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बिलकिस बानो ने सुप्रीम कोर्ट में दोषियों की रिहाई को दी चुनौती

गोधरा दंगों के दौरान सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषियों की माफी के खिलाफ बिलकिस बानो ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कुछ महीने पहले गुजरात सरकार ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या करने वाले 11 दोषियों को रिहा कर दिया था।

बिलकिस बानो ने मामले में 1992 के एमनेस्टी रूल्स को लागू करने की गुजरात सरकार को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति को चुनौती दी है। उन्होंने 11 दोषियों की रिहाई को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका भी दायर की है। गुजरात में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद भड़के दंगों से भागते समय बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। उस वक्त 21 साल की बिलकिस पांच महीने की गर्भवती थी। उनकी तीन साल की बेटी समेत परिवार के सात सदस्यों को दंगाइयों ने पलक झपकते ही मार डाला था।

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इस मामले के 11 दोषियों को 15 अगस्त को गुजरात सरकार की माफी नीति के तहत गोधरा उप-जेल से रिहा कर दिया गया था। यह दोषी करीब 15 साल तक कैद में रहा। इस बीच प्रधान न्यायाधीश डी. वाई चंद्रचूड़ के समक्ष बानो द्वारा दायर याचिकाओं का आज उल्लेख किया गया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इस बात की जांच की जाएगी कि क्या दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो सकती है या एक ही पीठ के समक्ष सुनवाई हो सकती है।

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