पिछले महीने झारखण्ड और महाराष्ट्र विधानसभा के साथ हुए राजस्थान विधानसभा उपचुनाव की 7 में से 5 सीटों पर भाजपा को बड़ी जीत मिली। जबकि कांग्रेस और भारतीय आदिवासी पार्टी के खाते में 1-1 सीट आई। इस उपचुनाव में जहां कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा वहीं भाजपा ने अपेक्षा के अनुरूप अच्छा प्रदर्शन किया। उपचुनावों से पहले कहा जा रहा था कि अगर भाजपा अपेक्षा अनुसार सीट नहीं जीत पाएगी तो प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में इस परिणाम ने सीएम भजनलाल शर्मा के सियासी कद को बढ़ाया है, वहीं आगे मंत्रिमंडल में भी फेरबदल देखने को मिल सकता है। सीएम के इतर प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का भी इन नतीजों के बाद सियासी रुतबा बढ़ा है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में इसका असर संगठन में भी देखने को मिल सकता है। यह उपचुनाव सीएम भजनलाल शर्मा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल था। ऐसे में इस परिणाम से सीएम को संजीवनी मिली है। इन नतीजों ने सीएम भजनलाल शर्मा के सियासी कद को बढ़ाने का काम किया है वहीं सीएम बदलने के कयासों पर भी विराम लगाने के साथ ही अब माना जा रहा है कि पूरे पांच सालों तक भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बने रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा उपचुनाव के परिणाम का विधानसभा में बहुमत बल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि भाजपा के पास बहुमत से ज्यादा विधायक हैं लेकिन इससे सरकार के साथ ही संगठन का कद बढ़ गया है। प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने के साथ ही पहली अग्नि परीक्षा से गुजरे मदन राठौड़ अच्छे अंकों से पास हो गए हैं। प्रदेश में अगले महीने प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव होने हैं ऐसे में अब मदन राठौड़ की आगे की जिम्मेदारी और बढ़ सकती है। इसके अलावा संगठन में बदलाव भी होने के आसार हैं।

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